पिछले एक दशक में खानपान में मशरूम का इस्तेमाल बढ़ा है. सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों में इसके चलन को रफ्तार मिली. आंकड़े बताते हैं कि दुनिया में मशरूम की 14 हजार कि किस्मे हैं, लेकिन हर मशरूम खाने लायक नहीं होता. इसकी कुछ चुनिंदा वैरायटी सुरक्षित होती हैं. उसमें पोषण होता है और पौष्टिक भी. मशरूम जहरीले भी होते हैं. इसलिए इसे सुरक्षित जगह से खरीदाना भी जरूरी है. दुनिया के कुछ चुनिंदा देश मशरूम उगाने में आगे हैं, इसमें चीन पहले पायदान है.

चीन में मशरूम का उत्पादन इतना ज्यादा है कि कोई दूसरा देश आसपास फटकता भी नहीं है. जापान, भारत और अमेरिका इस सूची में बाद आते हैं.
क्या कहते हैं आंकड़े?
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन के FAOSTAT डेटाबेस के 2024 के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में मशरूम और ट्रफल का कुल उत्पादन करीब 5.16 करोड़ टन रहा. इसमें अकेले चीन का हिस्सा करीब 4.86 करोड़ टन, यानी लगभग 94.2 फीसदी है. जापान लगभग 4.95 लाख टन के साथ दूसरे नंबर पर है. भारत 3.47 लाख टन के साथ तीसरे और अमेरिका करीब 2.99 लाख टन के साथ चौथे स्थान पर है. इसके बाद पोलैंड, नीदरलैंड, स्पेन और कनाडा आते हैं.
दुनिया में मशरूम की 14 हजार कि किस्मे हैं. फोटो: Pexels
चीन की संस्था CEFA के मुताबिक, वहां 2023 में खाने योग्य मशरूम का उत्पादन 4.334 करोड़ टन रहा और मूल्य 396.56 अरब युआन था. यह साल और गणना का फर्क है, लेकिन दोनों आंकड़ों में चीन का दबदबा साफ दिखता है. CEFA के अनुसार चीन का हिस्सा दुनिया के कुल उत्पादन का 92 फीसदी से ऊपर है.
जापान और अमेरिका की स्थिति
जापान के कृषि मंत्रालय के अनुसार 2021 में जापान में मशरूम का उत्पादन करीब 4.62 लाख टन रहा और पिछले कुछ सालों से लगभग इसी स्तर के आसपास टिका है. सबसे ज्यादा मूल्य ताजा शिताके का है, फिर बूनाशिमेजी और माइताके .
अमेरिका में सबसे ज्यादा उगने वाला मशरूम सामान्य सफेद बटन है. USDANASS के अनुसार पेंसिल्वेनिया राज्य अकेले देश का सबसे बड़ा मशरूम उत्पादक है.
मशरूम जहरीले भी होते हैं, इसलिए इसे सुरक्षित जगह से खरीदाना भी जरूरी है. फोटो: Pexels
चीन आगे क्यों है?
- फैक्ट्री खेती का विस्तार: CEFA के मुताबिक पिछले दशक में फैक्ट्रीस्तर की खेती तेजी से बढ़ी, जिससे उत्पादन 2014 के 3.27 करोड़ टन से बढ़कर 2023 में 4.33 करोड़ टन हो गया.
- वैरायटी: चीन में 1,000 से ज्यादा प्रजातियां मौजूद हैं. वहां शिताके, ऑयस्टर, ईनोकी, वुड ईयर और बटन जैसी कई किस्में लाखों टन में उगाई जाती हैं. शिताके अकेले 2023 में करीब 1.304 करोड़ टन रहा, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 98 फीसदी बताया गया है.
- गरीबी हटाने की नीति: एक शोध के अनुसार, चीन के 400 से ज्यादा गरीबबहुल आबादी ने खाने योग्य मशरूम को कमाई का जरिया बनाया. सरकार की तरफ से भी इसके लिए सहूलियतें मिलीं.
- बड़ा घरेलू बाजार: इस उत्पादन का बड़ा हिस्सा चीन के भीतर ही बिकता है. बड़ी आबादी के कारण यहां की जरूरत भी ज्यादा है. इसलिए उत्पादन भी ज्यादा होता है.
चीन दुनिया में 120 से अधिक देशों को मशरूम एक्सपोर्ट करता है. फोटो: Pexels
चीन कहां एक्सपोर्ट करता है?
चीन भले ही मशरूम के उत्पादन में आगे है, लेकिन यहां आबादी ज्यादा होने के कारण उपभोक्ता भी बहुत हैं. इसके बावजूद चीन दुनिया में 120 से अधिक देशों को मशरूम एक्सपोर्ट करता है. इनमें जापान, दक्षिण कोरिया, आसियान देश, अमेरिका और यूरोपीय संघ हैं. इनमें जापान उगाए गए मशरूम का सबसे बड़ा आयातक है.



