भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए यह हफ्ता दिवाली से कम नहीं रहा. लंबे समय तक गिरावट और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बाद बाजार ने जोरदार वापसी की है. इस हफ्ते निफ्टी में करीब 8% की तेजी दर्ज की गई. यह जनवरी 2021 के बाद निफ्टी की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त है. जनवरी 2021 में निफ्टी 9.5% चढ़ा था. अब सवाल ये है कि क्या दिवाली के बाद भी ऐसा ही धमाल जारी रहेगा?

शेयर बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों की संपत्ति में भी बड़ा इजाफा हुआ है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 20 लाख करोड़ रुपए बढ़कर 502 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया है. खास बात यह है कि दुनिया के कई बड़े शेयर बाजारों में गिरावट के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी आई है. अमेरिका और एशिया के बाजारों में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली. वहीं, भारतीय शेयर बाजार ने इसके उलट प्रदर्शन किया.
अमेरिकी और एशियाई बाजारों में भारी गिरावट
दुनिया के शेयर बाजारों में टेक्नोलॉजी और AI कंपनियों के शेयरों पर दबाव बना हुआ है. अमेरिका का टेक्नोलॉजी बेस्ड नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्स एक दिन में 5.52% गिरकर 24,315 पर बंद हुआ. अप्रैल 2025 के बाद यह इसकी एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट बताई गई है. इस गिरावट के कारण नैस्डैक अपने पिछले महीने के रिकॉर्ड स्तर से 10% से ज्यादा नीचे आ गया.
इसका असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया. शुक्रवार को कारोबार शुरू होने के कुछ ही समय बाद जापान का निक्केई इंडेक्स करीब 7% गिर गया. दक्षिण कोरिया और ताइवान के प्रमुख शेयर बाजारों में भी 8% से ज्यादा की गिरावट आई. दक्षिण कोरिया की सैमसंग और SK Hynix के शेयर भी शुरुआती कारोबार में 10% से ज्यादा टूट गए. हालांकि, बाद में कुछ निवेशकों ने सस्ते भाव पर शेयर खरीदने शुरू किए, जिससे बाजार में गिरावट कुछ कम हुई.
भारत को कैसे मिल रहा फायदा?
अमेरिका में टेक्नोलॉजी और AI कंपनियों के शेयरों में गिरावट की एक वजह निवेशकों की चिंता है. उन्हें आशंका है कि अमेरिका में नियमों की सख्ती बढ़ने से डेटा सेंटर बनाने और AI से जुड़े निवेश की रफ्तार धीमी हो सकती है. अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद भी बाजार में नियमों को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं. इससे टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली तेज हुई. गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार की कुल वैल्यू में करीब 2.5 लाख करोड़ डॉलर की कमी आई. इसका फायदा भारतीय बाजार को मिल सकता है. दरअसल, जब विदेशी निवेशक महंगे AI और टेक्नोलॉजी शेयरों में अपना निवेश कम करते हैं, तो वे दूसरे बाजारों में निवेश के मौके तलाशते हैं. ऐसे में भारतीय शेयर बाजार उनके लिए एक विकल्प बनकर उभर रहा है.
विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार को मिला सहारा
भारतीय बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की खरीदारी भी है. पिछले कई महीनों से विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयरों की लगातार बिकवाली कर रहे थे. इससे भारतीय कंपनियों में उनकी हिस्सेदारी काफी नीचे आ गई थी. लेकिन अब उनके रुख में बदलाव दिखाई दे रहा है. उपलब्ध शुरुआती एक्सचेंज आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में करीब 15,000 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे. एक दिन में हुई यह खरीदारी एक साल से ज्यादा समय में सबसे बड़ी बताई गई है. वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशक लगातार मुनाफा वसूली कर रहे हैं. हालांकि, जानकारों का मानना है कि जब तक विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहेगी, भारतीय बाजार में मजबूती बनी रह सकती है.
क्या आगे भी जारी रहेगी शेयर बाजार की तेजी?
अब निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बाजार की यह तेजी लंबे समय तक जारी रहेगी या यह कुछ समय की राहत भर है. ET की एक रिपोर्ट में ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Nomura का मानना है कि भारत में विदेशी निवेश बढ़ने की संभावनाएं बेहतर हो रही हैं.. इसकी वजह भारतीय कंपनियों के अच्छे नतीजे, शेयरों की पहले के मुकाबले कम कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी आना है. फर्म के मुताबिक, 8 अक्टूबर के बाद से भारतीय बाजार डॉलर के हिसाब से करीब 6% चढ़ चुका है. इस दौरान भारतीय बाजार ने दक्षिण कोरिया, ताइवान और नैस्डैक जैसे बाजारों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है.
ब्रोकरेज फर्म ने कुछ अन्य वजहों का भी जिक्र किया है. इनमें विदेशी निवेशकों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में संभावित कटौती, दुनिया में ब्याज दरों में कमी और रुपए को सहारा देने के लिए केंद्रीय बैंक की ओर से संभावित कदम शामिल हैं.
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