नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व ने बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने, भारतीय करेंसी को सपोर्ट देने और डॉलर रिजर्व बढ़ाने को लेकर बड़ा फैसला लिया है. RBI ने कुछ FCNR और NRE डिपॉजिट पर ब्याज दरों की ऊपरी सीमा को 30 सितंबर 2026 तक के लिए अस्थायी रूप से हटा दिया है.

इसका मकसद विदेशों में रहने वाले भारतीयों से अधिक डॉलर और विदेशी मुद्रा भारत में लाना है. अब तक बैंकों को FCNR और NRE जमा पर RBI द्वारा तय की गई एक सीमा से अधिक ब्याज देने की अनुमति नहीं थी, लेकिन अब ये लिमिट हटने से उन्हें ज्यादा ब्याज मिल सकती है. ऐसे में भारत में ज्यादा डॉलर आने की उम्मीद है. ऐसे में रुपये को सपोर्ट मिलेगा और बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ेगी.
अब RBI ने क्या कहा?
क्या होता है FCNR और NRE खाते?
सबसे पहले FCNR की बात करें तो यह विदेशी मुद्रा में FD अकाउंट होता है. ग्राहक जिस भी विदेशी करेंसी में इस अकाउंट में पैसा डालता है, उसे उसी करेंसी में पैसा वापस मिलता है. इसमें करेंसी का रिस्क नहीं होता है.
क्या होता है NRE अकाउंट?
विदेश में कमाए गए पैसे को भारतीय रुपये में जमा करने वाला अकाउंट एनआरई अकाउंट कहलाता है. इस अकाउंट के तहत कोई भी विदेश में बैठक अपने अकाउंट से ट्रांजेक्शन कर सकता है और ब्याज का भी लाभ उठा सकता है. साथ ही भारत में भी आकर इस अकाउंट का यूज कर सकता है.
आरबीआई के इस फैसले से क्याक्या होगा फायदा?
आरबीआई के इस फैसले से देश को आर्थिक मजबूती मिलेगी. उम्मीद की जा रही है कि इससे विदेशी निवेश भारत में तेजी से बढ़ेगा. साथ ही विदेशी मुद्रा भंडार में 35 से 40 अरब डॉलर का इजाफा हो सकता है. साथ ही रुपये को भी मजबूती मिलेगी. अधिक डॉलर आने से रुपये पर दबाव कम होगा.
इससे बैंकों की फंडिंग क्षमता बढ़ेगी और वे कर्ज देने में अधिक सक्षम हो सकते हैं. यह सिर्फ विदेश में रहने वाले भारतीय कस्टमर्स को प्रभावित करेगा. भारतीयों की एफडी में कोई बदलाव नहीं होगा.
आरबीआई ने डाले सिस्टम में डाले ₹72,300 करोड़
कंपनियों द्वारा एडवांस टैक्स जमा करने के कारण बैंकों के पास नकदी कम हो गई थी, इसलिए RBI ने बैंकों को ₹72,300 करोड़ की अल्पकालिक फंडिंग उपलब्ध कराई, ताकि बाजार में पैसों की कमी न हो और ब्याज दरें अचानक न बढ़ें. इससे रुपये, शेयर बाजार और बॉन्ड मार्केट को भी सपोर्ट मिलेगा.



