उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने पूर्वांचल में अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है. वाराणसी में काशी और गोरक्ष क्षेत्र की 133 विधानसभा सीटों के प्रभारियों, विस्तारकों और पालकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम से संकेत मिले हैं कि पार्टी इस बार बैक टू बेसिक रणनीति पर जोर देगी. संगठन का फोकस बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने, जनता के बीच जाकर फीडबैक लेने और स्थानीय स्तर पर सामने आ रही समस्याओं को दूर करने पर रहेगा.

प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल पदाधिकारियों को 2017 और 2022 के चुनाव की तर्ज पर संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर लगातार संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं. इसी रणनीति के तहत विस्तारकों को बाइक देकर क्षेत्र में सक्रिय किया गया है. उनकी जिम्मेदारी केवल पार्टी के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि जनता के बीच जाकर सरकार, स्थानीय विधायकों और प्रशासन को लेकर लोगों की राय जानना भी होगा.
दलितपिछड़ों और नए वोटर्स पर विशेष फोकस
विस्तारकों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र में लोगों से नियमित संवाद करें और उनकी समस्याओं व अपेक्षाओं का फीडबैक सीधे संगठन तक पहुंचाएं. खास तौर पर दलित और पिछड़े समाज के लोगों की दिक्कतों को समझने पर जोर दिया गया है. पार्टी यह जानने की कोशिश करेगी कि सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक कितना पहुंच रहा है और उन्हें किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन, स्थानीय विधायकों के व्यवहार और लोगों की शिकायतों पर अधिकारियों की गंभीरता को लेकर भी जानकारी जुटाई जाएगी. नए वोटर्स और जेनजी मतदाताओं की आकांक्षाओं को समझने के लिए भी विस्तारकों को फीडबैक लेने को कहा गया है. संगठन की ओर से विस्तारकों को विधानसभा प्रभारियों और बूथ पालकों के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखने का निर्देश दिया गया है. पार्टी की कोशिश है कि क्षेत्र से मिलने वाली जानकारी के आधार पर संगठनात्मक कमियों और जनता की नाराजगी की पहचान की जा सके.
2024 से सबक लेने की कोशिश
प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल एक विस्तारक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष, प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े और प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने संगठन की मजबूती और 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों से मिले संकेतों पर जोर दिया.
उनके मुताबिक, पार्टी के भीतर इस बात को लेकर चिंता है कि जिस काशी क्षेत्र में 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया था, वहां लोकसभा चुनाव में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली. विस्तारक ने कहा कि संगठन ने लंबे समय की मेहनत से पूर्वांचल में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार की है और उसे कमजोर नहीं होने देना है.
काशी क्षेत्र के 16 जिलों में 71 विधानसभा सीटें हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में इनमें से 42 सीटों पर बीजेपी की जीत हुई थी. बनारस, मिर्जापुर और सोनभद्र में पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया था. हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में काशी क्षेत्र की 14 सीटों में से 10 पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा. इन नतीजों के बाद पार्टी अब विधानसभा स्तर पर संगठन की सक्रियता और जनता से संपर्क बढ़ाने पर जोर दे रही है.
पुराने कार्यकर्ताओं को सम्मान देने का निर्देश
प्रशिक्षण में विधानसभा प्रभारियों से कहा गया है कि वे पुराने कार्यकर्ताओं को सम्मान के साथ साथ लेकर क्षेत्र में जाएं. स्थानीय लोगों से मुलाकात कर उनकी राय जानें और उनकी शिकायतों को संगठन तक पहुंचाएं. बूथ पालकों से भी कहा गया है कि वे अपने अनुभव के आधार पर पार्टी के हित में जरूरी सुझाव विस्तारकों और विधानसभा प्रभारियों के साथ साझा करें.
संगठन का जोर इस बात पर है कि चुनाव की तैयारी केवल बड़े कार्यक्रमों और नेताओं की सभाओं तक सीमित न रहे, बल्कि बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जनता से संवाद लगातार बना रहे. पार्टी चाहती है कि स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली नाराजगी और संगठन की कमजोरियों का समय रहते पता लगाया जा सके.
विकास को जनता तक पहुंचाने की रणनीति
बीजेपी पदाधिकारियों को उत्तर प्रदेश में कानूनव्यवस्था में आए बदलावों और विकास कार्यों को जनता के बीच ज्यादा से ज्यादा साझा करने के निर्देश भी दिए गए हैं. सोशल मीडिया के माध्यम से क्षेत्र में चल रही विकास परियोजनाओं और सरकार की योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया है.
इसके साथ ही विधानसभा प्रभारियों से समाजवादी पार्टी की पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार और आपराधिक घटनाओं का मुद्दा भी जनता के बीच उठाने को कहा गया है. इस तरह पार्टी एक तरफ मौजूदा सरकार के कामकाज को सामने रखने और दूसरी तरफ विपक्ष के शासनकाल से तुलना करने की रणनीति पर काम कर रही है.



