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महंगे पेट्रोल से परेशान शख्स ने निकाला गजब का देसी जुगाड़! फ्यूल खर्च हुआ आधा

जबलपुर . कहते हैं न कि ‘आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है’. इस कहावत को सच कर दिखाया है बीकॉम पास एक होनहार शख्स ने. महंगे पेट्रोल से तंग आकर इस शख्स ने एक ऐसा नायाब जुगाड़ और आविष्कार किया है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है.

दरअसल, हम बात कर रहे हैं गोरखपुर निवासी रूपेंद्र आनंद की. जिनकी आईडी स्विगी, जोमैटो, रैपिडो और ओला जैसी तमाम डिलीवरी सेवाओं पर एक्टिव है. दिनभर की भागदौड़ और डिलीवरी के दौरान रोजाना उनकी गाड़ी में 400 से 500 रुपये का पेट्रोल खर्च हो जाता था. पेट्रोल के इस भारी-भरकम इन्वेस्टमेंट से वह काफी परेशान हो चुके थे. तभी उनके दिमाग में आया कि क्यों न कुछ ऐसा बदलाव किया जाए, जिससे सफर भी आसान हो जाए और रोजाना का भारी खर्च भी बच सके. जिसके लिए पिछले 5-6 सालों से इसी सोच के साथ इस पर काम कर रहे थे.

नॉन-आरटीओ मोटर और बैटरी का बेहतरीन तालमेल
उन्होंने अपनी पुरानी बाइक में एक खास नॉन-आरटीओ मोटर फिट की है. इस मोटर की रफ्तार 35 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक जाती है, जो शहर के भीतर की डिलीवरी के लिए बिल्कुल मुफीद है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस बाइक को इलेक्ट्रिकली और पेट्रोल दोनों तरीकों से चलाया जा सकता है. नॉन-आरटीओ मोटर होने की वजह से उन्हें आरटीओ के झंझटों या कागजी कार्रवाई की टेंशन भी नहीं है. बाइक में लेड-एसिड बैटरी का इस्तेमाल किया गया है, जिसे बारिश या पानी से बचाने के लिए पूरी तरह से सुरक्षित और पेटी के भीतर ताला लगाकर करके रखा गया है.

महीने के हजारों रुपये की हो रही बचत
इस देसी और शानदार जुगाड़ ने शख्स की जिंदगी आसान कर दी है. पहले जहां उन्हें महीने में केवल पेट्रोल के नाम पर 12 हजार से 15 हजार रुपये चुकाने पड़ते थे, वह खर्च अब सिमटकर महज 25 सौ से 3 हजार रुपये पर आ गया है. हालांकि, इस पूरी मैन्युफैक्चरिंग को तैयार करने में एक बार का खर्च 35 हजार से 40 हजार रुपये के आसपास आया था, लेकिन लंबे समय में यह उनके लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहा है. बढ़ती महंगाई के दौर में इस शख्स का यह आविष्कार आज आसपास के इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और हर कोई उनके इस हुनर की तारीफ कर रहा है.

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