
अमृत विचार, लखनऊ: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार को लखनऊ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। प्रदेश मुख्यालय से निकलकर विधानसभा और मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे सैकड़ों कार्यकर्ताओं को पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों में तीखी झड़प और जमकर धक्कामुक्की हुई।
दोपहर 12 बजे उग्र हुआ प्रदर्शन, सड़क पर लेटे कार्यकर्ता
दोपहर करीब 12 बजे 500 से अधिक कांग्रेस कार्यकर्ता मॉल एवेन्यू स्थित प्रदेश कार्यालय पर एकत्रित हुए। हाथ में ‘वोट छोड़ो, गद्दी छोड़ो’ के पोस्टरबैनर थामे कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े। मुश्किल से 200 मीटर दूर पहुंचते ही पुलिस की भारी बैरिकेडिंग ने रास्ता रोक दिया। कार्यकर्ता जब आगे बढ़ने पर अड़े, तो माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति संभालने के लिए 12 थानों की फोर्स और पीएसी की 4 बटालियनों को तैनात किया गया।
प्रदर्शन के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। पुलिस ने जब उन्हें जबरन नीचे उतारा, तो कार्यकर्ता सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और कई कार्यकर्ता सड़क पर लेट गए। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने अजय राय, आराधना मिश्रा समेत तमाम नेताओं और कार्यकर्ताओं को टांगकर वैन व बसों में भरा और ईको गार्डन ले गई। यहां भी जोरदार प्रदर्शन जारी रहा।
NSUI का पुलिस पर गंभीर आरोप
NSUI के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद अनस ने पुलिस पर बदसलूकी का आरोप लगाते हुए कहा, “पुलिस ने आज अभद्रता की सारी हदें पार कर दीं। हमारे कपड़े फाड़े गए और गालियां दी गईं। लेकिन पुलिसिया दमन से हम डरने और पीछे हटने वाले नहीं हैं।”
देशभर में गुस्सा: पटना में वाटर कैनन, CJP की चेतावनी और SC में याचिका
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ यह गुस्सा सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं है। देहरादून में भी कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़े, वहीं पटना में पुलिस को वाटर कैनन का सहारा लेना पड़ा। कांग्रेस का आरोप है कि ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक बीते 10 महीनों में आयोग के दो अन्य आयुक्तों ने 14 बार फैसलों पर आपत्ति जताई है, जिससे साफ है कि ज्ञानेश कुमार तानाशाही चला रहे हैं।
दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी ने 48 घंटे की डेडलाइन खत्म होने के बाद 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में भी एक याचिका दाखिल कर SIR के फैसलों, सॉफ्टवेयर बदलावों को असंवैधानिक घोषित करने और करीब 13 करोड़ वोटर्स के नाम काटने के मामले में एसआईटी जांच की मांग की गई है।
रिपोर्ट : दरख्शां कदीर सिद्दीकी
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