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​Government Bond vs FD: 7% सरकारी बॉन्ड या 7.5% FD, कहां निवेश करें?

सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7% के पार पहुंच गई है. वहीं, कुछ बैंक एफडी पर 7% से ज्यादा ब्याज दे रहे हैं. ऐसे में सुरक्षित निवेश की तलाश करने वाले लोगों के लिए सरकारी बॉन्ड और फिक्स्ड डिपॉजिट के बीच तुलना करना जरूरी हो गया है. हालांकि, दोनों निवेश विकल्पों में ब्याज, जोखिम और पैसे निकालने की शर्तें अलग हैं.

​Government Bond vs FD: 7% सरकारी बॉन्ड या 7.5% FD, कहां निवेश करें?

10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7% पार

भारत के बेंचमार्क 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 24 सितंबर को बढ़कर 7.1067% हो गई. 6.94% 2036 सरकारी बॉन्ड की यील्ड में एक दिन में 6 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई. यह स्तर 21 मई के बाद सबसे ऊंचा था.

बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों और रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति को लेकर बदलती उम्मीदों का असर बताया गया है. अमेरिका में लंबी अवधि के बॉन्ड की यील्ड बढ़ने से भारतीय बॉन्ड बाजार पर भी प्रभाव पड़ सकता है.

FD पर 6% से 7.5% तक ब्याज

बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में ब्याज दर बैंक और निवेश की अवधि के आधार पर अलगअलग होती है. Financial Express की रिपोर्ट के अनुसार, एचडीएफसी बैंक में 3 करोड़ रुपये से कम की जमा पर कई लंबी अवधि के लिए ब्याज दर 6.25% से 6.50% के बीच है. वहीं, IDFC FIRST Bank कुछ अवधियों पर सामान्य ग्राहकों को 7.10% और वरिष्ठ नागरिकों को 7.35% तक ब्याज देता है.

कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक चुनिंदा अवधि पर इससे अधिक FD दरें भी दे सकते हैं. हालांकि, निवेशकों को बैंक की स्थिति, जमा बीमा सीमा और संबंधित अवधि की शर्तों पर ध्यान देना चाहिए.

सरकारी बॉन्ड और FD में सबसे बड़ा अंतर

FD में पैसा एक निश्चित अवधि के लिए जमा किया जाता है. अगर निवेशक मैच्योरिटी तक FD बनाए रखता है, तो लागू शर्तों के अनुसार उसे रकम मिलती है. इससे भविष्य में मिलने वाली राशि का अनुमान लगाना आसान होता है.

सरकारी बॉन्ड को मैच्योरिटी तक रखने पर उसकी शर्तों के अनुसार मूलधन मिलता है. लेकिन अगर निवेशक मैच्योरिटी से पहले इसे बेचता है, तो बाजार की ब्याज दरों के अनुसार बॉन्ड की कीमत बदल सकती है.

जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो पुराने बॉन्ड की कीमत सामान्यतः गिरती है. इसके विपरीत, ब्याज दरों में गिरावट से पुराने बॉन्ड की बाजार कीमत बढ़ सकती है. इसलिए 7% की यील्ड का मतलब यह नहीं है कि निवेशक दोतीन साल बाद बेचने पर भी निश्चित रूप से 7% रिटर्न पाएगा.

निवेश से पहले टैक्स और जोखिम समझें

सरकारी बॉन्ड और FD दोनों से मिलने वाली ब्याज आय पर लागू इनकम टैक्स नियमों के अनुसार टैक्स लग सकता है. इसलिए सिर्फ ब्याज दर देखकर फैसला करना उचित नहीं है. टैक्स के बाद मिलने वाला रिटर्न भी महत्वपूर्ण है.

विशेषज्ञों के अनुसार, जिन निवेशकों को नियमित रूप से पैसे की जरूरत पड़ सकती है, उन्हें लंबी अवधि के बॉन्ड में ब्याज दर के जोखिम को समझना चाहिए. दूसरी ओर, लंबे समय तक निवेश बनाए रखने की क्षमता रखने वाले लोग सरकारी बॉन्ड को अपने फिक्स्ड इनकम निवेश में शामिल करने पर विचार कर सकते हैं.

कहां निवेश करें?

सरकारी बॉन्ड और FD अलगअलग जरूरतों को पूरा करते हैं. FD में मैच्योरिटी राशि की पूर्वानुमेयता और सरलता महत्वपूर्ण होती है, जबकि सरकारी बॉन्ड में सरकारी क्रेडिट गुणवत्ता के साथ बाजार कीमत में उतारचढ़ाव का जोखिम रहता है.

निवेश का फैसला करने से पहले यह तय करें कि आपको पैसे की जरूरत कब होगी, कितने समय तक निवेश रख सकते हैं और बाजार में बदलाव का कितना जोखिम स्वीकार कर सकते हैं.

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