
सूरतगंज/बाराबंकी, अमृत विचार : सरयूघाघरा नदी की बाढ़ और भीषण कटान से करीब दस दिनों से तबाही झेल रहे हेतमापुर गांव के ग्रामीणों को रविवार को कुछ राहत मिली। नदी का जलस्तर घटने के साथ ही कटान की रफ्तार भी काफी धीमी पड़ गई। कटान थमने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, हालांकि नदी का रुख पूरी तरह शांत नहीं होने से उनकी चिंता बरकरार है।
प्रशासन और बाढ़ खंड की टीमें प्रभावित क्षेत्र में निगरानी के साथ कटानरोधी कार्य में जुटी हैं। पिछले दस दिनों में नदी की धारा गांव की ओर बढ़ने से खेत, फसल और कई ग्रामीणों के आशियाने इसकी चपेट में आ चुके हैं। कटान तेज होने पर कई परिवारों को अपने हाथों से घर गिराकर ईंट और गृहस्थी का सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा। ग्रामीणों के मुताबिक, नदी इतनी तेजी से जमीन काट रही थी कि देखते ही देखते खेतों का बड़ा हिस्सा धारा में समा गया।
मंदिर और समाधि स्थल पर भी मंडराया खतरा
सुंदरनगर, कोड़री, ललपुरवा और बाबापुरवा समेत आसपास के गांवों में भी भय का माहौल बना रहा। कई परिवार सामान सड़क किनारे, बांध पर या रिश्तेदारों के घर पहुंचा चुके हैं। कटान की चपेट में आने से धार्मिक स्थलों पर भी खतरा मंडरा रहा है। बाबा नारायण दास की समाधि व मंदिर समेत अन्य स्थलों को बचाने के लिए बाढ़ खंड की ओर से कटानरोधी कार्य कराया जा रहा है। रविवार को जलस्तर घटने से फिलहाल स्थिति में सुधार हुआ है।


