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भारतीयों में मच गई गोल्ड बेचने की होड़! 3 महीने में बेच डाला 50000 किलो पुराना सोना

नई दिल्ली: भारत में सोने को पारंपरिक तौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है, लेकिन इस समय बाजार का मूड पूरी तरह बदलता दिख रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग नया सोना खरीदने के बजाय अपने घरों में रखा पुराना सोना बेचकर नकद जुटाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है कीमतों में संभावित गिरावट का डर, जिसने निवेशकों के भरोसे को हिला दिया है।

भारतीयों में मच गई गोल्ड बेचने की होड़! 3 महीने में बेच डाला 50000 किलो पुराना सोना

क्या कहता है ट्रेंड?
ताजा ट्रेंड बताता है कि अप्रैल से जून 2026 के बीच बड़ी मात्रा में घरों से पुराना सोना बाजार में आया है। अनुमान है कि इस अवधि में करीब 50 टन सोने बेचा गया, जो पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि एक बड़ा संकेत है कि लोग अब “होल्ड” करने के बजाय “कैश आउट” करने की रणनीति अपना रहे हैं।

क्यों बदल रहे हैं हालात?
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण सोने की कीमतों में हालिया उतारचढ़ाव है। कुछ समय पहले तक सोना रिकॉर्ड उंचाई पर था, लेकिन अब इसमें गिरावट देखी जा रही है। जून महीने में ही कीमतों में करीब ₹15,000 प्रति 10 ग्राम तक की कमी दर्ज की गई। ऐसे में निवेशकों के मन में यह डर बैठ गया है कि अगर अभी नहीं बेचा, तो आगे और नुकसान हो सकता है। इसी मनोविज्ञान के चलते लोग तेजी से मुनाफा बुक कर रहे हैं।

क्यों बढ़ी सोना बेचने की होड़?
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के महीनों में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद अब दबाव में हैं। ऐसे में लोगों को डर है कि आज महंगा है, कल सस्ता हो सकता है… इसी डर के चलते लोग मुनाफा बुक कर रहे हैं। कुछ अनुमानों और रिपोर्ट का कहना है कि कीमतें करीब ₹1.4 लाख से घटकर ₹1.2 लाख प्रति 10 ग्राम तक आ सकती हैं, जिससे निवेशक पहले ही निकलना चाहते हैं।

ज्वेलरी मार्केट पर असर

इस ट्रेंड का असर ज्वेलरी बाजार में भी साफ दिखाई दे रहा है। जहां पहले ग्राहक नए गहने खरीदने के लिए ज्वेलर्स के पास पहुंचते थे, वहीं अब वे पुराने गहनों को बेचने या एक्सचेंज करने के लिए ज्यादा आ रहे हैं। ज्वेलर्स के मुताबिक, पुराने साने के लेनदेन में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है और कई जगह यह 5060% तक बढ़ चुका है। इसका मतलब है कि ग्राहक अब कैश खर्च करने से बच रहे हैं और अपने पुराने एसेट को ही इस्तेमाल कर रहे हैं।

इकोनॉमी के लिए क्या मायने?
यह बदलाव सिर्फ कंज्यूमेर बिहेवियर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। जब घरों में रखा पुराना सोना बाजार में लौटता है, तो इससे गोल्ड इंपोर्ट की जरूरत कम हो सकती है और रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलता है। यानी जो सोना अब तक “डेड एसेट” था, वह अब आर्थिक गतिविधियों का हिस्सा बन रहा है।

क्या सच में होगा गोल्ड क्रैश?
हालांकि, यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या वाकई सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आने वाली है या यह सिर्फ एक अस्थायी उतारचढ़ाव है। एक्सपर्ट्स इस पर बंटे हुए हैं। कुछ इसे सामान्य प्रॉफिट बुकिंग मान रहे हैं, तो कुछ को आगे और गिरावट की आशंका है।

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