उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जल शोधन संयंत्रों यानी वॉटर प्यूरिफिकेशन प्लांट्स की स्थापना में हो रही देरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को पांच प्रस्तावित जल शोधन संयंत्रों के निर्माण की दिशा में तेजी से कदम उठाने और भूमि आवंटन के साथ जरूरी वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है. जस्टिस राजन राय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने उत्कर्ष लोक सेवा संस्थान की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. अदालत ने स्पष्ट किया कि जल शोधन संयंत्रों की स्थापना जरूरी है, इसलिए सरकार इस मामले में अनावश्यक देरी न करे.

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि सीतापुर रोड पर प्रस्तावित जल शोधन संयंत्र के लिए 231.52 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति का मामला मंत्रिमंडल के समक्ष विचाराधीन है. इस पर जल्द फैसला होने की संभासीतापुर रोड पर प्रस्तावित जल शोधन संयंत्र के लिएवना है. सरकार ने यह भी बताया कि जिलाधिकारी की ओर से इस संयंत्र के लिए भूमि पहले ही आवंटित की जा चुकी है.
चार अन्य जगहों पर भी चिह्नित हुई जमीन
सरकार ने अपने हलफनामे में बताया कि उत्तर प्रदेश जल निगम की ओर से स्थापित किए जाने वाले शेष चार जल शोधन संयंत्रों के लिए भी जमीन चिह्नित कर ली गई है. ये संयंत्र बाराबंकी रोड, कानपुर रोड, सुल्तानपुर रोड और हरदोई रोड पर प्रस्तावित हैं. इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि चिह्नित भूमि का विधिवत आवंटन कर उसे उत्तर प्रदेश जल निगम को सौंपा जाए, ताकि निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ सके.
अगली सुनवाई पर सरकार को देना होगा पूरा ब्यौरा
हाईकोर्ट ने कहा कि शेष चार जल शोधन संयंत्रों के लिए भी वित्तीय स्वीकृति उसी प्रक्रिया के तहत प्राप्त की जाए, जिसका पालन सीतापुर रोड स्थित संयंत्र के मामले में किया जा रहा है. खंडपीठ ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई से पहले हलफनामा दाखिल कर सीतापुर रोड संयंत्र के संबंध में मंत्रिमंडल के फैसले और बाकी चार संयंत्रों की प्रगति का विस्तृत ब्यौरा देने का निर्देश दिया है.



