18 सितंबर को जारी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के डेटा के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत के सॉफ्टवेयर सर्विस एक्सपोर्ट में अमेरिका का हिस्सा आधे से ज्यादा रहा. इस देश को होने वाला एक्सपोर्ट 11 फीसदी बढ़कर 119.7 बिलियन डॉलर हो गया. वित्त वर्ष 2025 में अमेरिका का हिस्सा 52.9 फीसदी था जो बढ़कर 54.1 फीसदी हो गया, जिससे भारत की टेक्नोलॉजी सर्विस कंपनियों के लिए सबसे बड़े विदेशी बाजार के तौर पर उसकी स्थिति और मजबूत हुई. ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, वित्त वर्ष 2024 में भी यह 54.1% था, जिसके बाद अगले साल इसमें गिरावट आई थी.

RBI के सालाना सर्वे से पता चला कि भारतीय कंपनियों की विदेशी सहयोगी कंपनियों की बिक्री को छोड़कर, भारत का कुल सॉफ्टवेयर सर्विस एक्सपोर्ट वित्त वर्ष 2026 में 8.2 फीसदी बढ़कर 221.4 बिलियन डॉलर हो गया. विदेशी सहयोगी कंपनियों की सेल से इसमें 17.9 बिलियन डॉलर और जुड़े. इस साल भारत के कुल सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट की तुलना में अमेरिका से होने वाला कारोबार तेजी से बढ़ा. UK दूसरा सबसे बड़ा डेस्टिनेशन बना रहा, हालांकि उसका हिस्सा 15.5 फीसदी से घटकर 15.4 फीसदी हो गया.
IT सर्विस सबसे बड़ा सेगमेंट
सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट में IT सर्विस का हिस्सा लगभग 147 बिलियन डॉलर था, जो इसे सबसे बड़ी कैटेगरी बनाता है. बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग सर्विस का योगदान 56 बिलियन डॉलर था, जबकि सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट डेवलपमेंट एक्सपोर्ट 6.4 बिलियन डॉलर रहा. इन आंकड़ों में कंप्यूटर सर्विस और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजीएनेबल्ड सर्विस को शामिल किया गया है. सर्वे में 7,569 सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर्स से संपर्क किया गया और 2,363 कंपनियों से जवाब मिले, जिनमें ज्यादातर बड़ी कंपनियां शामिल थीं. जवाब देने वाली कंपनियां RBI के अनुमानित सॉफ्टवेयर सर्विस एक्सपोर्ट का लगभग 89 फीसदी हिस्सा थीं.
ऑनसाइट कमाई में गिरावट
कुल सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट बढ़ने के बावजूद, ऑनसाइट दी जाने वाली सॉफ्टवेयर सर्विस से होने वाली कमाई वित्त वर्ष 2026 में घटकर 18.4 बिलियन डॉलर रह गई, जो पिछले साल 19 बिलियन डॉलर थी. ऑनसाइट सर्विस में भारतीय टेक्नोलॉजी कर्मचारी क्लाइंट के विदेशी ऑफिस में जाकर काम करते हैं, जबकि ऑफसाइट सर्विस दूर से दी जाती हैं, जिसमें भारत में मौजूद डेवलपमेंट सेंटर से दी जाने वाली सर्विस भी शामिल हैं.
यह डेटा ऐसे समय में जारी किया गया है जब भारत की टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के लिए अमेरिका की इमिग्रेशन पॉलिसी फिर से चर्चा का विषय बन गई है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर को कुछ नए H1B वीजा आवेदनों के लिए 100,000 डॉलर की फीस वाले आदेश को एक साल के लिए बढ़ा दिया. इस कदम को कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.
RBI का सर्वे ऑनसाइट कमाई में आई गिरावट के लिए वीजा पॉलिसी को जिम्मेदार नहीं मानता है. भारत के सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई जब वॉशिंगटन के साथ टैरिफ को लेकर तनाव चल रहा था. हालांकि, अमेरिका के टैरिफ उपाय मुख्य रूप से सामान से जुड़े थे, जबकि RBI का सर्वे सेवाओं पर केंद्रित है. डेटा से टैरिफ विवाद और सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी के बीच कोई संबंध साबित नहीं होता है.



