
सुलतानपुर, अमृत विचार। सड़क पर पड़ा पर्स, अंदर चार हजार रुपये नकद और मालिक की पहचान के लिए सिर्फ एक फोटो। ऐसी स्थिति में जहां कोई इसे अपनी किस्मत समझ सकता था, वहीं डायल 112 के चालक देवेंद्र कुमार चौबे ने रकम पर नहीं, ईमानदारी पर भरोसा किया। पर्स में मिली फोटो को सुराग बनाकर उन्होंने उसके मालिक की तलाश शुरू की और आखिरकार पर्स को उसके असली मालिक तक पहुंचा दिया।
फोटो बनी सुराग, शुरू हुई पर्स मालिक की तलाश
जयसिंहपुर कोतवाली क्षेत्र के करसा गांव निवासी होमगार्ड देवेंद्र कुमार चौबे डायल 112 में चालक हैं। वर्तमान में उनकी तैनाती कोतवाली नगर में है। मंगलवार शाम उन्हें एक पर्स मिला। पर्स खोलने पर उसमें चार हजार रुपये नकद मिले, लेकिन मालिक का नामपता बताने वाला कोई दस्तावेज नहीं था। पर्स में सिर्फ एक फोटो मौजूद थी।
देवेंद्र ने पर्स अपने पास रखने के बजाय उसी फोटो को पहचान का आधार बनाया और मालिक की तलाश में जुट गए।
करौंदिया पहुंची टीम, छेदी लाल की हुई पहचान
तलाश करते हुए डायल 112 की टीम कोतवाली नगर क्षेत्र के करौंदिया पहुंची। फोटो के आधार पर पर्स मालिक की पहचान छेदी लाल विश्वकर्मा के रूप में हुई। इसके बाद देवेंद्र कुमार चौबे ने चार हजार रुपये समेत पूरा पर्स छेदी लाल को सौंप दिया।
रकम से ज्यादा कीमती निकली ईमानदारी
खोया हुआ पर्स और उसमें रखी रकम वापस मिलने पर छेदी लाल विश्वकर्मा ने राहत की सांस ली। उन्होंने देवेंद्र कुमार चौबे की ईमानदारी की सराहना की।
चार हजार रुपये की रकम भले ही सीमित हो, लेकिन उसे उसके मालिक तक पहुंचाने की नीयत ने देवेंद्र की ईमानदारी को खास बना दिया।
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