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​भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार बरकरार, GDP ग्रोथ रेट 7.35% रहने का अनुमान

भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार बरकरार है. अक्टूबर 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, वित्त वर्ष 202627 की दूसरी तिमाही में देश की रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 7.35 प्रतिशत रहने का अनुमान है. हालांकि, इस दौरान महंगाई बढ़ने से आम लोगों की चिंता भी बढ़ी है. सितंबर में खुदरा महंगाई बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई, जबकि अगस्त में यह 4.83 प्रतिशत थी. खाद्य महंगाई भी बढ़कर 7.74 प्रतिशत पर पहुंच गई. दूसरी ओर, औद्योगिक उत्पादन, निर्यात, जीएसटी संग्रह और बैंक कर्ज में बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था को सहारा मिल रहा है.

​भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार बरकरार, GDP ग्रोथ रेट 7.35% रहने का अनुमान

भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.35% रहने का अनुमान

अक्टूबर 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा के अनुसार, वित्त वर्ष 202627 की दूसरी तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.35 प्रतिशत रह सकती है. पहली तिमाही में यह दर 7.8 प्रतिशत थी। यानी आर्थिक विकास की रफ्तार थोड़ी धीमी होने के बावजूद मजबूत बनी हुई है.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पूरे वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है. वहीं, विश्व बैंक, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन और भारतीय रिजर्व बैंक ने 7.1 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान जताया है.

औद्योगिक उत्पादन और जीएसटी कलेक्शन में बढ़ोतरी

देश के औद्योगिक क्षेत्र में भी मजबूती देखने को मिली है. अगस्त 2026 में औद्योगिक उत्पादन में सालाना आधार पर 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई. इस दौरान विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन 9 प्रतिशत बढ़ा. सितंबर में आठ प्रमुख उद्योगों के उत्पादन में भी 7.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सकल वस्तु एवं सेवा कर कलेक्शन में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई. वहीं, बैंक कर्ज की वृद्धि दर 21.6 प्रतिशत रही. इन आंकड़ों से पता चलता है कि देश में आर्थिक गतिविधियां जारी हैं और कारोबार को कर्ज के जरिए मदद मिल रही है.

महंगाई ने बढ़ाई चिंता, खानेपीने की चीजें महंगी

आर्थिक विकास के बीच महंगाई का दबाव बढ़ा है. सितंबर 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई, जो अगस्त में 4.83 प्रतिशत थी. खाद्य महंगाई भी बढ़कर 7.74 प्रतिशत पर पहुंच गई. प्याज, चीनी, खाद्य तेल और चावल की कीमतों में बढ़ोतरी को इसकी प्रमुख वजह बताया गया है. महंगाई पर काबू पाने के लिए RBI ने रेपो दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी की और मौद्रिक नीति के रुख को तटस्थ से धीरेधीरे सख्ती की ओर बदला. रेपो दर बढ़ने से कर्ज की ब्याज दरों पर भी असर पड़ सकता है.

निर्यात में 11% की बढ़ोतरी, विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत

वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के बावजूद सितंबर 2026 में भारत के वस्तुओं और सेवाओं के कुल निर्यात में सालाना आधार पर 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई. इसमें वस्तुओं के निर्यात में 23.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी की अहम भूमिका रही.

16 अक्टूबर 2026 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 721 अरब डॉलर था. यह राशि देश के करीब 10.3 महीने के आयात की जरूरतों को पूरा करने के बराबर है. विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत रहने से अंतरराष्ट्रीय भुगतान और बाहरी आर्थिक झटकों से निपटने में मदद मिलती है.

कम बारिश से कृषि पर दबाव

देश में कम बारिश का असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है. 2 अक्टूबर 2026 तक खरीफ फसलों की बुवाई का कुल क्षेत्र 1,115.31 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 1,127.12 लाख हेक्टेयर था. जून से सितंबर के बीच देश में सामान्य औसत के मुकाबले 13 प्रतिशत कम बारिश हुई. इससे फसलों के उत्पादन पर असर पड़ने और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा बना हुआ है.

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार और निवेश बढ़ा

वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण 202425 के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सकल मूल्यवर्धन 9.59 प्रतिशत बढ़ा. वहीं, स्थिर पूंजी में 10.54 प्रतिशत और रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या में 7.19 प्रतिशत की वृद्धि हुई. इसके अलावा, अगस्त 2026 में उद्योगों को दिए गए बैंक कर्ज में सालाना आधार पर 18.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई.

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