पटना : बिहार की राजनीति में एक बड़े और ऐतिहासिक उलटफेर ने सबको चौंका दिया है। चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने अपनी राजनीतिक पारी का बेहद शानदार आगाज करते हुए पटना की हाईप्रोफाइल बांकीपुर सीट पर प्रचंड जीत हासिल की है। जन सुराज अभियान के प्रणेता प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी के सबसे मजबूत किले को ढहाते हुए करीब 19 हजार वोटों के भारी अंतर से बड़ी जीत दर्ज की है। इस करारी शिकस्त से बीजेपी खेमे में भारी सन्नाटा पसर गया है, जबकि जन सुराज के समर्थकों में जश्न का माहौल है।

रणनीतिकार से नेता बने ‘पीके’ का चला जादू
प्रशांत किशोर ने अब तक पर्दे के पीछे रहकर कई राजनीतिक दलों को सत्ता के शिखर तक पहुंचाया था, लेकिन इस बार वह खुद सीधे तौर पर चुनावी मैदान में उतरे थे। बांकीपुर की जनता ने उनके विजन और ‘जन सुराज’ के संकल्प पर अपनी मजबूत मुहर लगा दी है। अपनी पदयात्रा और जनसभाओं के दौरान पीके ने सीधे तौर पर स्थानीय जनता से जो संवाद स्थापित किया था, वह वोटिंग के दौरान पूरी तरह से उनके पक्ष में तब्दील होता नजर आया। युवाओं, महिलाओं और बदलाव की उम्मीद कर रहे मतदाताओं ने बड़ी संख्या में प्रशांत किशोर के पक्ष में मतदान कर उन्हें इस ऐतिहासिक जीत तक पहुंचाया।
बीजेपी के अभेद्य किले में लगाई बड़ी सेंध
बांकीपुर सीट को हमेशा से बीजेपी का एक अभेद्य और बेहद सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है। दशकों से यहां पार्टी का दबदबा रहा है। ऐसे में प्रशांत किशोर का इस सीट से चुनावी ताल ठोकना और फिर 19 हजार जैसे बड़े अंतर से एकतरफा जीत हासिल करना, बीजेपी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि सत्ता विरोधी लहर और प्रशांत किशोर की मजबूत रणनीति के आगे बीजेपी अपने पारंपरिक वोट बैंक को सहेजने में पूरी तरह से नाकाम रही। बांकीपुर की जनता ने पुराने चेहरों को दरकिनार करते हुए एक नई राजनीतिक सोच को अपना पूरा समर्थन दिया है।



