उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने हाल ही में मदरसों को लेकर बयान दिए थे. इन्होंने मदरसों को आतंकवाद का अड्डा बताया था, जिसको लेकर तमाम मुस्लिम संगठनों ने नाराजगी जाहिर की है. इस बीच ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी का बयान सामने आया है. उन्होंने इन बयानों की निंदा करते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई में मदरसों का अहम योगदान रहा है.

मौलानाशहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि मदरसों के इतिहास को जाने बिना इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है. उनका कहना है कि मदरसों ने देश की आजादी और समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, इसलिए उन पर इस तरह के आरोप लगाना पूरी तरह से गलत है.
‘इतिहास पढ़िए, तब मदरसों पर टिप्पणी कीजिए’
मौलाना ने नसीहत देते हुए कहा कि बयान देने वालों को पहले इतिहास पढ़ना चाहिए उसके बाद मदरसों पर टिप्पणी करना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत के मदरसों का इतिहास देशभक्ति और कुर्बानियों से भरा हुआ है. उनके मुताबिक, आजादी की लड़ाई के दौरान मदरसों से जुड़े उलेमा और छात्रों ने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया था. उन्होंने कहा कि रुहेलखंड के बरेली, रामपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, अमरोहा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और दिल्ली समेत कई क्षेत्रों में मदरसों से जुड़े लोगों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाई थी.
उन्होंने दावा किया कि आजादी की लड़ाई में बड़ी संख्या में उलेमा और छात्र शहीद हुए और उन्होंने देश के लिए अपनी जान तक कुर्बान कर दी. ऐसे इतिहास को नजरअंदाज कर मदरसों को आतंकवाद से जोड़ना उन लोगों का अपमान है जिन्होंने देश के लिए बलिदान दिया.
‘मदरसोंने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया’
मौलाना शाहबुद्दीन ने कहा कि उस दौर में मस्जिदों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को आजादी के लिए प्रेरित किया जाता था. दिल्ली की जामा मस्जिद सहित कई स्थानों पर उलेमा लोगों को अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट होने का संदेश दिया जाता था. उनके मुताबिक आजादी के आंदोलन के दौरान इंकलाब जिंदाबाद के साथसाथ वंदे मातरम् के नारे भी लगाए जाते थे और लोगों में देशभक्ति की भावना जगाई जाती थी.
‘ऐसे बयान समाज में गलत संदेश देते हैं’
उन्होंने कहा कि जिन मदरसों और उलेमा ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया, आज उन्हीं संस्थानों पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है और ऐसे बयान समाज में गलत संदेश देते हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था पर टिप्पणी करने से पहले उसके इतिहास और योगदान को समझना जरूरी है. उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक सोच से ऐसे बयान दिए जा रहे हैं.
‘तथ्यों के आधार पर ही बयान दें’
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवीने कहा कि इस तरह के बयान समाज में आपसी सौहार्द को प्रभावित कर सकते हैं. उन्होंने सभी जिम्मेदार लोगों से अपील की कि वो तथ्यों के आधार पर ही बयान दें और ऐसे शब्दों से बचें, जिनसे किसी समुदाय या शिक्षण संस्था की छवि पर बेवजह सवाल खड़े हों. उन्होंने कहा कि देश की एकता और भाईचारे को मजबूत रखना सभी की जिम्मेदारी है.



