अयोध्या : राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी के मामले में जैसेजैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसेवैसे बेहद चौंकाने वाले और सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं. पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने राम मंदिर के चढ़ावे से उड़ाई गई रकम को सिर्फ ऐशओआराम में खर्च नहीं किया, बल्कि उस काली कमाई को बढ़ाने के लिए बकायदा उसका पूरा ‘वित्तीय नेटवर्क’ तैयार किया था. यानी कि चोरी किया हुआ पैसा शेयर बाजार में भी लगाया गया था. अब जांच एजेंसियां इस पूरे सिंडिकेट की एकएक कड़ी को जोड़ने में जुटी हैं.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में कथित तौर पर सामने आया है कि चोरी की गई दान राशि का एक हिस्सा शेयर बाजार में निवेश किया गया और कुछ रकम ब्याज पर भी दी गई. पुलिस सूत्रों के अनुसार, रामशंकर यादव उर्फ़ टिन्नू यादव समेत दूसरे आरोपियों ने इन्वेस्टमेंट किया था. टिन्नू यादव ने शेयर मार्केट में पैसे लगाये थे. आरोपियों ने चोरी की रकम अपने रिश्तेदारों और करीबी लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर करवाई और बाद में उसे अपने खातों में वापस मंगाकर लेनदेन छिपाने की कोशिश की.

कल पूरी रात चली थी जांच
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी अनुकल्प मिश्रा को उसके घर ले जाकर तलाशी ली और परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ की. इससे पहले सहआरोपी लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय के घरों पर भी पुलिस तलाशी अभियान चला चुकी है. पुलिस ने तीनों आरोपियों के रिश्तेदारों के 30 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है. प्रारंभिक जांच में इन खातों में खाताधारकों की ज्ञात आय से अधिक लेनदेन मिलने की बात सामने आई है.
घर की तलाशी में क्या मिला?
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों के घरों से नकदी, सोने के आभूषण और एक कार बरामद की गई है. हालांकि, बरामद नकदी की राशि और किस आरोपी के घर से क्या बरामद हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. पूछताछ में अनुकल्प मिश्रा और सहआरोपी अविनाश ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि चोरी की रकम शेयर बाजार में लगाई गई और ब्याज पर भी चलाई गई. अनुकल्प मिश्रा के घर की तलाशी के दौरान उसके नाम पर खरीदी गई करीब एक एकड़ जमीन के दस्तावेज भी बरामद हुए. दस्तावेजों के अनुसार जमीन लगभग 6.7 लाख रुपये में खरीदी गई थी, जबकि वर्तमान बाजार मूल्य इससे कई गुना अधिक बताया जा रहा है.
जून के पहले सप्ताह में राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती में कथित अनियमितताओं के बाद विवाद सामने आया था. ट्रस्ट की सिफारिश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी गठित की थी. एसआईटी की प्रारंभिक जांच में गबन के संकेत मिलने के बाद एफआईआर दर्ज हुई और चढ़ावा गणना से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया.



