दिल्ली में तेजी से जहरीली होती हवा का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. शुक्रवार को कोर्ट ने सुनवाई की और कहा, प्रदूषण रोकने के लिए वो जितने ज्यादा आदेश और पाबंदियां लगाएगा, उनका उल्लंघन उतना ही बढ़ेगा. सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण के प्रति लोगों को जागरूक करने और उनके व्यवहार में बदलाव लाने की बात को जरूरी बताया. वहीं, दिल्लीएनसीआर में लगातार AQI बुरी स्थिति में पहुंचता नजर आ रहा है.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक शुक्रवार यानी 6 नवंबर की सुबह दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 389 था जो बेहद खराब श्रेणी में है. रोहिणी में सबसे अधिक 473 AQI दर्ज हुआ. यही नहीं, आरके पुरम में 441, अलीपुर और सोनिया विहार में 435435, नॉर्थ कैंपस में 424, ओखला फेज2 में 426, RTO में 420 और नजफगढ़ में 412 AQI रहा. दिलचस्प बात है कि जब भी जहरीली हवा का हाल बताने वाले AQI को चेक करने की बात आती है तो कई बार बड़ा अंतर दिखाई देता है. AQI को लेकर सरकारी आंकड़े और इसे मॉनिटर करने वाले फोन ऐप अलग आंकड़ो बताते हैं. जानिए, ऐसा क्यों होता है.
वजह 1: अलग पैमाना
AQI कोई सीधा माप नहीं, बल्कि एक गणना है. हर देश अपने मानकों के हिसाब से प्रदूषक की सांद्रता को 0500 के सूचकांक में बदलता है. भारत का CPCB और अमेरिका का EPA अलगअलग ब्रेकप्वाइंट इस्तेमाल करते हैं, इसलिए एक ही सांद्रता पर दोनों की संख्या अलग आती है. PM10 की 400 µg/m³ सांद्रता पर CPCB का सबइंडेक्स 362 और अमेरिकी पैमाने पर 264 आता है. IQAir का AirVisual ऐप भारत में भी डिफॉल्ट रूप से अमेरिकी पैमाना दिखाता है.
दिल्ली की हवा जहरीली
वजह 2: 500 की सीमा
CPCB का AQI 500 पर रुक जाता है, चाहे प्रदूषण कितना भी बढ़े. अंतरराष्ट्रीय प्लेटफ़ॉर्म इसे आगे भी बढ़ने देते हैं. पिछले साल दिवाली के बाद CPCB ने 351 दर्ज किया, जबकि IQAir ने उसी दिन 1,121 दिखाया. SAFAR के संस्थापक गुफरान बेग ने कहा था कि भारत के ब्रेकप्वाइंट WHO के मानकों से काफी कम सख्त हैं.
वजह 3: औसत की अवधि
- CPCB और SAMEER ऐप: 24 घंटे का रनिंग औसत दिखाते हैं.
- SAFAR: उस समय की स्थिति दिखाता है.
- IQAir: पिछले एक घंटे का औसत दिखाता है.
इसी कारण सुबह के घने स्मॉग में ऐप ऊंचा आंकड़ा दिखाते हैं और CPCB का 4 बजे वाला औसत पिछले 24 घंटों के हिसाब से धीरेधीरे बदलता है. CPCB के अध्यक्ष के अनुसार स्टेशन हर 15 मिनट में डेटा बनाते हैं और AQI की गणना हर घंटे होती है.
वजह 4: कौनसा स्टेशन, कौनसी जगह
एक ही दिन में दिल्ली के भीतर भी बड़ा फर्क दिखता है. 5 नवंबर को CPCB के आंकड़ों में इंडिया गेट के पास AQI 399 था, जबकि आनंद विहार में 296 रहा. CPCB जब पूरे शहर का AQI बताता है तो सभी स्टेशनों का औसत लेता है. कई ऐप किसी एक नजदीकी स्टेशन या सेंसर का आंकड़ा दिखाते हैं.
वजह 5: सेंसर अलगअलग
CPCB के उच्चपरिशुद्धता वाले सरकारी मॉनिटर महंगे होते हैं और हर जगह नहीं लगाए जा सकते. IQAir जैसे प्लेटफॉर्म सरकारी स्टेशनों के साथ निजी और कम कीमत वाले लेजरस्कैटरिंग सेंसर का डेटा भी मिलाते हैं, जो ज्यादा इलाकों को कवर करता है पर सटीकता में अलगअलग हो सकता है. अमेरिकी EPA के वैज्ञानिकों ने पाया है कि लोकप्रिय कम कीमत वाले सेंसर नमी में महीन कणों को ज्यादा बताते हैं. गूगल सरकारी स्टेशन के अभाव में नॉनरेगुलेटरी साझेदारों का डेटा लेता है.
वजह 6: कौनसे प्रदूषक गिने जा रहे हैं?
CPCB आठ प्रदूषकों को देखता है. AQI तभी बनता है जब कम से कम तीन प्रदूषकों का डेटा हो और उनमें PM2.5 या PM10 शामिल हो। अंतिम AQI उन सब में सबसे ख़राब सबइंडेक्स होता है। कई ऐप सिर्फ़ PM2.5 पर आधारित संख्या दिखाते हैं।
कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने पहले साफ कहा था कि सटीक और भरोसेमंद डेटा के लिए SAMEER ऐप या CPCB की आधिकारिक वेबसाइट देखें.



