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​दुश्मन के ड्रोन-रडार की खैर नहीं! DRDO ने शुरू की ‘SHIELD’ प्रोग्राम के तहत नई हाई-पावर माइक्रोवेव तकनीक

​दुश्मन के ड्रोन-रडार की खैर नहीं! DRDO ने शुरू की ‘SHIELD’ प्रोग्राम के तहत नई हाई-पावर माइक्रोवेव तकनीक

नई दिल्ली। देशभर में हो रहे युद्ध के बीच भारत अपनी सैन्य शक्ती को लगातार मजबूत बना रहा है। देश हर दिन विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। जहां कुछ दिन पहले ही ISRO ने GSLV F17 लॉन्च किया था, ताकी देश को दुश्मनों से बचाया जा सके। वहीं अब एक नया गौरव अपने नाम करने की तैयारी में है। भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है। इसी कड़ी में देश ने डायरेक्टेडएनर्जी वेपन्स , एंटीड्रोन तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के क्षेत्र में एक और अहम कदम बढ़ाया है। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन ने ‘SHIELD’ प्रोग्राम के तहत एक अत्याधुनिक सिस्टम विकसित करने के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल यानी टेंडर जारी किया है।

इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य ऐसी तकनीक तैयार करना है, जिसके जरिए दुश्मन के ड्रोन्स, रडार, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन सिस्टम पर ऊर्जा आधारित प्रभाव डाला जा सके। यह पहल भारत की गैरकाइनेटिक यानी बिना पारंपरिक गोलीबारूद के ऊर्जा आधारित रक्षा प्रणालियों की क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Sबैंड हाई पावर माइक्रोवेव सिस्टम पर काम

SHIELD प्रोग्राम के तहत Sबैंड हाई पावर माइक्रोवेव सिस्टम तैयार किया जा रहा है। यह सिस्टम GaN सॉलिडस्टेट एम्पलीफायर्स की मदद से काम करेगा।

डायरेक्टेड एनर्जी के जरिए यह प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कमजोरियों और उनकी सुरक्षा क्षमता को परखने के लिए इस्तेमाल की जाएगी। इसका मकसद आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों पर ऊर्जा आधारित हमलों के प्रभाव का आकलन करना भी है।

3 kV/m तक पीक इलेक्ट्रिक फील्ड स्ट्रेंथ

प्रस्तावित सिस्टम पल्स मोड में कम से कम 3 kV/m की पीक इलेक्ट्रिक फील्ड स्ट्रेंथ पैदा करने में सक्षम होगा।

इस तकनीक के जरिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स का इस्तेमाल कर आधुनिक ड्रोन, सेंसर और कम्युनिकेशन उपकरणों को प्रभावित या निष्क्रिय करने की क्षमता विकसित करने पर जोर है। इससे भविष्य के युद्धक्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के खिलाफ ऊर्जा आधारित विकल्प मजबूत हो सकते हैं।

रडार से ड्रोन तक, प्रभाव का होगा आकलन

इस सिस्टम के जरिए रडार, कम्युनिकेशन सिस्टम, सेंसर और ड्रोन जैसे लक्ष्यों पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा। इससे काउंटरUAS यानी ड्रोन रोधी तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताओं को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

विशेष रूप से आधुनिक युद्ध में ड्रोन और ड्रोन स्वार्म के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए हाई पावर माइक्रोवेव तकनीक को महत्वपूर्ण रक्षा क्षमता के तौर पर विकसित किया जा रहा है।

1 किलोमीटर दूर से ड्रोन स्वार्म को किया जा चुका है नाकाम

DRDO पहले भी हाई पावर माइक्रोवेव तकनीक से जुड़े प्रोटोटाइप पर काम कर चुका है। इन प्रोटोटाइप्स ने 1 किलोमीटर की दूरी से ड्रोन के झुंड को नाकाम करने में सफलता हासिल की थी।

अब SHIELD प्रोग्राम के तहत इसी दिशा में तकनीक की रेंज और प्रभावशीलता बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।

बिना गोलीबारूद के दुश्मन की इलेक्ट्रॉनिक ताकत पर वार

इस पहल का एक बड़ा उद्देश्य भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और नॉनकाइनेटिक हथियार प्रणालियों के स्वदेशी विकास को बढ़ावा देना है।

नॉनकाइनेटिक हथियार पारंपरिक गोलाबारूद के बजाय ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक प्रभावों के जरिए लक्ष्य को प्रभावित करने की क्षमता पर आधारित होते हैं। SHIELD प्रोग्राम के जरिए ऐसी स्वदेशी क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

यह पहल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती दे सकती है और अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने की दिशा में मददगार हो सकती है।

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