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​​​​​मरीज को खून की जरूरत थी, लेकिन डोनर के नाम पर चल रहा था पैसों का खेल! SGPGI में ऐसे खुला पूरा मामला​​​​

​​​​​मरीज को खून की जरूरत थी, लेकिन डोनर के नाम पर चल रहा था पैसों का खेल! SGPGI में ऐसे खुला पूरा मामला​​​​

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) में रक्तदान के बदले पैसे लेने का कथित मामला सामने आया है। आरोप है कि जरूरतमंद मरीजों के परिजनों से रकम लेकर रक्तदाता उपलब्ध कराए जा रहे थे। मामले में पांच युवकों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया गया है। इनमें तीन इंजीनियरिंग के छात्र बताए जा रहे हैं। पुलिस और अस्पताल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहे हैं।

आठ हजार रुपये तक में डोनर उपलब्ध कराने का आरोप

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कथित तौर पर मरीजों के तीमारदारों से रक्तदाता उपलब्ध कराने के बदले आठ हजार रुपये तक मांगे जा रहे थे। पकड़े गए युवकों में अयोध्या के बीबी इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ने वाले पवन, अमन और भावेश के नाम सामने आए हैं। इनके अलावा प्रदीप और एक नौकरीपेशा युवक को भी पकड़े जाने की जानकारी है।

आरोप है कि ये युवक रक्त की जरूरत वाले मरीजों के परिजनों से संपर्क करते थे और पैसे लेकर रक्तदान करने के लिए तैयार व्यक्ति उपलब्ध कराते थे। हालांकि, इस गतिविधि में प्रत्येक युवक की भूमिका क्या थी, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

मेडिकल स्टोर के जरिए मरीजों तक पहुंचने का आरोप

इस मामले में SGPGI के गेट के पास आस्था मॉल स्थित एक मेडिकल स्टोर के संचालक की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, आरोप है कि मेडिकल स्टोर पर दवा लेने आने वाले मरीजों के परिजनों से रक्त की जरूरत के बारे में पूछा जाता था। इसके बाद उन्हें डोनर उपलब्ध कराने की पेशकश की जाती थी और जरूरत के मुताबिक युवकों को अस्पताल बुलाया जाता था।

फिलहाल मेडिकल स्टोर संचालक की कथित भूमिका और पूरे नेटवर्क से उसके संबंधों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

चार साल से गतिविधि चलने की भी चर्चा

मामले में रायबरेली के खीरी थाना क्षेत्र के निवासी हिमांशु सिंह का नाम भी सामने आया है। रिपोर्टों में आरोप लगाया गया है कि वह पिछले करीब चार वर्षों से इस गतिविधि में शामिल था और इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों से संपर्क कर उन्हें SGPGI बुलाता था।

उसके मोबाइल फोन से कई कॉलेजों के छात्रों की सूची मिलने की बात भी कही गई है। हालांकि, इस कथित नेटवर्क की अवधि और इसमें शामिल लोगों की संख्या को लेकर आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

एडवांस भुगतान को लेकर विवाद के बाद खुला मामला

बताया गया कि शाहबाज अली और यश कुमार से जुड़े मरीजों के लिए रक्तदाता उपलब्ध कराने को लेकर कथित सौदा तय हुआ था। डोनर अस्पताल पहुंच गए, लेकिन अग्रिम भुगतान को लेकर विवाद हो गया।

इसी दौरान अस्पताल के इमरजेंसी रेड जोन में तैनात सुरक्षा अधिकारी को संदेह हुआ। शिकायत के बाद पांच युवकों को पकड़कर पीजीआई थाने की पुलिस के हवाले कर दिया गया।

पुलिस और अस्पताल प्रशासन कर रहे जांच

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस उपायुक्त दक्षिणी मोहम्मद मुस्ताक ने बताया कि मामले में लिखित शिकायत का इंतजार किया जा रहा था और जांच शुरू कर दी गई है। SGPGI के सुरक्षा अधिकारी डीके पांडेय ने भी मामले की आंतरिक जांच कराने की बात कही।

अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि रक्त उपलब्ध कराने के नाम पर पैसे लेने की गतिविधि किस स्तर तक फैली थी और इसमें किन लोगों की भूमिका थी।

सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। मामले में लगाए गए आरोपों और संबंधित लोगों की भूमिका की अंतिम पुष्टि पुलिस एवं अस्पताल प्रशासन की जांच के बाद ही होगी।

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