भारत के रियल एस्टेट मार्केट में अब सिर्फ दिल्लीNCR, मुंबई, बेंगलुरु और दूसरे बड़े मेट्रो शहरों की चर्चा नहीं है. देश के कई Tier2 शहर तेजी से रियल एस्टेट के नए ग्रोथ सेंटर बन रहे हैं. नई CIIKnight Frank India रिपोर्ट के मुताबिक 11 उभरते रियल एस्टेट मार्केट में 2021 से 2026 के बीच घरों की कीमतें औसतन 63% बढ़ी हैं, जबकि देश के टॉप 8 शहरों में इसी दौरान कीमतों में करीब 42% की बढ़ोतरी हुई. यानी छोटे शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी बड़े शहरों के मुकाबले काफी तेज रही है.

रिपोर्ट में भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़ ट्राइसिटी, गोवा, इंदौर, जयपुर, कोच्चि, लखनऊ, नागपुर, विशाखापत्तनम और कोयंबटूर को अगले दौर के संभावित रियल एस्टेट मार्केट के तौर पर शामिल किया गया है. इन 11 मार्केट में 2016 से 2026 के बीच घरों की कीमतों में औसतन 8% सालाना बढ़ोतरी रही, जबकि देश के 8 बड़े शहरों में यह करीब 4% थी. यानी पिछले 10 साल के हिसाब से भी इन उभरते शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें बड़े शहरों के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ी हैं.
कहां कितनी महंगी है प्रॉपर्टी?
इन शहरों में कीमतों का अंतर काफी बड़ा है. गोवा में रिहायशी प्रॉपर्टी करीब 11,50013,500 रुपये प्रति वर्ग फुट तक है. चंडीगढ़ ट्राइसिटी में यह करीब 7,50010,500 रुपये जबकि जयपुर और कोच्चि में 7,0009,000 रुपये प्रति वर्ग फुट है. वहीं, लखनऊ में करीब 6,5008,500 रुपये कोयंबटूर में 6,0008,000 रुपये और इंदौर में 5,5007,500 प्रति वर्ग फुट का प्राइस रेंज है, जबकि नागपुर और विशाखापत्तनम में यह करीब 4,5006,500 रुपये और भोपाल में 5,0007,000 रुपये प्रति वर्ग फुट है.
| शहर | प्रति वर्ग फुट |
| गोवा | 11,50013,500 रुपये |
| चंडीगढ़ ट्राइसिटी | 7,50010,500 रुपये |
| जयपुर | 7,0009,000 रुपये |
| कोच्चि | 7,0009,000 रुपये |
| लखनऊ | 6,5008,500 रुपये |
| कोयंबटूर | 6,0008,000 रुपये |
| इंदौर | 5,5007,500 रुपये |
| भोपाल | 5,0007,000 रुपये |
| नागपुर | 4,5006,500 रुपये |
| विशाखापत्तनम | 4,5006,500 रुपये |
सोर्सCIIKnight Frank India
इसका मतलब है कि Tier2 शहरों में अभी भी बड़े मेट्रो शहरों के मुकाबले घर खरीदने की शुरुआती कीमत कई मामलों में कम है, लेकिन तेजी से बढ़ती कीमतों की वजह से यह अंतर धीरेधीरे कम हो रहा है. क्रिसिल इंटेलिजेंस के मुताबिक 10 बड़े Tier2 शहरों में रिहायशी प्रॉपर्टी की डिमांड FY2021 से FY2026 के बीच हर साल औसतन 14% की रफ्तार से बढ़ी. नागपुर, कोयंबटूर और लखनऊ में डिमांड ग्रोथ करीब 20% सालाना रही.
आखिर छोटे शहरों में इतना बड़ा प्रॉपर्टी बूम क्यों?
इसके पीछे सबसे बड़ा फैक्टर इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी है. बेहतर एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, मेट्रो कनेक्टिविटी, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और शहरों के आसपास बढ़ती आर्थिक गतिविधियों ने इन मार्केट को डेवलपर्स और घर खरीदने वालों दोनों के लिए ज्यादा आकर्षक बनाया है. CIIKnight Frank के मुताबिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी, आर्थिक गतिविधियों, रोजगार और लोगों के खर्च में सुधार इन शहरों के रियल एस्टेट ग्रोथ को सपोर्ट कर रहा है.
इसके अलावा कोविड के बाद घर खरीदने वालों की पसंद में भी बदलाव आया है. हाइब्रिड वर्किंग ने लोगों को ऑफिस के पास रहने की मजबूरी कुछ हद तक कम की है. ऐसे में छोटे शहरों में बड़े घर, बेहतर सुविधाएं और तुलनात्मक रूप से कम कीमत का कॉम्बिनेशन खरीदारों को आकर्षित कर रहा है. CIIKnight Frank के मुताबिक Tier2 शहरों में खरीदार अलगअलग छोटी बिल्डिंग से हटकर एक ही कैंपस में घर, पार्किंग, पार्क और दूसरी सुविधाओं वाले हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की तरफ बढ़ रहे हैं.
क्या इसका मतलब मेट्रो शहरों का दौर खत्म?
ऐसा नहीं है. बड़े शहर अभी भी देश के रियल एस्टेट मार्केट का बड़ा हिस्सा हैं. CIIKnight Frank की रिपोर्ट भी बताती है कि टॉप 8 शहर घरों की बिक्री और पूरे बाजार की गतिविधियों में अहम बने रहेंगे, लेकिन डेटा यह संकेत दे रहा है कि रियल एस्टेट की अगली ग्रोथ का एक हिस्सा मेट्रो शहरों के बाहर बन रहा है.
लेकिन यहां बड़ा सवाल भी यही है कि क्या सिर्फ सड़क, एयरपोर्ट या एक्सप्रेसवे किसी शहर को लंबे समय तक प्रॉपर्टी हॉटस्पॉट बना सकते हैं? CIIKnight Frank के मुताबिक सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर काफी नहीं है. किसी शहर में लंबे समय तक रियल एस्टेट ग्रोथ के लिए रोजगार, कारोबार, आबादी में बढ़ोतरी, लोगों का खर्च और शहर में आगे विकास की क्षमता का साथ आना भी जरूरी है.
इसलिए Tier2 शहरों का मौजूदा प्रॉपर्टी बूम एक बड़ा बदलाव जरूर दिखाता है, लेकिन हर छोटे शहर में कीमत बढ़ने का मतलब यह नहीं कि वहां आगे भी प्रॉपर्टी की कीमतें उसी रफ्तार से बढ़ेंगी. असली टेस्ट यह होगा कि इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ कितनी नौकरियां, कितनी आबादी और घरों की असली डिमांड आती है.



