हर कोई चाहता है कि उसका मनी प्लांट घना और लंबा हो। मनी प्लांट को हराभरा बनाने के लिए आपको उसकी केयर करने की जरूरत होती है। उसके लिए ज्यादा कुछ नहीं करना है बस मिट्टी में कुछ पोषक तत्व मिलाने की जरूरत होती है। मनी प्लांट एक ऐसा पौधा है जो सही देखभाल मिलने पर तेजी से बढ़ता है और लंबीघनी बेलें देता है। कई बार इसकी ग्रोथ रुक जाती है, पत्तियां छोटी रह जाती हैं या नई बेलें निकलना कम हो जाता है। ऐसे में कुछ प्राकृतिक और पौधों के लिए सुरक्षित चीजें इसकी बढ़वार को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।

वर्मीकम्पोस्ट
वर्मीकम्पोस्ट में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम और कई सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं। यह पौधे की जड़ों और पत्तियों की ग्रोथ में मदद करते हैं। इसे डालने से नई पत्तियां जल्दी निकल सकती हैं। बेल की लंबाई बढ़ने में मदद मिल सकती है। पत्तियां अधिक हरी और स्वस्थ दिख सकती हैं। इसे डालने से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है। आप गमले की मिट्टी में 23 बड़े चम्मच वर्मीकम्पोस्ट मिला सकते हैं। महीने में एक बार इसे डालना पर्याप्त है।
केले के छिलके से बनी खाद
आप घर में आने वाले केले के छिलकों को इकठ्ठा करके उसकी खाद बनाकर मनी प्लांट की मिट्टी में मिला सकते हैं। इसमें पोटैशियम और फॉस्फोरस होते हैं। पोटैशियम पूरे पौधे के विकास के लिए अच्छा होता है। इससे नई कोपलें निकलने में मदद मिल सकती है। पौधा अधिक मजबूत बन सकता है। इसे डालने के लिए छिलकों को सुखाकर पीस लें और एकदो चम्मच मिट्टी में मिला दें। आप छिलकों को पानी में 2448 घंटे भिगोकर उस पानी को भी डाल सकते हैं।
सरसों खली का घोल
यह भी पौधे की ग्रोथ के लिए अच्छी होती है। सरसों खली में नाइट्रोजन भरपूर मात्रा में होती है, जो पत्तियों की वृद्धि के लिए जरूरी पोषक तत्व है। इसे डालने से बेल तेजी से बढ़ सकती है। नई शाखाएं और पत्तियां निकलने में मदद मिल सकती है।
पौधा घना दिखाई दे सकता है। इसे इस्तेमाल करने के लिए सरसों खली को 34 दिन पानी में भिगोकर रखें। इसके बाद घोल को पानी मिलाकर पतला करें और महीने में एक बार दें। बिना पतला किए सरसों खली का घोल न डालें, इससे जड़ों को नुकसान हो सकता है।
डिस्क्लेमर यह लेख सामान्य बागवानी जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। पौधे की वृद्धि मिट्टी, मौसम, रोशनी, पानी और देखभाल की स्थिति पर निर्भर करती है। किसी भी खाद या घोल का उपयोग सीमित मात्रा में करें और पहले थोड़ा सा इसे पौधे में डालकर टेस्ट कर लें।



