SIR पर एक महीने से जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने कहा कि हमने SIR के फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया। नियमों के अनुसार इस पर बदलाव का अधिकार केंद्र के पास है।
चुनाव आयोग ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया। आयोग ने कहा कि SIR पर सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
फैसलों पर CEC ज्ञानेश कुमार, कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी तीनों की सहमति थी। कोर्ट में दाखिल एफिडेविट पर भी तीनों के दस्तखत हैं।
यह हलफनामा उस याचिका के जवाब में फाइल किया गया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने ECI, CEC और दूसरे अधिकारियों को नोटिस दिया था।
विवाद तब शुरू हुआ जब पिछले महीने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने रिपोर्ट दी कि दो चुनाव आयुक्तों ने SIR के फॉर्म 6 बदलावों पर आपत्ति जताई थी। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई।
SIR से जुड़ी राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 27 अक्टूबर को सुनवाई होगी।
फॉर्म6 में बदलाव का अधिकार सरकार के पास
आयोग का कहना है कि ‘मतदाता पंजीकरण नियम, 1960’ के तहत निर्धारित फॉर्म में केवल सरकार ही बदलाव कर सकती है।
आयोग ने साफ किया कि SIR के दौरान मांगा गया डिक्लेरेशन एक अलग दस्तावेज है और इसे फॉर्म 6 में किया गया संशोधन नहीं माना जा सकता।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने रिपोर्ट दी कि दो चुनाव आयुक्तों ने उन बदलावों पर आपत्ति जताई थी, जिनके तहत आवेदकों को खुद को, अपने मातापिता या दादादादी/नानानानी को पिछली SIR से जोड़ने वाले डिटेल देने के लिए कहा गया था।
ECI ने माना कि ऑनलाइन आवेदन प्लेटफॉर्म पर जिस तरह से यह घोषणा प्रदर्शित की गई थी, उससे ऐसा लग सकता था कि फॉर्म 6 में बदलाव किया गया है।
आयोग ने कहा कि याचिका एक रिपोर्ट पर आधारित है। याचिकाकर्ता ने उसमें किए गए दावों की संबंधित अधिकारियों से स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की, इसलिए याचिका सुनवाई के योग्य नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के जवाब
फाइल पर आपत्ति लिखना, फैसले का विरोध नहीं: आयोग ने कहा कि फाइल पर लिखे सवाल, सुझाव या आपत्तियां अपने आप में आयोग का अंतिम फैसला नहीं होतीं।
नाम का पुरानी वोटर लिस्ट से मिलान नहीं हुआ तो BLO घर आएंगे: जिन लोगों के नाम पुरानी वोटर लिस्ट से नहीं जुड़ पाए हैं, उनके जरूरी दस्तावेज BLO घर जाकर जुटाएंगे और ऑनलाइन अपलोड करेंगे।
हर वोटर को सुनवाई के लिए दफ्तर नहीं बुलाया जाएगा: आयोग ने कहा कि ऐसे वोटरों को आम तौर पर खुद पेश होने की जरूरत नहीं होगी। जरूरत पड़ने पर सुनवाई होगी और जहां संभव होगा, ऑनलाइन की जाएगी।
वोटर लिस्ट में नाम जोड़नेकाटने का फैसला अधिकारी करेंगे: आयोग ने साफ किया कि वोटर लिस्ट में किसी का नाम बिना सक्षम चुनाव अधिकारी के आदेश के न जोड़ा जाएगा और न हटाया जाएगा।
ECINet की जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम: IIT मद्रास और IISc बेंगलुरु के विशेषज्ञों की एक समिति बनाई गई है। यह टीम जांचेगी कि ECINet प्लेटफॉर्म ठीक से काम कर रहा है या नहीं और नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।
CEC को हटाना आसान नहीं: आयोग ने कहा कि संविधान के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी प्रक्रिया और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिन पर सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को हटाया जाता है।
अभी संक्षिप्त जवाब, आगे विस्तार से जवाब देंगे: आयोग ने कहा कि दशहरे की छुट्टियों के कारण फिलहाल छोटा जवाब दाखिल किया गया है। जरूरत पड़ने पर वह हर आरोप का विस्तार से जवाब भी देगा।



