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बिस्तर पर ज्यादा देर तक टिकने में मदद कर सकती हैं ये 4 योग ब्रीदिंग तकनीक, जानें कैसे करें अभ्यास.

बिस्तर पर ज्यादा देर तक टिकने में मदद कर सकती हैं ये 4 योग ब्रीदिंग तकनीक, जानें कैसे करें अभ्यास.

तनाव, चिंता और रोजमर्रा की भागदौड़ का असर व्यक्ति की निजी जिंदगी पर भी पड़ सकता है। कई लोगों को अंतरंग संबंधों के दौरान जल्दी उत्तेजना, घबराहट या अपनी परफॉर्मेंस को लेकर चिंता रहती है। ऐसे में सांसों को नियंत्रित करने वाली कुछ योग तकनीकें मन को शांत करने और शरीर पर बेहतर नियंत्रण महसूस करने में मदद कर सकती हैं।

हालांकि, प्राणायाम किसी यौन समस्या का निश्चित इलाज नहीं है। अगर जल्दी स्खलन या परफॉर्मेंस से जुड़ी परेशानी लगातार बनी हुई है, तो डॉक्टर या योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

क्या सांसों की एक्सरसाइज से स्टैमिना बेहतर हो सकता है?

जब व्यक्ति तनाव या अत्यधिक उत्तेजना में होता है, तो सांसें तेज और उथली हो सकती हैं। नियंत्रित और धीमी सांस लेने से शरीर को रिलैक्स करने, तनाव कम करने और वर्तमान पल पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिल सकती है।

यही वजह है कि कुछ लोगों के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज अंतरंग पलों के दौरान बेहतर नियंत्रण और आत्मविश्वास बनाए रखने में सहायक हो सकती हैं।

1. उज्जायी प्राणायाम

उज्जायी प्राणायाम में सांस लेते और छोड़ते समय गले को हल्का संकुचित किया जाता है, जिससे समुद्र की लहरों जैसी धीमी आवाज सुनाई देती है।

कैसे करें:

  • आराम से बैठ जाएं या लेट जाएं।
  • नाक से धीरे-धीरे गहरी सांस लें।
  • गले को हल्का संकुचित करते हुए सांस छोड़ें।
  • सांस की आवाज और उसकी गति पर ध्यान दें।
  • शुरुआत में 5 मिनट तक अभ्यास कर सकते हैं।

फायदा: यह तकनीक रिलैक्सेशन और सांसों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकती है।

2. नाड़ी शोधन प्राणायाम

इसे अल्टरनेट नॉस्ट्रिल ब्रीदिंग भी कहा जाता है। इसमें बारी-बारी से दोनों नासिकाओं से सांस ली और छोड़ी जाती है।

कैसे करें:

  • रीढ़ सीधी रखते हुए आराम से बैठें।
  • दाएं अंगूठे से दाईं नासिका बंद करें और बाईं नासिका से सांस लें।
  • अब बाईं नासिका बंद करके दाईं नासिका से सांस छोड़ें।
  • दाईं ओर से सांस लें और फिर बाईं ओर से छोड़ें।
  • इसी क्रम को कुछ मिनट दोहराएं।

फायदा: नियमित अभ्यास मन को शांत करने और तनाव कम करने में मदद कर सकता है।

3. कपालभाति

कपालभाति में सांस को तेजी से बाहर छोड़ा जाता है, जबकि सांस अंदर जाने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत सहज रहती है।

कैसे करें:

  • आराम से बैठकर रीढ़ सीधी रखें।
  • सामान्य रूप से सांस लें।
  • पेट की मांसपेशियों को हल्का संकुचित करते हुए नाक से सांस बाहर छोड़ें।
  • शुरुआत कम संख्या से करें और धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं।

ध्यान रखें: कपालभाति हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होती। हाई ब्लड प्रेशर, हृदय संबंधी समस्या, गर्भावस्था या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में इसे शुरू करने से पहले डॉक्टर या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

4. डायाफ्रामैटिक ब्रीदिंग

इसे बेली ब्रीदिंग भी कहा जाता है। इसमें सांस लेते समय पेट ऊपर की ओर उठता है और सांस छोड़ते समय नीचे आता है।

कैसे करें:

  • पीठ के बल लेटें या आराम से बैठें।
  • एक हाथ छाती और दूसरा पेट पर रखें।
  • नाक से धीरे-धीरे सांस लें और महसूस करें कि पेट ऊपर उठ रहा है।
  • फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ें।
  • 5 से 10 मिनट तक अभ्यास किया जा सकता है।

फायदा: यह शरीर को रिलैक्स करने और तनाव कम करने में मदद कर सकती है।

ज्यादा देर तक टिकने के लिए इन बातों का भी रखें ध्यान

सिर्फ ब्रीदिंग एक्सरसाइज पर निर्भर रहने के बजाय कुछ दूसरी आदतें भी मददगार हो सकती हैं।

माइंडफुलनेस: अंतरंग पलों में अपनी सांस और वर्तमान अनुभव पर ध्यान दें। इससे अनावश्यक चिंता कम करने में मदद मिल सकती है।

पार्टनर से बातचीत: अपनी पसंद, असहजता और जरूरतों के बारे में खुलकर बात करना रिश्ते में सहजता बढ़ा सकता है।

नियमित एक्सरसाइज: योग, वॉकिंग और दूसरी शारीरिक गतिविधियां सामान्य फिटनेस और तनाव प्रबंधन के लिए फायदेमंद हैं।

पर्याप्त नींद: लगातार नींद की कमी और तनाव ऊर्जा तथा मूड पर असर डाल सकते हैं।

अंतरंग पलों में ब्रीदिंग एक्सरसाइज कैसे करें?

अंतरंगता से पहले कुछ मिनट धीमी और गहरी सांस लेने का अभ्यास किया जा सकता है। अगर उस दौरान घबराहट या अत्यधिक उत्तेजना महसूस हो, तो थोड़ी देर रुककर सांसों को सामान्य करने और शरीर को रिलैक्स करने पर ध्यान दिया जा सकता है।

इसका उद्देश्य किसी तय समय तक संबंध बनाए रखना नहीं, बल्कि तनाव कम करना और अपने शरीर की प्रतिक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझना होना चाहिए।

कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

अगर जल्दी स्खलन, इरेक्शन से जुड़ी समस्या, अत्यधिक चिंता या अंतरंग संबंधों से जुड़ी परेशानी लगातार बनी हुई है और रिश्ते या आत्मविश्वास पर असर डाल रही है, तो यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट या योग्य सेक्सुअल हेल्थ विशेषज्ञ से सलाह लें।

निष्कर्ष

उज्जायी, नाड़ी शोधन और डायाफ्रामैटिक ब्रीदिंग जैसी तकनीकें तनाव कम करने और शरीर पर ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकती हैं। इन्हें नियमित योग, अच्छी नींद, व्यायाम और पार्टनर के साथ बेहतर संवाद के साथ अपनाया जा सकता है। लेकिन लगातार बनी यौन समस्या के लिए केवल प्राणायाम पर निर्भर रहने के बजाय सही चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी भी लगातार या परेशान करने वाली यौन समस्या के लिए योग्य डॉक्टर या विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह लें। प्राणायाम करते समय असहजता, चक्कर या सांस लेने में परेशानी महसूस हो तो अभ्यास रोक दें।

contact.satyareport@gmail.com

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