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यूपी, बिहार और झारखंड के लोगों को बैंक लोन देने से कतराते क्यों हैं? इन आंकड़ों से हुआ खुलासा

बैंकिंग में एक टर्म है CD Ratio यानी क्रेडिट डिपॉजिट रेशियो. यह एक ऐसा पैमाना है, जिससे पता चलता है किसी बैंक या फिर किसी राज्य में बैंके ने जमा किए कुल कितने हिस्सा वहां के लोगों को लोन के तौर पर दिया है. इसी सीडी रेशियो को बिहार के बैंकों ने 23 जून को जारी दिया है. अब बिहार का सीडी रेशियो 60.21 प्रतिशत हो गया है.

यूपी, बिहार और झारखंड के लोगों को बैंक लोन देने से कतराते क्यों हैं? इन आंकड़ों से हुआ खुलासा

आसान भाषा में समझे तो बिहार के अंदर बैंकों में जमा कुल राशि का 60 प्रतिशत ही बिहार के लोगों को लोन के तौर पर दिया जा रहा है. ऐसे सवाल यह उठता है कि बाकी की बची हुई 40 प्रतिशत राशि का क्या किया जाता है. दरअसल, इसे उन राज्यों में लोन के तौर पर दिया जाता है, जिन राज्यों का क्रेडिट रेशियो काफी बेहतर होता है. खासकर दक्षिण भारत के राज्यों को.

वर्तमान में राष्ट्रीय औसत सीडी रेशियो रेश्यो लगभग 82 प्रतिशत. महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह 100 प्रतिशत से भी ज्यादा है. राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों के मुताबिक आंध्र प्रदेश में 155 प्रतिशत, तेलंगाना में 130 प्रतिशत, तमिलनाडु में 126 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 98 प्रतिशत, राजस्थान में 99 प्रतिशत, गुजरात में 87 प्रतिशत और कर्नाटक में 77 प्रतिशत सीडी रेशियो है.

मुख्य बातें

  1. यूपीबिहार का सीडी रेशियो पिछले कुछ सालों में आकर सुधरा है.
  2. 7 से 8 साल पहले 50 प्रतिशत से भी कम था सीडी रेशियो.
  3. 100 प्रतिशत सीडी रेशियो होने पर यूपीबिहार के विकास में मिल सकती है मदद.

यूपी का 60 तो झारखंड का सीडी रेशियो 52 प्रतिशत

उत्तर प्रदेश का सीडी रेशियो भी बहुत ज्यादा नहीं है. 7 फरवरी को मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा किए गए एक पोस्ट के मुताबिक प्रदेश के बैंकों का सीडी रेशियो 60.39 प्रतिशत था. यानि की प्रदेश के बैंकों में जमा 61 प्रतिशत धनराशि ही सिर्फ यहां के नागरिकों को दी गई. बाकी 39 प्रतिशत धनराशि अच्छे सीडी रेशियो वाले राज्यों को ट्रांसफर कर दी गई. वहीं, झारंखड का सीडी रेशियो सिर्फ 52.19 प्रतिशत है. यानी यहां के बैंको में जमा 52 प्रतिशत राशि ही लोगों को लोन के तौर पर दी जाती है.

राज्य बैंकर्स समिति के मुताबिक 31 मार्च 2026 के अंत तक बिहार की बैंक शाखाओं में 6 लाख 15 हजार 428 करोड़ रुपये जमा थे. इसमें से लोन के तौर पर 3 लाख 70 हजार 563 करोड़ रुपए दिए गए. इसका साफ 2 लाख 44 हजार 865 करोड़ रुपए दूसरे राज्यों के बैंकों को लोन देने के लिए भेज दिए गए.

ऐसे बैंक ज्यादा सीडी रेशियो वाले राज्य को पैसे करता है ट्रांसफर

एक सवाल यह कि जब पैसे बिहार या उत्तर प्रदेश के बैंक में जमा होते हैं, तो वह अन्य राज्यों को कैसे लोन देने के लिए ट्रांसफर हो जाता है. दअरसल, बैंकों के पास जो पैसे जमा होते हैं, वह एक केंद्रीय पूल में जाते हैं. फिर जिन राज्यों का सीडी रेशियो ज्यादा होता है. अब इन राज्यों में बैंकों ने वहां की जमा राशि से भी ज्यादा का लोन बांट दिया है. स्वभाविक बात है कि ऐसे में लोन के अतिरिक्त राशि कम सीडी रेशिय वाले राज्यों से ट्रांसफर किया जाएगा.

यूपीबिहार के लोगों को लोन देने से क्यों कतराते हैं बैंक?

यूपीबिहार का सीडी रेशियो पिछले कुछ सालों में आकर सुधरा है. कुछ सालों पहले तो यह 40 से 50 प्रतिशत के बीच अटका हुआ था. दरअसल, इन राज्यों में बैक लोन देने में आनाकानी करते हैं. उनका मानना है कि अच्छे सीडी रेशियो वाले राज्यों के मुकाबले यहां लोन की रिकवरी दर बेहद खराब है.

बिहार जैसे राज्यों में उद्योगों की कमी है. वहीं, उत्तर प्रदेश में 2017 के बाद बड़े स्तर पर इंडस्ट्री आनी शुरु हुई है. लोन की सबसे ज्यादा मांग बड़े उद्योगों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से आती है. वहीं, दक्षिण के राज्यों में ऐसा नहीं है. वहां बड़ेबड़े उद्योग हैं. ऐसी स्थिति में बिहार, यूपी जैसे राज्यों में उद्योगों की कमी के चलते लोन अवशोषण की क्षमता कम है.

बिहार, झारखंड, और यूपी में में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली आबादी की संख्या अच्छीखासी है. साथ ही यहां के कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसी आपदा आतीरहती है. ऐसे में कई लोगों के दस्तावेज गायब हो जाते हैं, जिससे उनका लोन रिजेक्ट हो जाता है.ईयो के पास लोन लेने के लिए सिक्योरिटी के तौर पर न जमीन है न बिजनेस. अगर जमीन है तो वह भी विवादों में फंसा हुआ है.इसके अलावा लोन प्रक्रियाओं और सरकारी योजनाओं जानकारी नहीं होने के चलते भी अधिकांश लोग इससे वंचित रह जाते हैं.

अगर बिहारयूपी का सीडी रेशियो 100% हो जाए तो क्या होगा फायदा?

अगर किसी राज्य का सीडी रेशियो 100 प्रतिशत हो जाएगा तो वहां के बैंकों में मौजूद सारी राशि, राज्य के नागरिकों पर ही लोन के तौर पर खर्च की जाएगी. इसका साफ अर्थ यह हुआ कि पूंजी का पलायन अन्य राज्यों में होना रुक जाएगा. जिस राज्य की जनता की गाढ़ी कमाई बैंकों में होगी, उसी का विकास होगा.कृषि, MSME और स्टार्टअप्स को पर्याप्त मात्रा में लोन मिलेंगे. इससे उस राज्य में नएनए उद्योग लगेंगे. रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. आर्थिक असमानता दूर होगी.

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