
लाजवर्त यानी लैपिस लैजुली (Lapis Lazuli) गहरे नीले रंग का एक प्रसिद्ध सजावटी पत्थर है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इसका संबंध शनि देव से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इसे पहनने से मानसिक शांति, आत्मविश्वास और एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
राजा बलि के केशों से जुड़ी है पौराणिक मान्यता
प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों में लाजवर्त की उत्पत्ति को लेकर पौराणिक प्रसंग मिलता है। मान्यता के अनुसार, इस रत्न की उत्पत्ति राजा बलि के केशों से हुई थी। वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक मिश्रित खनिज पत्थर है, जिसका गहरा नीला रंग मुख्य रूप से लाजुराइट खनिज के कारण होता है।
लाजवर्त ब्रेसलेट पहनने के बताए जाते हैं ये फायदे
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, लाजवर्त ब्रेसलेट को मानसिक स्पष्टता, बेहतर संवाद क्षमता, आत्मविश्वास और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के लिए पहना जाता है। इसे पढ़ाई, लेखन और रचनात्मक कार्यों से जुड़े लोगों के लिए भी उपयोगी माना जाता है।
किस दिन और किस हाथ में पहनें?
मान्यता के अनुसार, लाजवर्त ब्रेसलेट बुधवार, शनिवार या षष्ठी तिथि को सुबह धारण किया जा सकता है। इसे बाएं हाथ में पहनने की सलाह भी दी जाती है। हालांकि, ये पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताएं हैं।
जरूरी बात: लाजवर्त ब्रेसलेट से त्वचा की एलर्जी, थायरॉइड या अन्य बीमारियां ठीक होने का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ऐसी समस्याओं में उचित चिकित्सकीय सलाह और उपचार लेना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए इसे चिकित्सा का विकल्प न मानें।



