
लखनऊ, अमृत विचार। महंगाई के दौर में पढ़ाई का खर्च भी लगातार बढ़ता जा रहा है। स्कूलकॉलेज की फीस से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तक, किताबों और रेफरेंस बुक्स पर हर महीने अच्छीखासी रकम खर्च हो जाती है। खासकर मध्यमवर्गीय परिवारों और छात्रों के लिए महंगी किताबें खरीदना जेब पर भारी पड़ता है, लेकिन अब किताबों के लिए बारबार पैसे खर्च करने की जरूरत कम हो सकती है। Gomti Book Festival 2026 में शिक्षा मंत्रालय की राष्ट्रीय ईपुस्तकालय पहल के जरिए पाठकों को 7000 से अधिक किताबें डिजिटल माध्यम से मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही हैं।
महंगी किताबों को कहें टाटाबायबाय
अगर आप विद्यार्थी हैं, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं या पढ़ने का शौक रखते हैं, तो राष्ट्रीय ईपुस्तकालय आपके लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है। यहां अलगअलग विषयों और भाषाओं की हजारों किताबें डिजिटल रूप में उपलब्ध हैं। यानी हर किताब के लिए बाजार जाकर पैसे खर्च करने या भारीभरकम किताबें खरीदकर रखने की जरूरत नहीं।
मोबाइल में साथ रहेगी पूरी डिजिटल लाइब्रेरी
इस ईपुस्तकालय की सबसे बड़ी सुविधा यह है कि किताबें डिजिटल डिवाइस के जरिए पढ़ी जा सकती हैं। इसका मतलब है कि आपकी लाइब्रेरी आपके मोबाइल में ही साथ रहेगी। घर हो, कॉलेज हो या सफर—पाठक अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार डिजिटल किताबों तक पहुंच बना सकते हैं।
यानी भारी बैग में किताबें ढोने की चिंता भी कम और किताबों पर होने वाला खर्च भी बच सकता है।
25 से ज्यादा भाषाओं में किताबें
राष्ट्रीय ईपुस्तकालय में अलगअलग भाषाओं में किताबों का संग्रह उपलब्ध कराया जा रहा है। पोस्टर के मुताबिक यहां 25 से ज्यादा भाषाओं में किताबें मौजूद हैं। इससे हिंदी, अंग्रेजी, भोजपुरी समेत विभिन्न भाषाओं में पढ़ने वाले पाठकों को अपनी पसंद की सामग्री तलाशने का विकल्प मिलता है।
250 से ज्यादा प्रकाशकों की किताबें
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 250 से अधिक प्रकाशकों की किताबें शामिल हैं। ऐसे में पाठकों को अलगअलग किताबों की तलाश में कई जगह भटकने की जरूरत नहीं पड़ती। एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अलगअलग प्रकाशकों की किताबों का विकल्प मिल जाता है।
20 से ज्यादा जॉनर, अपनी पसंद की किताब चुनें
पाठकों की अलगअलग रुचियों को ध्यान में रखते हुए किताबों को 20 से अधिक जॉनर में रखा गया है। यानी आपको कहानी, साहित्य, ज्ञानवर्धक सामग्री या अपनी रुचि के दूसरे विषयों की किताबें तलाशने में आसानी होगी।
बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए किताबें
राष्ट्रीय ईपुस्तकालय में उम्र के हिसाब से भी किताबों की श्रेणियां दी गई हैं। पोस्टर के मुताबिक 38 वर्ष, 913 वर्ष, 1418 वर्ष और वयस्क पाठकों के लिए अलगअलग कैटेगरी उपलब्ध हैं। इससे अभिभावक बच्चों की उम्र और रुचि के मुताबिक किताबें खोज सकते हैं।
आम लोगों के लिए क्यों खास है ये पहल?
आज जब एक अच्छी किताब खरीदने में भी कई बार सैकड़ों रुपये खर्च हो जाते हैं, ऐसे में हजारों डिजिटल किताबों तक मुफ्त पहुंच छात्रों और आम पाठकों के लिए बड़ी राहत हो सकती है। खासकर उन परिवारों के लिए जहां बच्चों की पढ़ाई का खर्च पहले से ही बजट पर दबाव डालता है।
सीधी बात ये है कि किताबें पढ़ने के लिए हर बार जेब ढीली करने की जरूरत नहीं राष्ट्रीय ईपुस्तकालय आपकी डिजिटल लाइब्रेरी को मोबाइल तक पहुंचाने की कोशिश है।
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