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अस्पताल पहुंचने की थी जल्दी, लेकिन रास्ते में ही हुआ कुछ ऐसा कि बस में मच गई हलचल

अस्पताल पहुंचने की थी जल्दी, लेकिन रास्ते में ही हुआ कुछ ऐसा कि बस में मच गई हलचल

नूंह, हरियाणा: अलवर से घर लौट रही एक गर्भवती महिला के लिए शुक्रवार की शाम अचानक बेहद खास और चुनौतीपूर्ण बन गई। रास्ते में प्रसव पीड़ा तेज होने पर बस में मौजूद यात्रियों के बीच हलचल मच गई। ऐसे समय में हरियाणा रोडवेज के चालक और परिचालक ने तत्परता दिखाई, वहीं बस में सवार महिलाओं ने भी महिला की मदद की। अस्पताल पहुंचने से पहले ही महिला ने एक बेटे को जन्म दे दिया।

जांच के बाद घर लौट रहा था दंपती

जानकारी के अनुसार, फिरोजपुर झिरका के वार्ड नंबर-7 निवासी शोयब खान अपनी गर्भवती पत्नी सुमैय्या को शुक्रवार सुबह प्रसव संबंधी जांच के लिए अलवर के एक अस्पताल लेकर गए थे। जांच और अल्ट्रासाउंड के बाद डॉक्टरों ने प्रसव में लगभग 15 दिन का समय शेष बताया था। इसके बाद दंपती दवाइयां लेकर घर लौटने लगा।

रामगढ़ के बाद अचानक बढ़ गई प्रसव पीड़ा

अलवर से लौटते समय रामगढ़ पार करने के बाद सुमैय्या को अचानक तेज प्रसव पीड़ा होने लगी। नौगांवा के पास उनकी परेशानी बढ़ गई, जिसके बाद उनके पति ने बस परिचालक को स्थिति की जानकारी दी।

हालात की गंभीरता समझते हुए चालक कासम ने बस को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), फिरोजपुर झिरका की ओर मोड़ दिया। इस दौरान बस में मौजूद महिलाओं ने गर्भवती महिला को संभालने और प्रसव के समय मदद करने में सहयोग किया।

अस्पताल पहुंचने से पहले बस में गूंजी किलकारी

स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने से पहले ही सुमैय्या ने बस में बेटे को जन्म दे दिया। इसके बाद चालक बस को जल्द से जल्द सीएचसी लेकर पहुंचा। वहां डॉक्टरों ने मां और नवजात को भर्ती कर प्राथमिक उपचार दिया।

सीएचसी फिरोजपुर झिरका के एडिशनल एसएमओ डॉ. आदित्य यादव के अनुसार, मां और नवजात को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए रात करीब एक बजे अल आफिया अस्पताल, मांडीखेड़ा रेफर किया गया।

चालक और परिचालक को सम्मानित करने की मांग

इस घटना के बाद बस चालक कासम और परिचालक की तत्परता की सराहना की जा रही है। गांव माहोली के पूर्व सरपंच प्रत्याशी अरशद एडवोकेट ने रोडवेज विभाग से दोनों कर्मचारियों को सम्मानित करने की मांग की। उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि विभाग नवजात की पढ़ाई का खर्च उठाने पर विचार करे।

मुश्किल घड़ी में चालक की सूझबूझ, परिचालक के सहयोग और बस में मौजूद महिलाओं की मदद से मां और नवजात को समय पर चिकित्सा सहायता मिल सकी। यह घटना आपात स्थिति में जिम्मेदारी और मानवीय सहयोग की अहमियत को सामने लाती है।

सत्य रिपोर्ट नोट: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।

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