सिनेमा और राजनीति का रिश्ता भारत में खासकर दक्षिण भारत में हमेशा से ही गहरा रहा है, लेकिन जो करिश्मा 4 मई 2026 को तमिलनाडु की धरती पर हुआ, वह किसी फिल्मी क्लाइमेक्स से भी ज्यादा रोमांचक और चौंकाने वाला है। सुपरस्टार थलापति विजय ने कुछ ही साल पहले कैमरे को अलविदा कहकर जनसेवा का रास्ता चुना था, आज तमिलनाडु के नए ‘जननायक’ बनकर उभरे हैं। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम ने महज दो साल के भीतर 108 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया है, जिसकी तुलना अब सीधे एमजी रामचंद्रन से की जा रही है। इस बंपर जीत के बीच सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर जिस एक चीज की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है विजय की साल 2018 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘सरकार’। लोग अचंभित हैं कि कैसे 8 साल पहले पर्दे पर दिखाई गई एक कहानी, आज विजय की असल जिंदगी का सच बन गई है।

पर्दे की ‘सरकार’ और हकीकत का सिंहासन
साल 2018 में एआर मुरुगदॉस के निर्देशन में बनी फिल्म ‘सरकार’ ने उस समय बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाया था। ₹110 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने ₹253 करोड़ की कमाई कर नया कीर्तिमान स्थापित किया था। फिल्म में विजय ने सुंदर रामास्वामी नामक एक एनआरआई कॉर्पोरेट दिग्गज का किरदार निभाया था, जो केवल अपना वोट डालने भारत आता है। कहानी में मोड़ तब आता है जब उसे पता चलता है कि उसका वोट किसी और ने फर्जी तरीके से डाल दिया है। यहीं से शुरू होती है एक व्यक्ति की भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ जंग। फिल्म में सुंदर रामास्वामी न केवल अपने वोट के लिए लड़ता है, बल्कि चुनाव लड़कर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचता है। आज 2026 में तमिलनाडु के चुनावी नतीजों को देखकर ऐसा लगता है मानो विजय ने अपनी इसी फिल्म की स्क्रिप्ट को असल जिंदगी में जिया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ युद्ध, चुनावी धोखाधड़ी पर प्रहार और जनता के अधिकारों की रक्षा ये वो मुद्दे थे जो 2018 में पर्दे पर दिखे और 2026 में विजय की राजनीतिक रैलियों का मुख्य केंद्र भी यही मुद्दे रहे।
मछुआरे के बेटे से कॉर्पोरेट मुख्यमंत्री तक का सफर
फिल्म ‘सरकार’ के एक सीन में दिखाया गया है कि कैसे नायक सुंदर रामास्वामी पर सत्ताधारी दल के गुंडे हमला करते हैं, जिसके बाद वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला करता है। शुरुआत में लोग उसे एक अमीर कॉर्पोरेट व्यक्ति मानकर दूर भागते हैं, लेकिन फिर वह एक भावुक भाषण देता है। वह बताता है कि कैसे वह एक साधारण मछुआरे के बेटे से दुनिया का सफल बिजनेसमैन बना। इस एक भाषण ने पर्दे पर फिल्म की कहानी बदल दी थी। दिलचस्प बात यह है कि असल जिंदगी में भी विजय ने पिछले दो सालों में ठीक इसी तरह का जमीनी स्तर पर संगठन खड़ा किया। उन्होंने न केवल अपनी फिल्मी साख का इस्तेमाल किया, बल्कि विक्रवांडी के विशाल सम्मेलन और जमीनी रैलियों के जरिए यह साबित किया कि वे केवल एक स्टार नहीं, बल्कि जनता के दुखदर्द समझने वाले नेता हैं। उनके घोषणापत्र में दिहाड़ी मजदूरों, महिलाओं और युवाओं को जो प्राथमिकता दी गई, उसने फिल्म की उस कॉर्पोरेट संवेदनशीलता को धरातल पर उतार दिया।
