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दूध के दाम में फिर बढ़ोतरी, जानें 2 सालों में कितना और कब-कब हुआ है इजाफा

त्योहारों का सीजन शुरू होने से ठीक पहले महाराष्ट्र में दूध पीना और महंगा होने जा रहा है. राज्य में 1 सितंबर से दूध के दाम में सीधे 9 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी का ऐलान हुआ है, जिसने आम आदमी के घरेलू बजट की चिंता एक बार फिर बढ़ा दी है. हालांकि, यह कोई अचानक आया झटका नहीं है, बल्कि इससे पहले भी 11 अगस्त 2026 से राज्य में दूध प्रोड्यूसर और प्रोसेसर्स की वेलफेयर एसोसिएशन गाय और भैंस, दोनों के दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ा चुकी थी. उस दौर में दही और पनीर जैसे रोजमर्रा के डेयरी प्रोडक्ट्स भी करीब 10 फीसदी तक महंगे हो गए थे. यानी करीब तीन हफ्तों के भीतर ही महाराष्ट्र के कंज्यूमर्स की जेब पर दूसरी बार बोझ पड़ने वाला है. लेकिन यह सिलसिला सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है. देश के अलगअलग हिस्सों में साल 2025 और 2026 के दौरान बड़े नेशनल ब्रांड्स से लेकर रीजनल कोऑपरेटिव डेयरियों तक ने बारबार दाम बढ़ाए हैं. आइए समझते हैं कि बीते दो साल में दूध कितना महंगा हुआ और आगे इसकी कीमत को लेकर क्या अनुमान हैं.

साल भर में कितनी बार बढ़े दाम

2026 के शुरुआती आठ महीनों पर ही नजर डालें तो दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला थमा ही नहीं. सबसे बड़ा और चर्चा में रहा फैसला 14 मई को हुआ, जब देश के दो बड़े ब्रांड अमूल और मदर डेयरी ने एक साथ दूध 2 रुपये प्रति लीटर महंगा कर दिया. समकालीन रिपोर्टों में भी इस बढ़ोतरी की पुष्टि हुई थी. इसके बाद यह असर रीजनल डेयरियों तक पहुंचा. राजस्थान की सरस, मध्य प्रदेश की सांची और महाराष्ट्र की गोकुल जैसी कई कोऑपरेटिव संस्थाओं ने भी मई महीने में ही अपने रेट बढ़ा दिए. जून की शुरुआत में केरल की मिल्मा ने भी दूध 4 रुपये प्रति लीटर तक महंगा कर दिया. अगस्त आतेआते महाराष्ट्र में यह चक्र दोहराया गया. पहले 2 रुपये की बढ़ोतरी हुई, और अब 1 सितंबर से 9 रुपये प्रति लीटर तक दाम और बढ़ने वाले हैं. कुल मिलाकर इस साल नेशनल ब्रांड्स से शुरू हुई महंगाई की यह लहर एक के बाद एक कई राज्यों की डेयरियों तक फैल गई.

2025 में कितना बढ़ा था भाव?

पिछले साल यानी 2025 में अप्रैलमई का महीना दूध की कीमतों के लिहाज से सबसे ज्यादा हलचल वाला रहा. इसकी शुरुआत 1 अप्रैल को हुई, जब कर्नाटक मिल्क फेडरेशन ने अपने पॉपुलर नंदिनी ब्रांड के दूध के दाम 4 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए. महीने के आखिर में यानी 30 अप्रैल को मदर डेयरी ने भी कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर तक इजाफा किया, और ठीक अगले दिन 1 मई को अमूल और पैराग मिल्क फूड्स ने भी इतनी ही यानी 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी. इसके तीन हफ्ते बाद 22 मई को बिहारझारखंड में सुधा डेयरी ने अलगअलग वैरिएंट के दूध के दाम 2 से 3 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाए. इसी दौरान हेरिटेज फूड्स ने भी संकेत दिए थे कि वित्त वर्ष 202526 में वह अपने डेयरी प्रोडक्ट्स के दाम 1 से 2 रुपये तक बढ़ा सकती है. यानी 2025 का अप्रैलमई सीजन दूध की महंगाई का ऐसा दौर साबित हुआ.

