भारतीय नौसेना इस हफ्ते इतिहास रचने जा रही है. देश की समुद्री ताकत को और मजबूत करने के लिए कोलकाता में एक साथ तीन आधुनिक युद्धपोतों आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस अग्रे और आईएनएस संशोधक को नौसेना में कमीशन किया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक इस बेहद खास कार्यक्रम में केंद्र सरकार के बड़े मंत्रियों के साथसाथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी शामिल होने की उम्मीद है.

भारतीय नौसेना के इतिहास में यह सिर्फ दूसरा मौका है जब तीन बड़े और आधुनिक युद्धपोत एक साथ देश की सेवा में उतारे जा रहे हैं. इससे पहले पिछले साल जनवरी में मुंबई में ऐसा किया गया था. नौसेना में कमीशन होने जा रहे ये तीनों युद्धपोत अलगअलग कामों के लिए बनाए गए हैं. जब ये तीनों मिलकर काम करेंगे, तो भारतीय नौसेना के लिए समंदर में एक ऐसा अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार होगा जिसे भेदना दुश्मनों के लिए नामुमकिन होगा.
1.INS दूनागिरी — ‘दुश्मन के जहाजों का काल’
- यह एक स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है. स्टील्थ का मतलब है कि इसका डिजाइन ऐसा है कि यह दुश्मन के रडार की नजर में आसानी से नहीं आता.
- नौसेना का घातक युद्धपोत: इसमें भारत की सबसे खतरनाक ब्रह्मोससुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, एडवांस टॉरपीडो लगे हैं. ब्रह्मोस मिसाइल आवाज की रफ्तार से तीन गुना तेजी से हमला करती है, जिसे रोक पाना किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए लगभग असंभव है.
- हवाई सुरक्षा: इसमें हवा से आने वाले दुश्मन के लड़ाकू विमानों और मिसाइलों को हवा में ही उड़ाने के लिए ‘सर्फेसटूएयर मिसाइल’ और क्लोजइन वेपन सिस्टम लगे हैं.
- खास तकनीक: यह CODOG सिस्टम पर चलता है. यानी सामान्य समय में यह किफायती डीजल इंजन पर चलता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसके गैस टरबाइन चालू हो जाते हैं जो इसे अचानक तेज रफ्तार दे देते हैं.
2. INS अग्रे— ‘पनडुब्बियों का साइलेंट किलर’
यह एक एंटीसबमरीन शैलो वाटर क्राफ्ट है. इसे खास तौर पर कम गहरे पानी यानी तटीय इलाकों में छिपकर हमला करने वाली दुश्मन की पनडुब्बियों को ढूंढकर मारने के लिए बनाया गया है.
दुश्मन का सफाया: पाकिस्तान चीन की मदद से लगातार अपनी ‘हैंगोरक्लास’ पनडुब्बियों को मजबूत कर रहा है, जो भारत के तटीय इलाकों में घुसपैठ की फिराक में रहती हैं. INS अग्रे उन्हीं के लिए काल है.
हथियार: इसमें पानी के नीचे सटीक मार करने वाले टॉरपीडो और भारत में ही बने एंटीसबमरीन रॉकेट लॉन्चर्स लगे हैं.
खोजने की क्षमता: इसमें बेहद आधुनिक सोनार सिस्टम लगा है. समंदर के नीचे पानी कितना भी धुंधला या उथलपुथल भरा हो, यह दुश्मन की पनडुब्बी की हल्की सी सरसराहट को भी पकड़ लेता है.
3. INS संशोधक — ‘समंदर की तीसरी आंख’
यह सीधे तौर पर मिसाइल दागने वाला जहाज नहीं है, बल्कि एक हाइड्रोग्राफिक सर्वे शिप है. लेकिन युद्ध के समय इसकी भूमिका सबसे घातक साबित होती है.
बेहद ज़रूरी हथियार: किसी भी युद्धपोत या पनडुब्बी को समंदर के अंदर तेजी से आगे बढ़ने के लिए वहां के रास्तों, पहाड़ों और पानी की गहराई का सटीक पता होना चाहिए. INS संशोधक यही काम करता है. यह समंदर के नीचे का पूरा ‘गूगल मैप’ तैयार करता है.
हाईटेक गैजेट्स: यह जहाज AUVs और ROVs से लैस है. ये पानी के नीचे बिना इंसानों के चलने वाले रोबोटिक ड्रोन हैं, जो समुद्र की तलहटी की हाईरिज़ॉल्यूशन मैपिंग करते हैं.
घातक रोल: इसके द्वारा तैयार किए गए सटीक चार्ट्स और मैप्स की मदद से ही भारतीय नौसेना के बाकी युद्धपोत और पनडुब्बियां दुश्मन के इलाके में बिना भटके और बिना अपनी लोकेशन लीक किए सटीक सर्जिकल स्ट्राइक कर सकते हैं.
भारत की बढ़ेगी धाक
एक लाइन में कहें तो INS दूनागिरी समंदर की सतह और आसमान पर राज करेगा, INS अग्रे पानी के नीचे छिपे दुश्मनों को खत्म करेगा, और INS संशोधक इन दोनों को आगे बढ़ने के लिए समंदर का सबसे सुरक्षित और सटीक रास्ता दिखाएगा.
इन तीनों युद्धपोतों के एक साथ आने से भारतीय नौसेना की सतह से होने वाली लड़ाई , पनडुब्बी विरोधी अभियानों और समुद्री सर्वेक्षण की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी. यह कदम हिंद महासागर और भारतीय समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा है.



