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​बिल्डर ने फंसाए घर खरीदारों के पैसे, ED ने अटैच की 54.71 करोड़ की प्रॉपर्टी; अब कैसे मिलेगा फ्लैट?

दिल्ली के महारानी बाग में ED ने 54.71 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी अटैच की है. प्रवर्तन निदेशालय ने बीते शुक्रवार को अम्रपाली ग्रुप के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच में यह कार्रवाई की है. ED के मुताबिक, अम्रपाली ग्रुप पर घर खरीदारों से जुटाए गए 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर करने और उसका गलत इस्तेमाल करने का आरोप है. इससे पहले सितंबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने भी ED को अम्रपाली के पूर्व निदेशकों की संपत्तियों की पहचान करने और उनसे रिकवरी को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया था.

​बिल्डर ने फंसाए घर खरीदारों के पैसे, ED ने अटैच की 54.71 करोड़ की प्रॉपर्टी; अब कैसे मिलेगा फ्लैट?

ED की इस कार्रवाई के बाद एक बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी बिल्डर पर मनी लॉन्ड्रिंग या धोखाधड़ी के आरोप लगते हैं, तो उसमें अपनी जिंदगी भर की कमाई लगाने वाले घर खरीदारों का क्या होता है? क्या उन्हें फ्लैट मिल जाता है, पैसा वापस मिल सकता है या बिल्डर की संपत्ति बिकने के बाद भी उनका पैसा फंस सकता है? आइए जानते हैं कि बिल्डर पर ED की कार्रवाई होने के बाद घर खरीदारों के पैसे का क्या होता है और उन्हें फ्लैट या रिफंड कैसे मिल सकता है.

1. बिल्डर पर ED की रेड पड़े तो घर खरीदारों के पैसे का क्या होता है?

जब किसी बिल्डर पर मनी लॉन्ड्रिंग का शक होता है, तो ED उसके दफ्तर, घर या दूसरी जगहों पर तलाशी ले सकती है. एजेंसी बैंक खातों, लेनदेन, कंपनियों और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच भी कर सकती है. अगर जांच में किसी संपत्ति के अपराध से हासिल रकम से जुड़े होने का संदेह सामने आता है, तो कानून के तहत उसे अटैच किया जा सकता है.

लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है. ED की रेड या संपत्ति अटैच होने का मतलब यह नहीं है कि घर खरीदारों का पैसा भी जब्त हो गया या उनका दावा खत्म हो गया. खरीदार ने बिल्डर को जो रकम दी है, उसकी वापसी का सवाल अलग है. ED की कार्रवाई का मकसद कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करना और उससे जुड़ी संपत्तियों को सुरक्षित रखना है.

अगर बिल्डर ने खरीदारों से मिली रकम दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर कर दी है, तो जांच एजेंसी उन लेनदेन और संपत्तियों की पड़ताल कर सकती है. इसके बाद कानून के तहत संपत्ति की जब्ती और उससे रिकवरी की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है. हालांकि, खरीदार को पैसा वापस मिलेगा या नहीं, यह केवल ED की रेड पर नहीं, बल्कि उसके दावे, उपलब्ध संपत्तियों और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर निर्भर करेगा.

2. बिल्डर की प्रॉपर्टी अटैच होने पर क्या खरीदारों को पैसा मिल जाता है?

नहीं, संपत्ति अटैच होने से खरीदारों को तुरंत पैसा नहीं मिलता. अटैचमेंट का मतलब है कि संबंधित संपत्ति को कानून के तहत सुरक्षित किया गया है, ताकि उसे बेचने या ट्रांसफर करने से रोका जा सके. इसके बाद संपत्ति की जब्ती और बिक्री के लिए जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है.

मान लीजिए, किसी बिल्डर की 50 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई है. इसका यह मतलब नहीं है कि उस संपत्ति से मिलने वाले 50 करोड़ रुपये सीधे घर खरीदारों में बांट दिए जाएंगे. संपत्ति की वास्तविक बिक्री कीमत, उस पर मौजूद वैध दावे और संबंधित कानूनी आदेश यह तय करने में अहम होंगे कि कितनी रकम उपलब्ध होगी और उसका इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है.

3. पैसा वापस मिलेगा या फ्लैट, कैसे तय होगा कि खरीदार को क्या मिलेगा?

अगर आपने किसी बिल्डर को फ्लैट के लिए पैसे दिए हैं और बाद में बिल्डर पर धोखाधड़ी या मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू हो जाती है, तो आपके सामने दो अलगअलग रास्ते हो सकते हैं फ्लैट का कब्जा या पैसा वापस पाने का दावा. कौनसा रास्ता आपके लिए लागू होगा, यह प्रोजेक्ट की स्थिति, आपके एग्रीमेंट और संबंधित कानूनी आदेशों पर निर्भर करेगा.

  1. पहली स्थिति, प्रोजेक्ट पूरा हो सकता है अगर प्रोजेक्ट को पूरा करने का रास्ता मौजूद है, तो संबंधित कोर्ट या सक्षम अथॉरिटी की निगरानी में निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा सकता है. इसके लिए बाकी निर्माण लागत, उपलब्ध फंड, बिल्डर की स्थिति और दूसरे जरूरी इंतजामों को देखना होगा. निर्माण पूरा होने और जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद खरीदारों को फ्लैट का कब्जा मिल सकता है. हालांकि, यह अपने आप नहीं होता और हर प्रोजेक्ट में इसकी गारंटी नहीं है.
  2. दूसरी स्थिति, खरीदार रिफंड चाहता है अगर खरीदार फ्लैट नहीं लेना चाहता या उसके मामले में पैसा वापस करने का आधार बनता है, तो वह लागू कानूनी प्रक्रिया के तहत रिफंड का दावा कर सकता है. लेकिन दावा करने और वास्तव में पैसा मिलने के बीच अंतर है. भुगतान का रिकॉर्ड, संबंधित आदेश, बिल्डर की उपलब्ध संपत्ति और रिकवरी की स्थिति अहम होगी.
  3. तीसरी स्थिति, बिल्डर के पास पर्याप्त संपत्ति नहीं है अगर बिल्डर की उपलब्ध संपत्तियां खरीदारों के कुल दावों से कम हैं, तो सभी को पूरा पैसा वापस मिलने की गारंटी नहीं होगी. ऐसे में रकम की वसूली और वितरण कानूनी प्रक्रिया तथा संबंधित आदेशों के अनुसार होगा. यानी ED की कार्रवाई अपने आप यह तय नहीं करती कि खरीदार को फ्लैट मिलेगा या रिफंड. इसके लिए प्रोजेक्ट और खरीदार के दावे की स्थिति देखनी होगी.

कुल मिलाकर, किसी बिल्डर पर ED की रेड पड़ने से घर खरीदारों के अधिकार अपने आप खत्म नहीं होते, लेकिन उनका पैसा तुरंत वापस मिलने की गारंटी भी नहीं होती. खरीदार को फ्लैट मिलेगा या रिफंड, यह प्रोजेक्ट की स्थिति, उसके कानूनी दावे, बिल्डर की संपत्तियों से होने वाली रिकवरी और संबंधित आदेशों पर निर्भर करेगा. इसलिए खरीदारों के लिए जरूरी है कि वे अपने भुगतान के सबूत संभालकर रखें, प्रोजेक्ट की स्थिति की जानकारी लें और अपने मामले के मुताबिक सही कानूनी रास्ता अपनाएं.

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