Agra Road Construction Quality: आगरा को स्मार्ट सिटी कहा जाता है… मेट्रो सिटी कहा जाता है… मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं वाले शहरों में आगरा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। मुख्यमंत्री खुद विकास परियोजनाओं की समीक्षा करते हैं और अधिकारियों को गुणवत्ता से कोई समझौता न करने के निर्देश देते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से कहीं अलग तस्वीर दिखा रही है।

आगरा के पॉश कर्मयोगी एंक्लेव रोड पर सड़क अचानक धंस गई। सड़क के बीचोंबीच करीब 5 फुट चौड़ा और लगभग 10 फुट गहरा गड्ढा बन गया। गड्ढा इतना गहरा है कि इसे देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर सड़क धंसने के समय वहां से कोई स्कूली बस, कार या भारी वाहन गुजर रहा होता तो स्थिति कितनी भयावह हो सकती थी।
चार महीने में दूसरी बार बना बड़ा गड्ढा
घटना सुबह करीब छह बजे सामने आई। सड़क धंसने के बाद स्थानीय लोगों और राहगीरों में हड़कंप मच गया। सबसे गंभीर सवाल यह है कि जिस सड़क को बने अभी करीब चार महीने ही हुए हैं, वहां एक महीने के भीतर दूसरी बार बड़ा गड्ढा कैसे बन गया?
स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण में यदि मानकों का सही तरीके से पालन हुआ होता और निर्माण के बाद निगरानी की गई होती तो इतनी कम अवधि में सड़क का इस तरह धंसना गंभीर सवाल खड़े नहीं करता।
जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
मामले को लेकर नितिन कोहली भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने सीढ़ी के सहारे गड्ढे में उतरकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराया और जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
स्थानीय लोगों के मुताबिक मामले में नगर निगम, जलकल विभाग और संबंधित निजी कंपनी की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं सबसे बड़ा सवाल यह है कि सड़क धंसने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? निर्माण करने वाले की, निगरानी करने वाले विभाग की या सड़क के नीचे किसी तकनीकी खामी की?
अब जब सड़क की यह तस्वीरें सामने आ चुकी हैं और गड्ढा दुनिया के सामने है, तो जिम्मेदार विभागों के सामने सिर्फ गड्ढा भरने की चुनौती नहीं है। चुनौती यह भी है कि आखिर चार महीने पुरानी सड़क दूसरी बार क्यों धंसी?
क्योंकि सवाल सिर्फ एक गड्ढे का नहीं है…सवाल उस सड़क की गुणवत्ता का है, सवाल करोड़ों रुपये के निर्माण का है, सवाल सरकारी निगरानी का है और सबसे बढ़कर सवाल जनता की सुरक्षा का है।
अगर स्मार्ट सिटी की सड़कें इस तरह धंसती रहेंगी तो फिर सवाल उठना लाजिमी है आखिर है या गड्ढों का शहर?



