
नई दिल्ली: दक्षिण भारत के लोगों को फर्जी लोन और स्कॉलरशिप दिलाने का लालच देकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का दिल्ली पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पश्चिमी जिला साइबर थाना पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि गिरोह ने ठगी के लिए अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंप रखी थीं। कोई बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराता था तो कोई कॉलिंग सेंटर के जरिए लोगों को फोन करके झांसे में लेता था। पुलिस ने विकासपुरी के बुढ़ेला इलाके में चल रहे संदिग्ध कॉलिंग सेंटर पर छापा मारकर कई मोबाइल फोन, रजिस्टर और नकदी बरामद की है।
पुलिस ने मौके से पांच महिला टेलीकॉलर को भी हिरासत में लिया है। ये महिलाएं कॉल सेंटर में काम करती थीं। पुलिस अब इनके साथ-साथ बरामद दस्तावेजों और मोबाइल फोन की जांच कर रही है, ताकि ठगी के पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों का पता लगाया जा सके।
बैंक खातों की जांच से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
पुलिस उपायुक्त हरेश्वर वी. स्वामी के मुताबिक, साइबर थाना पुलिस राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और समन्वय पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के आधार पर संदिग्ध बैंक खातों और उनमें हुए लेनदेन की पड़ताल कर रही थी।
इसी जांच के दौरान कुछ बैंक खातों का संबंध दक्षिण भारत में हुई साइबर ठगी की शिकायतों से सामने आया। विकासपुरी स्थित कर्नाटक बैंक का एक खाता तीन अलग-अलग साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़ा मिला। पुलिस ने खाते के लेनदेन और उससे संबंधित सिम कार्ड की जानकारी जुटाई तो जांच अमित कपूर तक पहुंच गई।
आरोप है कि अमित कपूर ठगी की रकम अपने नेटवर्क से जुड़े खातों में मंगवाने और उसे एटीएम के जरिए निकलवाने का काम करता था। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर अमित कपूर, शिवा सिंह चौधरी और एस. गौरव उर्फ अप्पू को गिरफ्तार कर लिया।
बुढ़ेला के कॉलिंग सेंटर पर छापेमारी
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और वित्तीय लेनदेन की जांच के दौरान पुलिस को विकासपुरी के बुढ़ेला इलाके में स्थित एक परिसर के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने वहां छापा मारा।
परिसर में पांच महिला टेलीकॉलर समेत छह लोग मिले। पुलिस के अनुसार, इस कॉलिंग सेंटर का संचालन सेराज अंसारी उर्फ दाऊद कर रहा था। जांच आगे बढ़ने पर उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया। इस तरह मामले में कुल चार आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 12 स्मार्टफोन, नौ कीपैड मोबाइल, 10 नोटपैड, पांच रजिस्टर और 45,170 रुपये नकद बरामद किए। पुलिस को आशंका है कि इन उपकरणों और दस्तावेजों में ठगी से जुड़े अहम सुराग मिल सकते हैं।
अलग-अलग जिम्मेदारियों के साथ चल रहा था ठगी का खेल
जांच में पता चला कि गिरोह के सदस्य एक तय तरीके से काम करते थे। कुछ लोग ठगी के लिए बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराते थे, जबकि कॉलिंग सेंटर से जुड़े लोग खुद को वित्तीय योजनाओं से संबंधित बताकर लोगों से संपर्क करते थे।
फोन पर लोगों को आसान लोन, स्कॉलरशिप और दूसरी वित्तीय सुविधाएं दिलाने का लालच दिया जाता था। भरोसा जीतने के बाद उनसे बैंक खातों, यूपीआई आईडी और क्यूआर कोड के माध्यम से पैसे मंगवाए जाते थे। इस तरह अलग-अलग राज्यों में बैठे लोगों को निशाना बनाया जाता था।
खाते में रकम आते ही निकाल लेते थे पैसे
पुलिस के मुताबिक, पीड़ितों से रकम प्राप्त होने के बाद गिरोह के सदस्य उसे एटीएम और दूसरे माध्यमों से निकालकर नेटवर्क के अन्य लोगों तक पहुंचाते थे। बैंक खाते उपलब्ध कराने, सिम कार्ड देने और पैसे निकालने या आगे ट्रांसफर करने वाले सदस्यों को इसके बदले कमीशन दिया जाता था।
छापेमारी में मिले नोटपैड और रजिस्टर में ग्राहकों तथा संभावित पीड़ितों से जुड़ी जानकारियां दर्ज होने की बात सामने आई है। पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन, दस्तावेजों और बैंक लेनदेन की जांच कर रही है। इसके जरिए ठगी के शिकार अन्य लोगों, इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और गिरोह से जुड़े दूसरे सदस्यों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
नोट: यह खबर पुलिस की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर तैयार की गई है। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगी।