दिल्ली में 24% हुई है बढ़ोतरी

दिल्लीNCR में दूध की कीमतों में पिछले कुछ सालों में लगातार बढ़ोतरी हुई है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2022 में यहां फुल क्रीम दूध करीब 58 रुपये प्रति लीटर और टोंड दूध 48 रुपये प्रति लीटर में मिलता था. फरवरी 2023 तक फुल क्रीम दूध की कीमत बढ़कर 66 रुपये और टोंड दूध की कीमत 54 रुपये प्रति लीटर हो गई. इसके बाद भी कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही. मई 2026 की हालिया बढ़ोतरी के बाद मदर डेयरी का फुल क्रीम दूध दिल्लीNCR में 72 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया. यानी फरवरी 2022 के मुकाबले अब एक लीटर फुल क्रीम दूध 14 रुपये महंगा, यानी करीब 24% की बढ़ोतरी के साथ बिक रहा है. यह तुलना भी महाराष्ट्र में घोषित ताजा 9 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी को शामिल किए बिना है.

अभी आगे और होगी बढ़ोतरी?

दूध की कीमतों में फिलहाल राहत के संकेत कम हैं. रेटिंग एजेंसी CRISIL ने 37 बड़ी डेयरी कंपनियों के एनालिसिस के आधार पर अनुमान लगाया है कि चालू वित्त वर्ष में दूध के दाम 45% तक और बढ़ सकते हैं. हालांकि कंपनियां यह बढ़ोतरी एक साथ करने के बजाय स्टेप वाइज कर सकती हैं, ताकि ग्राहकों पर अचानक ज्यादा बोझ न पड़े. दूध के अलावा पनीर, घी, मक्खन और फ्लेवर्ड मिल्क जैसे वैल्यूएडेड प्रोडक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी इससे भी ज्यादा रहने की संभावना है. CRISIL के मुताबिक पूरे डेयरी सेगमेंट में औसत रिटेल कीमतें 56% तक बढ़ सकती हैं. यानी आने वाले महीनों में दूध और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स का खर्च घरेलू बजट पर और दबाव डाल सकता है.

क्यों बढ़ रहे हैं दूध के दाम?

दूध की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ी वजह कच्चे दूध की खरीद लागत और प्रोडक्शन खर्च में इजाफा है. CRISIL के मुताबिक तेज गर्मी और कमजोर मानसून जैसी मौसमी स्थितियां पशुओं की दूध देने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं. साथ ही पशु चारे की कीमतें बढ़ने से किसानों की प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ती है, जिसका सीधा असर डेयरियों की खरीद लागत यानी प्रोक्योरमेंट कॉस्ट पर पड़ता है. दूसरी तरफ दूध की डिमांड लगातार मजबूत बनी हुई है. CRISIL का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में कच्चे दूध के प्रोडक्शन की ग्रोथ करीब 4 फीसदी रह सकती है, जो वित्त वर्ष 2020 से 2025 के बीच रहे करीब 5 फीसदी के औसत से कम है. यानी सप्लाई की धीमी रफ्तार और बढ़ती लागत का बोझ कंपनियां धीरेधीरे कंज्यूमर्स तक पहुंचाती रहेंगी.

पिछले दो सालों के आंकड़े साफ बताते हैं कि दूध अब वह चीज नहीं रही, जिसकी कीमत सालोंसाल स्थिर बनी रहे. 2022 से 2026 के बीच दिल्लीNCR में फुल क्रीम दूध में करीब 24 फीसदी का उछाल आ चुका है, और यह हिसाब भी महाराष्ट्र की ताजा 9 रुपये प्रति लीटर वाली बढ़ोतरी से पहले का है. अमूल, मदर डेयरी जैसे नेशनल ब्रांड्स से शुरू हुआ यह सिलसिला अब नंदिनी, सुधा, मिल्मा, सरस, सांची और गोकुल जैसी लगभग हर बड़ी रीजनल डेयरी तक पहुंच चुका है. बढ़ती चारे की लागत, कमजोर मानसून और डिमांडसप्लाई के असंतुलन जैसे कारणों को देखते हुए यह साफ है कि आने वाले महीनों में भी दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स की कीमतों पर दबाव बना रहेगा.

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