
अंधविश्वास जब इंसान की सोच पर हावी हो जाता है, तो वह रिश्तों और दोस्ती को भी खून में बदल सकता है। एक पुरानी घटना में अपनी मां की मौत के लिए दोस्त के परिवार को जिम्मेदार मानने वाले युवक ने कथित तौर पर अपने साथियों के साथ मिलकर उसी दोस्त की हत्या की साजिश रच डाली। वारदात के बाद पहचान मिटाने के लिए शव और मोटरसाइकिल तक जला दी गई। शुरुआत में परिवार को गुमराह करने की कोशिश हुई, लेकिन पुलिस की जांच ने आखिरकार मामले की परतें खोल दीं।
मां की मौत के बाद दोस्त पर करने लगा शक
यह मामला मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले से जुड़ा है। पुलिस जांच के अनुसार, एक युवक की मां की करीब एक महीने पहले अचानक मौत हो गई थी। इसके बाद उसने बिना किसी ठोस आधार के शक करना शुरू कर दिया कि उसके दोस्त के परिवार की ओर से किए गए कथित जादू-टोने के कारण उसकी मां की मौत हुई है।
यही बेबुनियाद शक धीरे-धीरे दुश्मनी में बदल गया। आरोप है कि युवक ने अपने दोस्त से बदला लेने का मन बना लिया और इस साजिश में अपने एक अन्य साथी तथा दो नाबालिगों को भी शामिल कर लिया।
दोस्ती का भरोसा जीतकर जंगल ले गए
आरोपियों ने दोस्त को भरोसे में लेने के लिए कई बार जंगल में साथ बैठने और शराब पीने की योजना बनाई। इस तरह उसे किसी खतरे का अंदेशा नहीं हुआ।
आखिरकार दिसंबर की एक शाम उसे मध्य प्रदेश के मिडघाट क्षेत्र के सुनसान जंगल में ले जाया गया। रास्ते में शराब खरीदी गई और जंगल के भीतर बैठकर सभी ने पीना शुरू किया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने एक लड़की के आने का बहाना बनाकर उसे शराब पीने के लिए राजी किया।
जब युवक नशे में बेसुध हो गया, तभी मुख्य आरोपी ने भारी पत्थर से उसके सिर पर हमला कर दिया। इस हमले में उसकी मौत हो गई।
सबूत मिटाने के लिए शव और बाइक में लगाई आग
हत्या के बाद आरोपियों ने अपराध छिपाने की कोशिश की। पुलिस जांच के मुताबिक, उन्होंने शव और मोटरसाइकिल पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इसके बाद सभी वहां से लौट गए, ताकि किसी को उन पर शक न हो।
उधर, युवक के घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद भी कोई जानकारी नहीं मिली, तो पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई।
पुलिस को गुमराह करने के लिए बनाई कहानी
शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। उन्होंने युवक के किसी लड़की के साथ चले जाने की कहानी बताई। लेकिन जांच के दौरान पुलिस ने मोबाइल फोन की लोकेशन और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पड़ताल की।
जांच में घटना के समय आरोपियों की लोकेशन जंगल के आसपास एक साथ मिलने की बात सामने आई। इसके बाद पुलिस ने उनसे दोबारा पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान हत्या से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई।
जंगल से बरामद हुआ अधजला शव
दिसंबर के आखिरी दिनों में आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने जंगल से युवक का अधजला शव और जली हुई मोटरसाइकिल बरामद की। इसके बाद मामले में शामिल वयस्क आरोपियों को जेल भेजा गया, जबकि दोनों नाबालिगों के खिलाफ किशोर न्याय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई।
पुलिस ने इस वारदात को पूर्व नियोजित हत्या बताया था। जांच में सामने आए विवरणों के अनुसार, हत्या के पीछे कोई प्रमाणित कारण नहीं, बल्कि जादू-टोने को लेकर पाला गया संदेह था।
अंधविश्वास ने दोस्ती को दुश्मनी में बदल दिया
इस घटना की सबसे दुखद बात यह थी कि एक युवक ने अपनी मां की मौत का कारण बिना किसी प्रमाण के दूसरे परिवार को मान लिया। उसी शक ने उसे ऐसे रास्ते पर धकेल दिया, जहां दोस्ती और इंसानियत की जगह हिंसा ने ले ली।
अंधविश्वास के आधार पर किसी को दोषी मान लेना न केवल निर्दोष लोगों के लिए खतरा बन सकता है, बल्कि पूरे परिवार को जीवनभर के दुख में डाल सकता है। किसी भी संदेह की स्थिति में कानून और जांच पर भरोसा करना चाहिए, न कि खुद फैसला करके हिंसा का रास्ता अपनाना चाहिए।
सत्यमेव रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह लेख मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले से जुड़ी एक पुरानी घटना के उपलब्ध विवरणों पर आधारित है। पहचान संबंधी नाम और अन्य अनावश्यक संदर्भ हटा दिए गए हैं। आरोपों और पुलिस जांच से जुड़े तथ्यों को उसी संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है।



