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तब की मस्जिद है, जब यहां रेलवे का नामोनिशान तक नहीं था… रेलवे के नोटिस पर बोली अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी

Varanasi Mosque Row: उत्तर प्रदेश के वाराणसी रेलवे स्टेशन के पास बनी गंजएशहीदा मस्जिद को ध्वस्त करने की जो नोटिस रेलवे की तरफ से चस्पा किया गया है. ऐसे में मस्जिद की कस्टोडियन अंजुमन इंतज़ामिया मसाजिद कमेटी ने इस पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. कमेटी की तरफ से कहा गया कि मस्जिद का वजूद बहुत पुराना है. मस्जिद रेलवे स्टेशन के निर्माण के पहले से ही मौजूद है. रेलवे की तरफ से मस्जिद को ध्वस्त किए जाने का नोटिस चिस्पा किए जाने के बाद कमेटी के लोगों ने इसका विरोध किया है.

तब की मस्जिद है, जब यहां रेलवे का नामोनिशान तक नहीं था… रेलवे के नोटिस पर बोली अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी

गंजएशहीदा मस्जिद कमेटी के लोगों ने कहा कि नक्शाफोटोग्राफ और डॉक्यूमेंट चीख चीख के कह रहे हैं कि वो तब की मस्जिद है जब रेलवे का नामोनिशान तक नहीं था. अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने दावा किया है कि रेलवे फर्जी नोटिस चस्पा कर रहा है.

कमेटी के लोगों ने क्या कहा?

जब लोगों ने से पूछा गया कि नोटिस में 20 जून की तारीख दी गई है. क्या आज मस्जिद का आखिरी दिन है? तो जवाब मोहम्मद यासीन ने कहा कि देखिए जो नोटिस रेलवे की तरफ से मस्जिद के गेट पर चस्पा है वो रेलवे की तरफ से ही चस्पा है. हमें इस पर शक है क्योंकि नोटिस में ना तो कोई दस्तखत हैं, ना ही कोई मुहर. हमें शक है कि ये नोटिस ‘लॉ एंड ऑर्डर’ डिस्टर्ब करने के लिए लगाया गया है.

वहीं, जब पूछा गया कि क्या गंज ए शहीदा मस्जिद रेलवे की जमीन पर बनी हुई है? तो उन्होंने कहा किए ये मस्जिद 1034 की है, करीब करीब एक हजार साल पुरानी ये मस्जिद है, जहां तक मस्जिद को रेलवे की जमीन बनाया गया बताया जा रहा है ये एक अफवाह है. 188384 के बंदोबस्ती में साफसाफ मस्जिद लिखा है और हमारे पास डॉक्यूमेंट है.काशी स्टेशन 1887 में अस्तित्व में आया जब डफरीन ब्रिज बन रहा था जिसको बाद में मालवीय पुल कहा गया. ब्रिज के बनते समय का फोटो भी हमने जिला प्रशासन को दिखाया है.ये कोरी अफवाह है कि मस्जिद रेलवे की जमीन पर बना है.

सिविल कोर्ट में केस हारने पर क्या बोले?

जब उनसे अगल सवाल पूछा गया कि आप कह रहे हैं कि आपके पास डॉक्यूमेंट है, फोटो है तो फिर सिविल कोर्ट में आप हार क्यूं गए? तब उन्होंने कहा कि देखिए ये भी एक अफवाह फैलाई जा रही है कि अगस्त 2024 में सिविल कोर्ट ने मस्जिद का मामला खारिज कर दिया था. हकीकत ये है कि मस्जिद का मसला कभी सिविल कोर्ट में गया ही नहीं. मस्जिद के बाहर की जमीन का मामला था और दोनों पक्ष हम और रेलवे दोनों की अनुपस्थिति के कारण वो मामला खारिज हुआ था. उस मामले का गंज ए शहीदा मस्जिद से कोई लेना देना नही था.

वहीं, जब पूछा गया कि जिलाधिकारी से मुलाकात में क्या तय हुआ? तब उन्होंने कहा कि देखिए जिलाधिकारी से हम लोगों ने मुलाकात की और अपना पक्ष रखा. जिलाधिकारी ने आश्वस्त किया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ही इस मामले का हल निकाला जाएगा. रेलवे के अधिकारियों से भी डीएम ने बात की और हम लोगों को भरोसा दिया है कि सबकुछ कानून के ही अनुसार होगा.

रेलवे ने क्या कहा?

वहीं, उन्होंने अपने कमेटी के अगले कदम के बारे में कहा कि अजगैब शहीद मस्जिद के विषय में मैं बहुत नहीं जानता इसलिए कुछ नही बोलूंगा. लेकिन गंजए शहीदा मस्जिद के विषय में तो हम आश्वस्त हैं कि ‘मस्जिद थी है और रहेगी’. हम हाईकोर्ट जाने पर भी विचार कर रहे हैं.

इस मामले पर एडीआरएम नार्दन रेलवे बृजेश कुमार ने बताया कि गंजएशहीदा मस्जिद पर नोटिस नार्दन रेलवे की तरफ से लगाया गया है. काशी स्टेशन के एक्सपेंशन के लिए और मल्टी मॉडल हब बनाने के लिए काशी स्टेशन का विस्तार किया जा रहा है.

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