वोट की ताकत और रिकॉर्ड तोड़ मतदान
फिल्म ‘सरकार’ का सबसे प्रभावशाली संदेश था, ‘जाओ और वोट दो, जो तुम्हारा है उसे छिनने मत दो।’ फिल्म में विजय का किरदार धारा 49P का जिक्र करता है, जो फर्जी वोट डलने की स्थिति में दोबारा वोट डालने का अधिकार देता है। असल चुनाव प्रचार के दौरान भी विजय ने अपनी रैलियों में जनता को उनके इसी कानूनी अधिकार के प्रति जागरूक किया। इसका असर नतीजों में साफ दिखा। 2026 के विधानसभा चुनाव में तमिलनाडु ने 85.1% की ऐतिहासिक वोटिंग दर्ज की, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। युवाओं और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं ने जिस तरह से घरों से निकलकर ‘सीटी’ बजाई, उसने राज्य के पुराने राजनीतिक समीकरणों को ध्वस्त कर दिया। फिल्म की रैलियों में बजने वाली तालियां, असल जिंदगी के पोलिंग बूथों पर वोटों में तब्दील हो गईं।
दिग्गजों का पतन और नए युग का उदय
4 मई 2026 की सुबह जब वोटों की गिनती शुरू हुई तो शुरुआती रुझानों ने ही साफ कर दिया था कि तमिलनाडु एक बड़े बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। TVK ने शुरुआत से ही 100 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाकर सत्ता की बड़ी दावेदारी पेश कर दी। अंतिम परिणामों में 108 सीटों के साथ विजय ने वह कर दिखाया जो रजनीकांत और कमल हासन जैसे दिग्गज भी नहीं कर पाए थे। इस चुनाव में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि 2021 में भारी बहुमत से जीतने वाली DMK पीछे रह गई। वहीं AIADMK जिसने 2018 में फिल्म ‘सरकार’ के प्रदर्शन को रोकने और उसमें काटछांट करने की पूरी कोशिश की थी, आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। यह नियति का ही खेल है कि जिस पार्टी ने पर्दे की ‘सरकार’ को दबाना चाहा, उसे आज असल ‘सरकार’ ने हाशिए पर धकेल दिया है।
फिल्म से प्रेरणा या नियति का खेल?
कई आलोचक 2024 में विजय के फिल्मों से संन्यास और राजनीति में आने के फैसले को जोखिम भरा मान रहे थे। उनके पास न तो DMK जैसा दशकों पुराना कैडर था और न ही किसी बड़े गठबंधन का सहारा। उनके पास था तो बस फिल्म ‘सरकार’ जैसा विजन और करोड़ों प्रशंसकों का निस्वार्थ प्रेम। 2018 की वह काल्पनिक कहानी आज 2026 में 51 वर्षीय विजय के लिए एक दस्तावेज बन चुकी है। वैसे विजय की राजनीतिक दिलचस्पी दो साल पहले नहीं बल्कि 17 साल पहले ही दिखने लगी थी, जब उन्होंने साल 2009 में उन्होंने अपने फैन कल्ब को वेलफेयर असोसिएशन में तब्दील किया था, जिसका नाम था विजय मक्कल इयक्कम, यहीं से उन्होंने जमीनी स्तर पर लोगों को अपने साथ जोड़ना शुरू कर दिया था।
कहां देखें थलापति विजय की ‘सरकार’?
यदि आप भी थलापति विजय की इस करिश्माई जीत के जश्न में शामिल होना चाहते हैं और उस फिल्म को दोबारा देखना चाहते हैं जिसने इस जीत की नींव 8 साल पहले ही रख दी थी तो ‘सरकार’ वर्तमान में कई ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है। आप इसे Jio Hotstar, Netflix, Sun NXT, और YouTube पर देख सकते हैं। फिल्म देखते हुए आपको महसूस होगा कि कैसे एक सुपरस्टार ने चुपचाप सालों पहले ही अपनी राजनीतिक पारी का खाका जनता के सामने पेश कर दिया था।



