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​NSE IPO Listing: बाजार में आज एंट्री लेगी देश की सबसे बड़ी एक्सचेंज कंपनी, कितने रुपये पर लिस्ट हो सकता है शेयर?

NSE IPO Listing: शेयर बाजार के निवेशकों का लंबा इंतजार आज खत्म होने जा रहा है. देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के शेयर आज यानी 24 सितंबर 2026 को 10 बजे बाजार में लिस्ट होने वाले हैं. एनएसई के शेयरों की लिस्टिंग बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर होगी. इस आईपीओ को लेकर बाजार में लंबे समय से चर्चा थी. निवेशकों ने इसमें बढ़चढ़कर पैसे भी लगाए हैं. लेकिन लिस्टिंग से ठीक पहले ग्रे मार्केट से जो संकेत मिल रहे हैं, वो निवेशकों की धड़कनें बढ़ा सकते हैं. शुरुआत में जिस तरह का उत्साह दिख रहा था, वो अब थोड़ा ठंडा पड़ता नजर आ रहा है. बाजार के जानकार और निवेशक अब इस बात पर नजर गड़ाए बैठे हैं कि क्या ये एक्सचेंज दिग्गज ग्रे मार्केट के संकेतों को पीछे छोड़ते हुए एक दमदार शुरुआत कर पाएगा या नहीं.

​NSE IPO Listing: बाजार में आज एंट्री लेगी देश की सबसे बड़ी एक्सचेंज कंपनी, कितने रुपये पर लिस्ट हो सकता है शेयर?

लिस्टिंग से पहले GMP का हाल

किसी भी शेयर की लिस्टिंग से पहले उसका ग्रे मार्केट प्रीमियम काफी मायने रखता है. एनएसई आईपीओ का जीएमपी शुरुआत में 4 फीसदी के करीब चल रहा था. अब ये गिरकर 2.4 फीसदी पर आ गया है. अगर रुपयों में बात करें, तो ग्रे मार्केट में एनएसई के शेयर करीब 43 रुपये के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं. कंपनी ने अपने एक शेयर का अपर प्राइस बैंड 1,785 रुपये तय किया था. अगर हम मौजूदा जीएमपी को इस प्राइस बैंड में जोड़ दें, तो एनएसई के शेयर की अनुमानित लिस्टिंग प्राइस 1,828 रुपये के आसपास बैठती है. ये आंकड़े बताते हैं कि निवेशकों को लिस्टिंग वाले दिन कोई बहुत बड़ा बंपर मुनाफा शायद न मिले. मौजूदा स्थिति में एक सामान्य और सीमित लिस्टिंग गेन की ही उम्मीद की जा रही है.

पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल

एनएसई का ये आईपीओ कोई छोटा इश्यू नहीं है. इसका कुल आकार 22,562 करोड़ रुपये का है. इस आईपीओ की सबसे खास बात ये है कि ये पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल है. इसमें 12.64 करोड़ शेयर बिक्री के लिए रखे गए हैं. ऑफर फॉर सेल का सीधा मतलब ये होता है कि आईपीओ से मिलने वाला सारा पैसा कंपनी के खाते में नहीं जाएगा. ये पैसा उन निवेशकों को मिलेगा जो इस आईपीओ के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं. कंपनी ने इस इश्यू के लिए प्राइस बैंड 1,700 रुपये से लेकर 1,785 रुपये प्रति शेयर तय किया था. रिटेल निवेशकों के लिए एक लॉट में 8 शेयर रखे गए थे. इश्यू का आकार बड़ा होने के कारण बाजार में लिक्विडिटी पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है.

निवेशकों का मिला तगड़ा रिस्पॉन्स

भले ही ग्रे मार्केट में प्रीमियम बहुत ज्यादा न हो, लेकिन सब्सक्रिप्शन के मामले में इस आईपीओ ने शानदार प्रदर्शन किया है. ये इश्यू 17 सितंबर को खुला था. 21 सितंबर को ये बंद हुआ. इस दौरान हर कैटेगरी के निवेशकों ने इसमें जमकर पैसे लगाए. ओवरऑल बात करें तो ये आईपीओ 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ है. सबसे ज्यादा उत्साह क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स ने दिखाया. उनका हिस्सा 12.68 गुना भरा गया.

इसके बाद नॉनइंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की कैटेगरी में 6.55 गुना सब्सक्रिप्शन देखने को मिला. वहीं, रिटेल निवेशकों का हिस्सा भी 1.39 गुना भर गया. भारी भरकम इश्यू साइज के बावजूद रिटेल हिस्से का पूरा भरना निवेशकों के भरोसे को दिखाता है. इस आईपीओ को मैनेज करने की जिम्मेदारी कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी लिमिटेड, मॉर्गन स्टेनली इंडिया कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के साथ एचएसबीसी सिक्योरिटीज के पास है. लिंक इनटाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को इसका रजिस्ट्रार बनाया गया है.

भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज

एनएसई कोई आम कंपनी नहीं है. ये भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है. इसका बिजनेस मॉडल पूरी तरह से वर्टिकली इंटीग्रेटेड है. ट्रेडिंग, क्लियरिंग, लिस्टिंग, डेटा सर्विस से लेकर इंडेक्स लाइसेंसिंग तक हर जगह इसका राज है. कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में कैश मार्केट, फ्यूचर्स, ऑप्शंस, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स से लेकर होलसेल डेट मार्केट तक शामिल हैं. जून 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, एनएसई के पास 13.24 करोड़ से ज्यादा यूनिक रजिस्टर्ड निवेशक हैं. इसके प्लेटफॉर्म पर 1,328 ट्रेडिंग मेंबर जुड़े हैं. साथ ही 3,000 से ज्यादा कंपनियां लिस्टेड हैं जिनका कुल मार्केट कैप 474.1 ट्रिलियन रुपये के करीब है.

मार्केट शेयर की बात करें तो कैश मार्केट में एनएसई की हिस्सेदारी 93 फीसदी है. इक्विटी फ्यूचर्स में ये 99.7 फीसदी पर काबिज है. इक्विटी ऑप्शंस में इसका प्रीमियम टर्नओवर 68.5 फीसदी है. यस सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लिस्टेड इक्विटी ट्रेडिंग का लगभग पूरा फ्लो एक ही प्लेटफॉर्म से होकर गुजरता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि एनएसई का फायदा सिर्फ प्राइसिंग में नहीं है, बल्कि एक लिक्विडिटी साइकिल में है. जहां स्प्रेड कम होते हैं, ऑर्डर वहीं जाते हैं. कंपनियां वहीं लिस्ट होती हैं जहां ट्रेडिंग एक्टिविटी ज्यादा होती है. इससे बाजार में गहराई आती है जिससे और ज्यादा भागीदार आकर्षित होते हैं.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.

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