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मर्दानगी​​​ साबित करने के लिए​​​​​ लड़कों को कटवाते हैं जहरीली चींटियों से, दर्दनाक रस्म जानकर दंग रह जाएंगे

मर्दानगी​​​ साबित करने के लिए​​​​​ लड़कों को कटवाते हैं जहरीली चींटियों से, दर्दनाक रस्म जानकर दंग रह जाएंगे

अमेजन, ब्राजील: दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में आज भी ऐसी जनजातियां रहती हैं, जिनकी परंपराएं आधुनिक समाज के लोगों को हैरान कर देती हैं। ब्राजील के अमेजन जंगलों में रहने वाली साटेरे-मावे जनजाति की एक ऐसी ही परंपरा है, जिसमें लड़कों को वयस्क होने का दर्जा पाने के लिए बेहद दर्दनाक परीक्षा से गुजरना पड़ता है। इस रस्म में लड़कों को जहरीली बुलेट चींटियों के डंक सहने होते हैं।

बुलेट चींटियों के सामने देनी होती है परीक्षा

साटेरे-मावे जनजाति में लड़कों के वयस्क होने से जुड़ी इस परंपरा को लंबे समय से निभाया जाता रहा है। इसमें समुदाय के लड़कों को सबके सामने अपनी सहनशक्ति साबित करनी होती है।

इस रस्म के लिए बुलेट चींटियों को विशेष रूप से तैयार किए गए दस्तानों के अंदर रखा जाता है। इसके बाद लड़कों को उन दस्तानों में अपने हाथ डालने पड़ते हैं। चींटियां हाथों पर लगातार डंक मारती हैं, जिससे तेज दर्द और सूजन हो सकती है।

10 मिनट तक सहना पड़ता है दर्द

इस परंपरा में लड़कों को लगभग 10 मिनट तक चींटियों से भरे दस्ताने पहने रखने होते हैं। बुलेट चींटियों का डंक बेहद दर्दनाक माना जाता है। इनके काटने पर तेज जलन और लंबे समय तक रहने वाली पीड़ा हो सकती है।

कई बार हाथों में सूजन और दर्द की परेशानी भी बनी रहती है। इस परीक्षा के बाद समुदाय के लोग पारंपरिक नृत्य और संगीत के साथ रस्म को आगे बढ़ाते हैं।

बुलेट चींटियों के डंक को क्यों माना जाता है खतरनाक?

बुलेट चींटी का नाम उसके डंक से होने वाले दर्द की वजह से पड़ा है। इसके काटने पर होने वाली पीड़ा को बेहद तीव्र बताया जाता है। इसका दर्द कुछ घंटों तक रह सकता है और कुछ लोगों में अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

इस जनजाति की मान्यता के अनुसार, इस परीक्षा के जरिए लड़के धैर्य, साहस और दर्द सहने की क्षमता प्रदर्शित करते हैं। यह परंपरा उनके समुदाय में वयस्क होने से जुड़ी पहचान का हिस्सा है।

हालांकि, इस रस्म को केवल मर्दानगी की परीक्षा कहना इसके सांस्कृतिक महत्व को पूरी तरह नहीं दर्शाता। यह साटेरे-मावे समुदाय की पारंपरिक पहचान और सामाजिक मान्यताओं से जुड़ी एक पुरानी रस्म है।

Satya Report Disclaimer: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और सांस्कृतिक जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। जनजातीय परंपराओं और उनसे जुड़ी मान्यताओं में समय तथा समुदाय के अनुसार अंतर हो सकता है।

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