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​कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल फिर फैटी लिवर बढ़ा सकता है दिल की बीमारी का खतरा? कार्डियोलॉजिस्ट से जानें

किसी व्यक्ति की कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट सामान्य होने का मतलब यह नहीं है कि उसे दिल की बीमारी का खतरा नहीं है. लिवर में फैट जमा होने की स्थिति शरीर के मेटाबॉलिज्म, इंसुलिन के काम करने के तरीके और रक्त वाहिकाओं की सेहत से जुड़ी हो सकती है. जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट…

​कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल फिर फैटी लिवर बढ़ा सकता है दिल की बीमारी का खतरा? कार्डियोलॉजिस्ट से जानें

डॉक्टर आशू अग्रवाल का कहना है कि कोलेस्ट्रॉल की रिपोर्ट नॉर्मल आने का मतलब यह नहीं है कि दिल की बीमारी का खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है.

फैटी लिवर, खासकर नॉनअल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज, शरीर में मेटाबॉलिक गड़बड़ी और सूजन से जुड़ी स्थिति है, जिसका संबंध हृदय और रक्त वाहिकाओं की बीमारियों के बढ़े हुए जोखिम से देखा गया है.

कई बार फैटी लिवर वाले व्यक्ति का कुल कोलेस्ट्रॉल सामान्य होता है, लेकिन शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस, पेट के आसपास अधिक चर्बी, हाई ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर बढ़ने जैसी समस्याएं मौजूद हो सकती हैं. ये सभी कारक हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकते हैं.

फैटी लिवर में लिवर के अंदर वसा जमा होने के साथ शरीर में क्रॉनिक इंफ्लेमेशन और मेटाबॉलिक बदलाव हो सकते हैं. लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर धमनियों में प्लाक बनने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिल सकता है. इसलिए केवल कोलेस्ट्रॉल की एक सामान्य रिपोर्ट देखकर हृदय संबंधी जोखिम को कम नहीं माना जाना चाहिए.

ऐसे लोगों को वजन, फैट, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और लिवर की सिचुएशन पर भी नजर रखनी चाहिए. बैलेंस डाइट, फिजिकली फिट रहना, पूरी नींद और वेट को कंट्रोल रखना फैटी लिवर और दिल दोनों के लिए फायदेमंद है.

अगर किसी इंसान को फैटी लिवर है और साथ में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा या परिवार में हार्ट डिजिज की हिस्ट्री है, तो डॉक्टर से नियमित कार्डियक रिस्क असेसमेंट कराना सबसे जरूरी है.

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