उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की गड़बड़ियों को लेकर निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में लापरवाही पाए जाने पर अब निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के साथ जिला निर्वाचन अधिकारी और जिलाधिकारी की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी. पीलीभीत में मतदाता सूची में गड़बड़ी के मामले में दो एसडीएम और एक कंप्यूटर सहायक के खिलाफ कार्रवाई की गई है. वहीं, आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के तीन मतदान स्थलों पर पुनर्मतदान कराने की सिफारिश की गई है.

टीवी9 भारतवर्ष से बातचीत में नवदीप रिणवा ने बताया कि पीलीभीत की मतदाता सूची में गड़बड़ी की जांच में अनियमितताएं सामने आई हैं. प्रारंभिक जांच के अनुसार, तत्कालीन और मौजूदा एसडीएम/ईआरओ स्तर पर लापरवाही हुई, जबकि कंप्यूटर सहायक ने जानबूझकर गड़बड़ी की थी.
दो SDM और कंप्यूटर सहायक पर FIR
इस मामले में दो एसडीएम और कंप्यूटर सहायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है. दोनों एसडीएम के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, जबकि कंप्यूटर सहायक की सेवा समाप्त कर दी गई है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि पीलीभीत के सभी विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की जांच कराई जा रही है.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के सत्यापन और निगरानी की जिम्मेदारी केवल ईआरओ तक सीमित नहीं है. जिला निर्वाचन अधिकारी और जिलाधिकारी का दायित्व भी है कि वो पूरी प्रक्रिया की निगरानी करें और ऐसी गड़बड़ियों को रोकें.
सभी जिलों की वोटर लिस्ट की जांच
पीलीभीत की घटना के बाद प्रदेशभर में मतदाता सूचियों की जांच तेज कर दी गई है. नवदीप रिणवा के मुताबिक, सभी जिलों में मतदाता सूची की जांच के लिए एक दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है. जिलाधिकारियों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को दो से तीन दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपनी है.
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि जांच में जहां भी अनियमितता या लापरवाही सामने आएगी, वहां जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इसका उद्देश्य मतदाता सूची में गलतियों को रोकना और पूरी प्रक्रिया की जवाबदेही तय करना है.
अजीबोगरीब नामों की भी जांच
हाल ही में हुए विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में मतदाता सूची में नामों की त्रुटियों को लेकर भी सवाल उठे हैं. नवदीप रिणवा ने कहा कि कुछ नामों में दिखाई देने वाली असामान्य प्रविष्टियां तकनीकी खामियों का परिणाम हो सकती हैं.
उनका कहना है कि संबंधित अधिकारियों को ऐसे नामों की जांच कर आवश्यक सुधार करना चाहिए था. इस मामले में जिलाधिकारी और मंडलायुक्त से जवाब मांगा गया है. रिटर्निंग ऑफिसर और ईआरओ के जवाब मिलने के बाद जिम्मेदारी तय कर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
आगरा में तीन बूथों पर पुनर्मतदान की सिफारिश
आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आकाश अग्रवाल ने पांच मतदान स्थलों पर बूथ कैप्चरिंग और गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए पुनर्मतदान की मांग की थी. मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, शिकायत की जांच कराई गई, जिसमें पांच में से तीन मतदान स्थलों पर गड़बड़ी पाई गई.
इसके बाद खेरागढ़, सैंया और फतेहाबाद के संबंधित मतदान स्थलों पर पुनर्मतदान कराने की सिफारिश भारत निर्वाचन आयोग को भेजी गई है. अब पुनर्मतदान पर अंतिम फैसला आयोग के निर्देश के अनुसार होगा. इस मामले में उम्मीदवार का वीडियो भी सामने आया था, जिसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने उनसे बातचीत की थी.
बूथों पर चल रहा विशेष मतदाता पंजीकरण अभियान
प्रदेश में पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए विशेष मतदाता पंजीकरण अभियान चलाया जा रहा है. शनिवार को सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक सभी मतदान केंद्रों पर बूथ लेवल अधिकारी मौजूद रहे, ताकि पात्र नागरिक मतदाता बनने के लिए आवेदन कर सकें. नवदीप रिणवा ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने बूथ पर जाकर मतदाता सूची में अपना नाम जांचें और अगर वो पात्र हैं, लेकिन उनका नाम सूची में नहीं है, तो पंजीकरण के लिए आवेदन करें.
इस अभियान के तहत उन लोगों की भी जांच की जा रही है, जो 27 अक्टूबर 2025 को विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू होने से पहले मतदाता सूची में शामिल थे, लेकिन 10 अप्रैल को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में उनका नाम नहीं था. ऐसे पात्र नागरिकों को दोबारा सूची में शामिल करने के लिए आवेदन की सुविधा दी जा रही है.
यूपी में मतदाताओं की संख्या और अनुमानित आबादी में बड़ा अंतर
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राज्य में मतदाता संख्या और 18 साल से अधिक उम्र की अनुमानित आबादी के बीच अंतर पर भी ध्यान दिलाया. उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 18 साल से अधिक उम्र के लोगों की अनुमानित संख्या करीब 16 करोड़ 17 लाख है, जबकि मतदाता सूची में 13 करोड़ से अधिक मतदाता दर्ज हैं.
उन्होंने बताया कि अनुमानित आबादी और पंजीकृत मतदाताओं के बीच करीब 2.70 करोड़ का अंतर है. इसमें लगभग 1.70 करोड़ महिलाएं और एक करोड़ पुरुष शामिल बताए गए हैं. इस अंतर को देखते हुए विशेष अभियान के जरिए पात्र लोगों की पहचान और मतदाता पंजीकरण पर जोर दिया जा रहा है.
महिलापुरुष अनुपात का भी जिक्र
नवदीप रिणवा ने महिलापुरुष अनुपात का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना में प्रति 1,000 पुरुषों पर 911 महिलाएं थीं, जबकि वर्तमान में उनके अनुसार यह अनुपात करीब 835 है. उन्होंने इसे बड़ा अंतर बताते हुए मतदाता सूची में पात्र नागरिकों का पंजीकरण सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया.
यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी का संदेश साफ है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी या लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय होगी. पीलीभीत में कार्रवाई, प्रदेशभर में जांच और आगरा में पुनर्मतदान की सिफारिश के बीच आयोग का जोर मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने पर है.



