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​गोवंश तस्करी के शक में जब्त की गाड़ी, अब सरकार देगी हर महीने 25 हजार मुआवजा; इलाहाबाद HC का आदेश

उत्तर प्रदेश में गोवंश की तस्करी के मामले में पकड़े गए वाहनों की जब्ती को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है. हाईकोर्ट ने वाहन जब्ती को अवैध करार देते हुए सरकार को हर महीने 25 हजार रुपये किराया देने का आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने यह आदेश गोतस्करी केस में एक बोलेरो पिकअप वाहन की जब्ती के मामले में दिया है.

​गोवंश तस्करी के शक में जब्त की गाड़ी, अब सरकार देगी हर महीने 25 हजार मुआवजा; इलाहाबाद HC का आदेश

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि केवल अनुमान और आशंका के आधार पर किसी वाहन को जब्त नहीं किया जा सकता. इसके लिए ठोस साक्ष्य और कानून में निर्धारित शर्तों का पूरा होना जरूरी है. मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ में हुई. इसमें कोर्ट ने नेसर शाह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य मामले में मिर्जापुर के जिलाधिकारी और विंध्याचल मंडल के आयुक्त के जब्ती संबंधी आदेशों को रद्द कर दिया.

गाड़ी तुरंत रिलीज करने के आदेश

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में जब्त गाड़ी को तत्काल प्रभाव से रिलीज करने के आदेश दिए हैं. इसी के साथ जितने दिन गाड़ी जब्त रही, हर महीने 25 हजार रुपये के हिसाब से वाहन मालिक को मुआवजा देने का भी आदेश दिया है. मामला मिर्जापुर के लालगंज थाना क्षेत्र का है. यहां 5 फरवरी 2025 को पुलिस ने नेसर शाह की बोलेरो पिकअप संख्या UP65DT2650 को जब्त किया था. पुलिस के मुताबिक वाहन में आठ बैल, एक गाय और एक बछड़ा समेत कुल दस मवेशियों को ले जाया जा रहा था.

बिहार के लिए तस्करी का आरोप

आरोप था कि इन पशुओं को पिकअप में भरकर वध के उद्देश्य से बिहार ले जाया जा रहा था. इस मामले में गोवध निवारण अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी. इस मामले में जिलाधिकारी मिर्जापुर ने 19 मई 2025 को वाहन को राज्य सरकार के पक्ष में जब्त करने का आदेश दिया. फिर आयुक्त विंध्याचल मंडल ने भी 21 मई 2026 को पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए जब्ती के आदेश को बरकरार रखा था.

सामने आए ये तथ्य

मामले की सुनवाई के दौरान पाया गया कि पशुओं की पशु चिकित्सा अधिकारी से जांच कराई गई थी और वे स्वस्थ पाए गए थे. वाहन से न तो गोमांस बरामद हुआ था और न ही वध किए गए पशुओं के अवशेष मिले थे. अदालत ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश के भीतर गाय और उसकी संतान के परिवहन के लिए परमिट की आवश्यकता नहीं है. परमिट की अनिवार्यता तभी लागू होती है, जब पशुओं को उत्तर प्रदेश से बाहर ले जाया जा रहा हो.

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