: ऑनलाइन वेटिंग ईटिकट बुक करने के बाद अगर वह चार्ट तैयार होने तक कंफर्म नहीं होता है, तो रेलवे सिस्टम उसे अपने आप कैंसिल कर देता है। इसे ऑटोकैंसिल वेटिंग टिकट कहा जाता है। कई यात्रियों को लगता है कि टिकट ऑटोकैंसिल होने पर रेलवे भारी जुर्माना काटता है, लेकिन ऐसा नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रेलवे टिकट की रकम में से निर्धारित क्लर्केज चार्ज काटकर बाकी राशि वापस करता है।

प्रति यात्री ₹60 का क्लर्केज चार्ज
ऑनलाइन वेटिंग टिकट के चार्ट बनने तक कंफर्म नहीं होने पर रेलवे प्रति यात्री 60 रुपये क्लर्केज चार्ज काटता है। एसी क्लास के लिए 60 रुपये के साथ जीएसटी भी लागू होता है। इसके बाद बची हुई रकम यात्री को वापस कर दी जाती है। यानी ऑटोकैंसिल वेटिंग टिकट पर यह राशि प्रोसेसिंग चार्ज के तौर पर काटी जाती है, इसे अलग से कोई बड़ा जुर्माना नहीं बताया गया है।
रिफंड के लिए TDR की जरूरत नहीं
ऑटोकैंसिल वेटिंग टिकट के मामले में यात्री को खुद से टिकट कैंसिल करने या टीडीआर फाइल करने की जरूरत नहीं होती। रेलवे का सिस्टम टिकट को अपने आप कैंसिल करता है। इसके बाद क्लर्केज चार्ज काटने के बाद बची रकम उसी बैंक खाते, क्रेडिट कार्ड या यूपीआई में भेज दी जाती है, जिससे टिकट बुक किया गया था। जानकारी के अनुसार रिफंड सामान्य तौर पर 3 से 5 कार्यदिवस में मिल सकता है।
खुद कैंसिल करने पर भी चार्ज कटेगा
अगर टिकट चार्ट बनने से पहले यात्री खुद अपना वेटिंग ईटिकट कैंसिल करता है, तो भी 60 रुपये क्लर्केज चार्ज और लागू जीएसटी काटा जाता है। हालांकि, खुद से टिकट कैंसिलेशन करने का विकल्प ट्रेन के प्रस्थान से 4 घंटे पहले तक या चार्ट बनने तक ही उपलब्ध रहता है। इसके बाद रेलवे सिस्टम अपने नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया करता है।
ऑटोकैंसिल टिकट पर यात्रा न करें
ऑटोकैंसिल वेटिंग टिकट कैंसिल होने के बाद वह यात्रा के लिए वैध टिकट नहीं रहता। इसलिए केवल वेटिंग टिकट होने के आधार पर ट्रेन में यात्रा करने से बचना चाहिए। उपलब्ध जानकारी में ऐसे कैंसिल टिकट पर यात्रा करने की स्थिति में लगने वाले किसी निश्चित जुर्माने की राशि स्पष्ट नहीं की गई है। इसलिए इस मामले में बिना आधिकारिक नियम की पुष्टि के कोई तय पेनल्टी बताना सही नहीं होगा।


