
लखनऊ, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने विभूतिखंड स्थित समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर कथित फर्जी साइबर कॉल सेंटर से पकड़े गए 119 आरोपियों की गिरफ्तारी को वैध माना है। अदालत ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कुछ प्रक्रियात्मक कमियां होने मात्र से पूरी गिरफ्तारी को अवैध नहीं माना जा सकता।
न्यायमूर्ति रजनीश कुमार और न्यायमूर्ति बबिता रानी की पीठ ने मंगलवार को 14 आरोपियों की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि आरोपियों को गिरफ्तारी के आधार और कारण बरामदगी मेमो के माध्यम से बताए गए थे और उसकी प्रति भी उन्हें उपलब्ध कराई गई थी।
समिट बिल्डिंग में छापेमारी कर पकड़े गए थे 119 लोग
मामला 30 जून 2026 की रात का है। पुलिस को मिली सूचना के आधार पर समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर छापेमारी की गई थी। इस दौरान पुलिस ने 119 लोगों को पकड़ा था। मौके से 103 लैपटॉप, 109 मोबाइल फोन, 68 आईफोन और 116 हेडफोन समेत बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए थे। पुलिस का आरोप है कि यहां कथित फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था, जहां अमेरिकी नागरिकों को विभिन्न सरकारी एजेंसियों और कंपनियों के अधिकारी बनकर ठगा जाता था।
आरोपियों ने लगाया था अवैध हिरासत का आरोप
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में आरोप लगाया गया था कि उन्हें 24 घंटे से अधिक समय तक अवैध हिरासत में रखा गया और गिरफ्तारी के आधार की जानकारी भी नहीं दी गई। हालांकि, अदालत ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया। पीठ ने कहा कि पुलिस ने एक जुलाई को प्राथमिकी दर्ज की थी और दो जुलाई को सभी आरोपियों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया था।
परिजनों को सूचना देने में रिकॉर्ड में नहीं की गई थी प्रविष्टि
आरोपियों के परिजनों को गिरफ्तारी की सूचना देने के मामले में अदालत ने माना कि पुलिस ने फोन के जरिए सूचना दी थी, लेकिन अभिलेख में इसकी प्रविष्टि नहीं की गई थी। पीठ ने इसे प्रक्रियात्मक कमी माना, लेकिन कहा कि इस तरह की कमी के आधार पर पूरी गिरफ्तारी को अवैध नहीं ठहराया जा सकता।
तकनीकी अनुपालन के बजाय पर्याप्त अनुपालन को प्राथमिकता
अदालत ने कहा कि कानून केवल तकनीकी अनुपालन के बजाय पर्याप्त अनुपालन को प्राथमिकता देता है। पीठ के मुताबिक, मामले की परिस्थितियों में गिरफ्तारी मेमो से जुड़ी कमियों को महज अनियमितता माना जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी कमियां उस स्तर की अवैधता नहीं हैं, जिनके आधार पर गिरफ्तारी और उसके बाद की न्यायिक रिमांड को निरस्त किया जा सके। इसी आधार पर अदालत ने 14 आरोपियों की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं खारिज कर दीं।



