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शैडो बैंकिंग पर कड़ा पहरा: 1 लाख करोड़ के क्लब वाली NBFC के लिए नए नियम लागू, सिस्टम को क्रैश से बचाएगा RBI

एक लाख करोड़ रुपए या उससे अधिक की संपत्ति वाली नॉनबैंकिंग फाइनेंस कंपनियों को उच्च स्तर श्रेणी में रखा जाएगा. इसके लिए ऐसी कंपनियों की पहचान करने के मौजूदा तरीके की जगह एक आसान और ठोस मानदंड अपनाया जाएगा. भारतीय रिजर्व बैंक ने को कहा कि ‘उच्च स्तर’ में आने वाली एनबीएफसी के लिए व्यापक नियमों की जरूरत है. ‘उच्च स्तर’ में एनबीएफसी की पहचान करने के तरीके और सरकारी एनबीएफसी को विभिन्न स्तरों में रखने से जुड़े निर्देशों की समीक्षा के आधार पर मौजूदा नियमों में बदलाव करने की जरूरत है. केंद्रीय बैंक एनबीएफसी को उनके आकार, जोखिम स्थिति और प्रणाली के लिए उनकी अहमियत के आधार पर नियमन करता है.

शैडो बैंकिंग पर कड़ा पहरा: 1 लाख करोड़ के क्लब वाली NBFC के लिए नए नियम लागू, सिस्टम को क्रैश से बचाएगा RBI

एनबीएफसी के लिए बदले नियम

पैमाना आधारित रेगुलेशन के तहत नॉनबैंकिंग फाइनेंस कंपनियों को एनबीएफसीबुनियादी स्तर, एनबीएफसीमध्यम स्तर, एनबीएफसीउच्च स्तर और एनबीएफसीशीर्ष स्तर में बांटा गया है. रिजर्व बैंक दूसरा संशोधन निर्देश, 2026 के अनुसार, उच्च स्तर’ में वे एनबीएफसी शामिल होंगी जिनकी पहचान रिजर्व बैंक हर साल खास तौर पर करता है और जिनके लिए अधिक नियमों की जरूरत होती है. उच्च स्तर में एनबीएफसी की पहचान मानदंडों के बारे में कहा गया कि उच्च स्तर में वे एनबीएफसी शामिल होंगी जिनका संपत्ति आकार वित्त वर्ष के ताजा वित्तीय विवरण के अनुसार 1,00,000 करोड़ रुपए या उससे अधिक है.

हर तीन साल में होगी समीक्षा

इसमें आगे कहा गया है कि एनबीएफसीउच्च स्तर की पहचान के मानदंड की समयसमय पर समीक्षा की जानी चाहिए. साथ ही, एनबीएफसीउच्च स्तर की पहचान के लिए संपत्ति आकार की सीमा की समीक्षा हर तीन साल में की जानी चाहिए. केंद्रीय बैंक ने कहा कि जो एनबीएफसी किसी वाणिज्यिक बैंक की समूह इकाई हैं और अगर कोई खास व्यापार/गतिविधि एनबीएफसी और उसके मूल बैंक दोनों कर रहे हैं, उन्हें लागू नियमों का पालन करना चाहिए. आरबीआई के अनुसार, ये नियम उन एनबीएफसी पर लागू होते हैं जो अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की समूह इकाई हैं, चाहे इन निर्देशों के प्रावधानों के अनुसार उनका स्तर के आधार पर वर्गीकरण कुछ भी हो.

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