
शादी के मौके पर रिश्तेदारों और दोस्तों से मिलने वाले शगुन के लिफाफे हर परिवार के लिए खुशी का मौका होते हैं। लेकिन अगर इन्हीं लिफाफों में लाखों रुपये नकद निकल आएं तो खुशी के साथ चिंता भी बढ़ सकती है। ऐसा ही एक मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जहां एक सरकारी कर्मचारी की शादी में करीब 10 लाख रुपये नकद शगुन के तौर पर मिले।
मामला पूजा नाम के एक एक्स यूजर की पोस्ट से सामने आया। पोस्ट के मुताबिक, उनके भाई सरकारी नौकरी में हैं और हाल ही में उनकी शादी हुई थी। शादी में करीब 110 मेहमान शामिल हुए थे। किसी ने 500 रुपये तो किसी ने 2 हजार रुपये शगुन में दिए, जबकि कुछ करीबी रिश्तेदारों ने 25 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक के लिफाफे दिए।
लिफाफे खोले तो निकले 10 लाख रुपये
शादी की रस्में पूरी होने के बाद जब परिवार ने मेहमानों से मिले लिफाफे खोलकर रकम गिनी तो कुल नकदी करीब 10 लाख रुपये निकली। इतनी बड़ी रकम देखकर परिवार खुश तो हुआ, लेकिन सरकारी नौकरी करने वाले दूल्हे को एक दूसरी चिंता सताने लगी।
उसे डर था कि इतनी बड़ी नकद राशि को लेकर भविष्य में आयकर विभाग की ओर से कोई सवाल न खड़ा हो जाए। इसके बाद सोशल मीडिया पर भी यह सवाल चर्चा में आ गया कि आखिर शादी में मिले नकद उपहार पर टैक्स लगता है या नहीं।
क्या शादी में मिले गिफ्ट पर टैक्स लगता है?
आयकर नियमों के मुताबिक, शादी के अवसर पर किसी व्यक्ति को मिले उपहारों के लिए विशेष प्रावधान हैं। मूल खबर में विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि शादी के मौके पर दूल्हा-दुल्हन को मिलने वाले कुछ उपहार आयकर अधिनियम की धारा 56 के तहत कर योग्य आय से बाहर हो सकते हैं। इसमें नकद और अन्य उपहार भी शामिल हो सकते हैं।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शादी में मिली किसी भी रकम पर बिना किसी सवाल के कोई नियम लागू नहीं होगा। नकद लेनदेन से जुड़े अलग-अलग प्रावधानों का ध्यान रखना जरूरी है।
नकद लेनदेन को लेकर भी नियम
खबर में विशेषज्ञों के हवाले से धारा 269ST का उल्लेख किया गया है। इस प्रावधान के तहत एक व्यक्ति से निर्धारित सीमा से अधिक नकद राशि स्वीकार करने पर नियम लागू हो सकते हैं। इसलिए शादी में बड़ी रकम नकद मिलने की स्थिति में यह समझना जरूरी है कि रकम किस व्यक्ति से, किस परिस्थिति में और किस तरीके से प्राप्त हुई है।
यानी कुल 10 लाख रुपये मिलने की बात अपने आप में यह तय नहीं करती कि पूरी रकम पर टैक्स लगेगा या नहीं। रकम का स्रोत और प्रत्येक लेनदेन की परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
हर लिफाफे और देने वाले का रिकॉर्ड रखना फायदेमंद
ऐसी स्थिति में विशेषज्ञों की सलाह है कि शादी में मिले बड़े नकद उपहारों का रिकॉर्ड संभालकर रखा जाए। किस रिश्तेदार या परिचित ने कितनी राशि दी, इसकी सूची बनाकर रखना भविष्य में किसी सवाल की स्थिति में मददगार हो सकता है।
शादी के निमंत्रण, मेहमानों की सूची और बड़े उपहारों का विवरण भी सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि रकम शादी के अवसर पर मिले उपहार के रूप में प्राप्त हुई थी।
इसलिए शादी में 10 लाख रुपये का शगुन मिलना अपने आप में टैक्स चोरी या गैरकानूनी रकम होने का प्रमाण नहीं है। लेकिन बड़ी नकद राशि के मामले में आयकर और नकद लेनदेन से जुड़े नियमों को समझना और उचित रिकॉर्ड रखना जरूरी है।



