दिल्ली सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने पूरे ऑटो सेक्टर में चर्चा शुरू कर दी है. सरकार ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल 2028 से दिल्ली में नई पेट्रोल बाइक और स्कूटर का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाएगा. यानी इस तारीख के बाद अगर कोई नई दोपहिया गाड़ी खरीदनी होगी, तो उसे इलेक्ट्रिक मॉडल चुनना होगा.

यह सिर्फ एक नया नियम नहीं, बल्कि दिल्ली के ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है. लेकिन सवाल यह है कि सरकार ने इतना बड़ा कदम आखिर क्यों उठाया?
दिल्ली सरकार ने दोपहिया वाहनों को ही क्यों चुना?
दिल्ली में सबसे ज्यादा संख्या दोपहिया वाहनों की है. आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में रजिस्टर्ड कुल वाहनों में करीब 70 से 75 प्रतिशत हिस्सेदारी बाइक और स्कूटर की है. एक पेट्रोल कार की तुलना में एक स्कूटर कम प्रदूषण करता है, लेकिन जब लाखों पेट्रोल बाइक और स्कूटर रोज सड़कों पर चलते हैं, तो उनका कुल प्रदूषण काफी बढ़ जाता है. ये वाहन PM2.5, कार्बन मोनोऑक्साइड और हानिकारक गैसों का बड़ा सोर्स हैं, खासकर ट्रैफिक जाम के दौरान. सरकार का मानना है कि अगर सबसे बड़े वाहन वर्ग यानी दोपहिया वाहनों को इलेक्ट्रिक बना दिया जाए, तो शहर के प्रदूषण में काफी कमी लाई जा सकती है.
क्या इलेक्ट्रिक टूव्हीलर अब पूरी तरह तैयार हैं?
सरकार का मानना है कि दोपहिया वाहन ऐसा सेगमेंट है, जहां इलेक्ट्रिक तकनीक अब काफी विकसित हो चुकी है. आज पेट्रोल की कीमत लगभग 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास है. ऐसे में पेट्रोल स्कूटर चलाने का खर्च लगभग 2 से 2.50 रुपये प्रति किलोमीटर पड़ता है. वहीं इलेक्ट्रिक स्कूटर को चलाने का खर्च केवल 15 से 25 पैसे प्रति किलोमीटर तक आता है. यानी रोजाना ज्यादा चलने वालों के लिए EV काफी सस्ता विकल्प बन चुका है. इसके अलावा Ather, TVS, Hero Vida और Bajaj जैसी कंपनियां पहले से ही भरोसेमंद और हाईस्पीड इलेक्ट्रिक स्कूटर बना रही हैं. इसलिए सरकार को लगता है कि अब इस सेगमेंट को पूरी तरह इलेक्ट्रिक बनाया जा सकता है.
दिल्ली में हर साल बिकते हैं इतने टूव्हीलर
ध्यान देने वाली बात ये है कि के तहत लिया गया पेट्रोल टूव्हीलर बंद करने का फैसले का असर पूरे भारत के टूव्हीलर बाजार पर बहुत ज्यादा नहीं पड़ने वाला है. वाहन पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 202526 में दिल्ली में कुल 5.68 लाख दोपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ. यह पिछले साल के मुकाबले करीब 25% ज्यादा है, लेकिन पूरे भारत में इसी दौरान लगभग 2.2 करोड़ दोपहिया वाहन बिके. यानी देश की कुल बिक्री में दिल्ली की हिस्सेदारी सिर्फ 2.56% है.
क्या कम हो जाएगी कंपनियों की बिक्री?
यही वजह है कि विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली में पेट्रोल बाइक की बिक्री बंद होने से पूरे देश की टूव्हीलर इंडस्ट्री पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा. दिल्ली को EV अपनाने वाले राज्यों में गिना जाता है, लेकिन अभी भी इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी बहुत ज्यादा नहीं है. FY26 में दिल्ली में करीब 41,243 इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक रजिस्टर हुए. यह कुल दोपहिया रजिस्ट्रेशन का सिर्फ 7.25% है. हालांकि यह राष्ट्रीय औसत 6.5% से बेहतर है. अगर 2028 से पेट्रोल बाइक का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह बंद हो जाता है, तो कंपनियों को दिल्ली में मौजूदा EV बिक्री के मुकाबले 12 से 14 गुना ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध कराने होंगे.
कंपनियां पहले से कर रही हैं तैयारी
देश की प्रमुख ऑटो कंपनियां पहले ही इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन बढ़ाने में जुटी हुई हैं. TVS Motor अपनी इलेक्ट्रिक टूव्हीलर उत्पादन क्षमता 40,000 से बढ़ाकर 50,000 यूनिट प्रति माह कर रही है. Bajaj Auto भी अपने लोकप्रिय चेतक इलेक्ट्रिक स्कूटर की बढ़ती मांग को देखते हुए उत्पादन क्षमता 50,000 यूनिट प्रति माह कर चुकी है और नया प्लांट लगाने की तैयारी कर रही है. Hero MotoCorp अपनी Vida इलेक्ट्रिक स्कूटर की सालाना उत्पादन क्षमता 1.48 लाख से बढ़ाकर 2.80 लाख यूनिट करने की योजना पर काम कर रही है. वित्त वर्ष 202526 में पूरे भारत में लगभग 14 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बिके, जो पिछले साल की तुलना में 22% अधिक हैं.



