
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में एक मॉल में महिला कर्मचारी को जबरन चूमने के मामले में डिंडोशी सेशंस कोर्ट ने 34 वर्षीय रितेश राजुभाई अरमुल्ला को दोषी ठहराते हुए एक साल की जेल की सजा सुनाई। अदालत ने पीड़िता की गवाही और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को अहम माना। कोर्ट के मुताबिक, उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित हुआ कि आरोपी ने महिला के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध हरकत की थी।
वॉशरूम का रास्ता पूछकर महिला के पास पहुंचा आरोपी
यह घटना मुंबई के बोरीवली पश्चिम स्थित शिमपोली इलाके के एक मॉल की बताई गई है। महिला वहां सेल्स कर्मचारी के रूप में काम करती थी। शिकायत के अनुसार, घटना वाले दिन शाम करीब छह बजे एक व्यक्ति उसके पास आया और वॉशरूम का रास्ता पूछा।
महिला ने उसे रास्ता बता दिया, लेकिन वह बार-बार उससे साथ चलकर वॉशरूम दिखाने के लिए कहने लगा। महिला ने उसे खुद रास्ता देखने को कहा। इसके बाद वह वहां से चला गया।
शिकायत के मुताबिक, कुछ समय बाद आरोपी दोबारा महिला के पास पहुंचा और उसे जबरन चूमने लगा। इस दौरान दोनों जमीन पर गिर गए, लेकिन आरोपी ने कथित तौर पर महिला को चूमना जारी रखा। महिला के विरोध करने और शोर मचाने पर आसपास मौजूद लोगों ने हस्तक्षेप किया और पुलिस को सूचना दी।
प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही भी बनी अहम आधार
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पीड़िता के बयान के साथ प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही पर भी विचार किया। गवाहों ने बताया कि आरोपी महिला के पीछे वॉशरूम की ओर गया था और बाद में उसके साथ जबरदस्ती की।
अदालत ने माना कि पीड़िता की गवाही पर संदेह करने का कोई ठोस आधार सामने नहीं आया। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि महिला घटना से पहले आरोपी को नहीं जानती थी और उसके खिलाफ झूठा आरोप लगाने की कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आई।
कोर्ट ने कहा—यह महज दुर्घटना नहीं थी
सुनवाई के दौरान अदालत ने घटना की परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति गलती से फिसलकर किसी दूसरे व्यक्ति पर गिर जाए, तो उसे चूमना स्वाभाविक प्रतिक्रिया नहीं मानी जा सकती।
अदालत के अनुसार, महिला को चूमने, उसके साथ जमीन पर गिरने और फिर भी ऐसी हरकत जारी रखने से यह संकेत मिलता है कि आरोपी का व्यवहार महज दुर्घटना का नतीजा नहीं था। गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।
महिला की गरिमा भंग करने के मामले में सुनाई सजा
डिंडोशी सेशंस कोर्ट ने रितेश राजुभाई अरमुल्ला को महिला की गरिमा भंग करने के मामले में दोषी करार देते हुए एक साल की जेल की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में पीड़िता के बयान और घटनास्थल पर मौजूद लोगों की गवाही को महत्वपूर्ण माना।
यह मामला सार्वजनिक स्थानों और कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा तथा उनकी सहमति के महत्व को रेखांकित करता है। किसी महिला की सहमति के बिना उसे छूना या चूमना स्वीकार्य व्यवहार नहीं है और ऐसे मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सत्या रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्ट में दी गई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। घटना से जुड़े तथ्यों और कानूनी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।



