Pune Ketan Agarwal Case: 2004 कॉल और 238 घंटे की फोन चैट… यह कोई आम प्रेम कहानी का आंकड़ा नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड को सुलझाने वाली सबसे अहम डिजिटल कड़ी है. केतन की होने वाली पत्नी सिया गोयल अपने प्रेमी चेतन चौधरी के प्यार में इस कदर अंधी हो चुकी थी कि उसने इस खौफनाक साजिश को अंजाम दे डाला. शुरुआती दौर में महज एक हादसा दिखने वाला यह मामला अब पूरी तरह से सुनियोजित हत्या के रूप में सामने आ चुका है, जिसमें हर दिन चौंकाने वाले मोड़ आ रहे हैं.

शुरुआत में यही माना जा रहा था कि 26 वर्षीय केतन विशाल अग्रवाल 18 जून को ऐतिहासिक लोहागढ़ किले के पास एक गहरी घाटी में पैर फिसलने से गिर गए और उनकी मौत हो गई. केतन के अंतिम संस्कार के चार दिन बाद सिया गोयल उनके परिवार से मिलने पहुंची. इस दौरान केतन की बहन ने जब सिया से उस दिन के घटनाक्रम को लेकर कुछ सवाल पूछे, तो उसके जवाबों में भारी विरोधाभास था. बहन का शक गहराया, उसने परिवार को बताया और फिर पुलिस सक्रिय हुई.
238 घंटे की बातचीत और डिजिटल सबूत
लोहागढ़ पुलिस ने जब अपनी जांच की दिशा बदली और सर्विलांस का सहारा लिया, तो पैरों तले की जमीन खिसक गई. पिछले छह महीनों के भीतर सिया और चेतन चौधरी के बीच 2004 बार कॉल हुई थी, जिसमें दोनों ने लगभग 238 घंटे तक बात की थी. इसी लंबी कॉल हिस्ट्री ने जांच एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींचा और हत्या की पूरी साजिश की परतें खुलती चली गईं.
चेतन की शातिर प्लानिंग और पुलिस का सुराग
पुलिस को सबसे बड़ा सुराग 18 जून के चेतन के मोबाइल डेटा से मिला. वारदात के दिन सुबह 7 बजे से शाम 5:40 बजे तक चेतन का इंटरनेट पूरी तरह बंद था. जांच में पता चला कि चेतन ने जानबूझकर अपना मोबाइल अपनी दुकान में ही छोड़ दिया था ताकि उसकी लोकेशन ट्रेस न हो सके. वह अपने दुकान के एक कर्मचारी का मोबाइल लेकर चुपके से लोहागढ़ किला पहुंचा था. उसे लगा कि वह पुलिस को चकमा दे देगा, लेकिन डिजिटल फुटप्रिंट्स ने उसकी इस खतरनाक योजना का पर्दाफाश कर दिया.
बचाव पक्ष के वकील का सनसनीखेज दावा
इस मामले में दोनों आरोपियों को 29 जून तक की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है. इसी बीच, कानूनी गलियारों में एक नया मोड़ तब आया जब आरोपी नंबर दो चेतन चौधरी के वकील राम शाहणे ने पुलिसिया दावों को चुनौती दी.
वकील शाहणे का दावा है कि पुलिस द्वारा दर्ज FIR में चेतन के खिलाफ कोई ठोस या सीधा आरोप नहीं है. उन्हें सिर्फ लड़की का दोस्त होने के नाते सहआरोपी बनाया गया है. वकील ने यह भी तर्क दिया कि चेतन घटना के वक्त लोहागढ़ इलाके में मौजूद था, इसका कोई भी पुख्ता दस्तावेजी प्रमाण या CCTV फुटेज कोर्ट में पेश नहीं किया गया है. इस दावे के बाद अब यह केस और भी पेचीदा हो गया है.


