
लखनऊ, उत्तर प्रदेश: शहरों में बढ़ती ई-रिक्शा की संख्या और उससे बिगड़ती यातायात व्यवस्था को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को चार सप्ताह के भीतर यह फैसला लेने का निर्देश दिया है कि लखनऊ समेत उन शहरों में ई-रिक्शा के नए रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाई जाए या नहीं, जहां इनकी संख्या जरूरत से अधिक हो गई है।
सोमवार को जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस ए.के. चौधरी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि लखनऊ में करीब 1.33 लाख ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं। इनकी लगातार बढ़ती संख्या के कारण कई इलाकों में जाम की समस्या गंभीर हो रही है और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
चार सप्ताह में फैसला लेगी सरकार
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि वह लखनऊ के साथ-साथ दूसरे ऐसे शहरों की स्थिति का भी आकलन करे, जहां ई-रिक्शा की संख्या जरूरत से ज्यादा हो चुकी है। इसके बाद नए रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने के संबंध में चार सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए।
हालांकि, अदालत ने फिलहाल नए रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने का अंतिम आदेश नहीं दिया है। सरकार को इस बारे में फैसला लेने का निर्देश दिया गया है।
पुराने प्रतिबंधों का पालन नहीं होने पर नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह बात भी रखी गई कि 12 मई 2022 के आदेश के तहत लखनऊ की कई सड़कों पर ई-रिक्शा चलाने पर प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन जमीन पर इसका प्रभावी तरीके से पालन नहीं हो रहा है।
इस पर हाईकोर्ट ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को मौजूदा प्रतिबंधों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया। साथ ही यह भी जांचने को कहा कि क्या शहर के दूसरे उपयुक्त इलाकों में भी ई-रिक्शा की आवाजाही सीमित की जा सकती है।
प्रतिबंधित रास्तों पर यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी
अदालत ने साफ किया कि जिन मार्गों पर ई-रिक्शा के संचालन पर रोक लगाई जाती है, वहां यात्रियों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके लिए वैकल्पिक रास्तों और यातायात व्यवस्था की योजना बनाने को कहा गया है।
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को प्रतिबंधों के पालन और उठाए गए कदमों की रिपोर्ट भी सौंपने का निर्देश दिया है।
नगर निगम और संबंधित विभागों को भी निर्देश
अदालत ने ई-रिक्शा से जुड़ी समस्या के समाधान के लिए गठित कमेटी के सुझावों और लखनऊ नगर निगम की ओर से उठाए गए कदमों की समीक्षा जारी रखी। संबंधित विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम कर शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।
इस मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी। अब सरकार के फैसले पर नजर रहेगी कि लखनऊ समेत अन्य शहरों में नए ई-रिक्शा रजिस्ट्रेशन को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।
Satya Report Disclaimer: यह रिपोर्ट उपलब्ध अदालती आदेश और मामले से जुड़ी जानकारी पर आधारित है। नए रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने का अंतिम फैसला अभी राज्य सरकार को लेना है।



