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राजस्थान में फर्जी डिग्री से डॉक्टर बनने का आरोप, दो गिरफ्तार; एक आठवीं पास होकर चला रहा था अस्पताल

राजस्थान में फर्जी डिग्री से डॉक्टर बनने का आरोप, दो गिरफ्तार; एक आठवीं पास होकर चला रहा था अस्पताल

जयपुर, राजस्थान: राजस्थान में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर के रूप में पंजीयन कराने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में आरोप है कि एक व्यक्ति ने कजाकिस्तान से एमबीबीएस करने के दस्तावेजों के बजाय फर्जी डिग्री और अंकतालिका पेश की, जबकि दूसरे ने स्त्री रोग एवं प्रसूति विज्ञान में डिप्लोमा के कथित कूटरचित प्रमाणपत्रों के आधार पर पंजीयन कराया। हैरानी की बात यह है कि जांच के मुताबिक, दूसरा आरोपी केवल आठवीं कक्षा तक पढ़ा है और अस्पताल भी संचालित कर रहा था।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सीकर जिले के कालियावास निवासी पंकज यादव (30) और जालोर जिले के दहीपुर निवासी नानजीराम चौधरी के रूप में हुई है। दोनों को अदालत में पेश करने के बाद पुलिस अभिरक्षा में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

एफएमजी परीक्षा में बार-बार असफल होने के बाद फर्जी दस्तावेज बनाने का आरोप

मामले की शुरुआत राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. गिरिधर गोपाल की शिकायत से हुई थी। उन्होंने 6 अक्टूबर 2024 को जयपुर के अशोक नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शुरुआती जांच में आठ लोगों के नाम सामने आए, जबकि बाद में नानजीराम चौधरी के खिलाफ भी रिपोर्ट दी गई। इसके बाद मामले की जांच एसओजी को सौंपी गई।

जांच के अनुसार, पंकज यादव ने वर्ष 2013 से 2018 के बीच कजाकिस्तान में एमबीबीएस की पढ़ाई की थी। हालांकि, वह विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट परीक्षा (एफएमजी) में कथित तौर पर करीब छह बार सफल नहीं हो सका।

आरोप है कि इसके बाद उसने बिहार के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज के नाम से फर्जी एमबीबीएस डिग्री और अंकतालिका तैयार करवाई। उसने बिहार मेडिकल काउंसिल का कथित फर्जी पंजीयन प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किया। दस्तावेजों के सत्यापन में डिग्री और अंकतालिका फर्जी पाई गईं। एसओजी ने पंकज यादव को हरियाणा के कैथल से गिरफ्तार किया।

आठवीं पास होने के बावजूद गायनेकोलॉजी डिप्लोमा के दस्तावेज पेश करने का आरोप

दूसरे आरोपी नानजीराम चौधरी पर स्त्री रोग एवं प्रसूति विज्ञान में डिप्लोमा यानी डीजीओ के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन कराने का आरोप है।

जांच के दौरान संबंधित संस्था, कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स, मुंबई से प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, डिप्लोमा प्रमाणपत्र, आवंटन पत्र, परीक्षा उत्तीर्ण करने और परीक्षा में शामिल होने से संबंधित दस्तावेज फर्जी पाए गए।

जांच में यह भी सामने आया कि नानजीराम चौधरी की औपचारिक शिक्षा आठवीं कक्षा तक है। वह जालोर जिले के रानीवाड़ा में भास्कर अस्पताल का संचालन करता था।

क्लीनिक में काम से शुरू हुआ सफर, फिर अस्पताल का संचालन

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नानजीराम ने वर्ष 2010 के आसपास एक निजी चिकित्सक के क्लीनिक में पर्चियां काटने का काम किया था। वर्ष 2014 में वह राजदेव अस्पताल के ओपीडी काउंटर पर काम करने लगा। इसके बाद वर्ष 2015 में अस्पताल खरीदने और 2016 में उसका नाम बदलकर भास्कर अस्पताल करने की जानकारी सामने आई है।

अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन कैसे कराया गया और आरोपियों ने किस प्रक्रिया का इस्तेमाल किया।

मेडिकल काउंसिल के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

एसओजी के अनुसार, मामले में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन पदाधिकारियों और कर्मचारियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दस्तावेजों के सत्यापन और पंजीयन के दौरान कहीं नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई।

शुरुआती मामले में जिन आठ लोगों के नाम सामने आए थे, उनमें शांतनु कुमार चारण, दीपक चौधरी, देवेंद्र नेहरा, गीता कुमारी, पंकज यादव, महेश कुमार गुर्जर, सरीमुल मजदूमदार और रामकिशोर महावर शामिल हैं।

फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मामले में अन्य लोगों की भूमिका और कथित फर्जी पंजीयन से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाना जांच एजेंसी के लिए अहम होगा।

सत्या रिपोर्ट की ओर से: यह समाचार उपलब्ध रिपोर्टों और जांच से जुड़ी जानकारी पर आधारित है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी।

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