Sonbhadra News: दिल्ली में हुए दर्दनाक हादसे में सोनभद्र जिले के रेणुकूट के रहने वाले छात्र अभिषेक कुमार की मौत हो गई. अभिषेक दिल्ली विश्वविद्यालय में बीकॉम द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा था. हादसे की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया. बेटे की मौत की जानकारी मिलने के बाद उसके पिता दिल्ली के लिए रवाना हो गए.

मातापिता का सबसे छोटा बेटा था अभिषेक
अभिषेक अपने मातापिता का सबसे छोटा बेटा था. परिवार में उसका एक बड़ा भाई और एक बड़ी बहन है. उसका बड़ा भाई राजस्थान में बीटेक की पढ़ाई कर रहा है. अभिषेक अपने मातापिता के साथ रेणुकूट की हिंडालको कॉलोनी में रहता था. उसके पिता हिंडालको कंपनी में नौकरी करते हैं. फिलहाल अभिषेक की मां अपने गांव गई हुई हैं. अभिषेक मूल रूप से चंदौली जिले के झांसी गांव का रहने वाला था. बेटे की मौत की खबर के बाद परिवार और परिचितों के बीच मातम पसरा हुआ है.
वाराणसी में होगा अंतिम संस्कार
परिजनों के मुताबिक, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अभिषेक का शव वाराणसी लाया जाएगा. यहां उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा. इसके बाद चंदौली स्थित उसके पैतृक गांव झांसी में परिवार की ओर से जरूरी रीतिरिवाज पूरे किए जाएंगे. अभिषेक की मौत की खबर से रेणुकूट की हिंडालको कॉलोनी और उसके पैतृक गांव झांसी में शोक का माहौल है. परिवार के साथ उसके दोस्त और परिचित भी इस घटना से गहरे सदमे में हैं.
पहले ही करा रखा था आंखें दान करने का पंजीकरण
अभिषेक की मौत के बाद उसके परिवार से जुड़ी एक ऐसी जानकारी सामने आई है, जिसने इस दुख की घड़ी में मानवता की मिसाल पेश की है. अभिषेक ने पहले ही अपनी आंखें दान करने के लिए पंजीकरण करा रखा था. हादसे के बाद उसकी आंखें दान कर दी गईं. यानी दुनिया से विदा होने के बाद भी अभिषेक किसी की जिंदगी में रोशनी देने का जरिया बन गया.
बेटे को खोने के गम में मानवता की मिसाल
अभिषेक के पिता के मुताबिक, बेटे के जाने का दुख शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. हालांकि, इस बात से परिवार को कुछ संतोष जरूर है कि उसकी आंखों से किसी जरूरतमंद की जिंदगी रोशन हो सकेगी. अभिषेक की मौत ने परिवार को गहरा सदमा दिया है, लेकिन जातेजाते वह अंगदान और मानवता की एक ऐसी मिसाल छोड़ गया, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा.


